भारत

नेहा ने कहा कि जो लोग छात्रों के साथ खड़े होने का दावा करते हैं, वही छात्रों की मांगों को लेकर विधानसभा मार्च कर रहे युवकों पर स्याही फेंक रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं की दलील है कि आरक्षित वर्गों के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता मिलने से आरक्षण का लाभ अधिक व्यापक रूप से वितरित किया जा सकता है। दूसरी ओर, केंद्र का तर्क है कि SC और ST जैसे संवैधानिक वर्गों की पहचान और उनके लिए आरक्षण का आधार केवल आर्थिक पिछड़ापन नहीं है।
नेत्रपाल का कहना है कि ‘क्रीमी लेयर’ अथवा पीढ़ीगत प्रतिबंध लागू करने से पहले उसके प्रभाव को ठोस अनुभवजन्य आंकड़ों के आधार पर समझना जरूरी है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली
सीजेपी आन्दोलन से सफलता ने युवाओं को शांत नहीं किया है बल्कि युवा आवाज अब और तेज होने वाली है।
हाईकोर्ट का केंद्र से सवाल: वन कर्मियों को हथियार दिए, लेकिन चलाने का अधिकार क्यों नहीं?
 6 अगस्त को मुंबई में आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 100 शहरों से जुटने वाले जेन-जेड और जेन-अल्फा से रूबरू होंगे
सुप्रीम कोर्ट
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारतीय मुक्केबाजों ने रचा इतिहास, एमपी की यामिनी और अजय बाबू ने जीते रजत पदक, सरकार ने किया सम्मान का ऐलान
हजारों कर्मचारी आज भी ठेका व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं, उन्हें अपर्याप्त वेतन दिया जाता है, वैधानिक सेवा लाभों से वंचित रखा जाता है तथा सामाजिक सुरक्षा के अधिकारों से बाहर रखा जाता है। दशम ने इसे श्रम अधिकारों और संवैधानिक गारंटियों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।
जाती पंचायत ने शिकायतकर्ता के परिवार को सामाजिक बहिष्कार का शिकार बना दिया क्योंकि उनकी पत्नी किसी अन्य जाति की हैं।
शिकायत में कहा गया कि रुचिका सिंह ने सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया और यह कृत्य नफरत फैलाने तथा सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से किया गया।
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