
नई दिल्ली- भारत सरकार के आदेश पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर असहमति की आवाजों को दबाने का सिलसिला लगातार जारी है। केंद्र सरकार ने X और Instagram पर UGC इक्विटी रेगुलेशंस सहित अन्य मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मज़ाक उड़ाने, उनकी आलोचना करने और उन पर व्यंग्य करने वाली पोस्ट्स, तथा सरकार की आलोचना करने वाले अकाउंट्स को हटाने के लिए कई आदेश जारी किए हैं। पिछले एक सप्ताह में कई एक्टिविस्ट, कार्टूनिस्ट और बहुजन नेताओं समेत दर्जनों अकाउंट्स को भारत में withheld (ब्लॉक) कर दिया गया है। सोशल मीडिया कंपनियाँ, भारत में पोस्ट को अदृश्य करके 'टेकडाउन' (हटाने) के आदेशों का पालन करती हैं, जबकि वे अन्य देशों में उपलब्ध रहते हैं।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को इसकी तीखी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘कायर’ करार दिया और कहा कि सरकार अब सामग्री ब्लॉक करने के बाद पूरे अकाउंट्स को ही भारत में प्रतिबंधित कर रही है।
सुप्रिया श्रीनेत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहले सामग्री को बिना वजह ब्लॉक या डिलीट करवाया जाता था, अब अकाउंट्स को भारत में withheld किया जा रहा है। उन्होंने @Nher_who, @DrNimoYadav, @ActivistSandeep, @mrjethwani_, @indian_armada, @Doc_RGM और @DuckKiBaat जैसे अकाउंट्स का जिक्र करते हुए कहा कि ये हालिया उदाहरण हैं, लेकिन इनके अलावा कई और अकाउंट प्रभावित हुए हैं। श्रीनेत ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला बताया।
सुप्रिया ने पोस्ट में कहा, " आज सुबह ट्विटर पर तमाम ऐसे अकाउंट्स को इंडिया में ब्लॉक कर दिया जो सरकार से सवाल पूछते हैं, सरकार की विफलताओं को उजागर करते हैं, लोगों के मुद्दों पर सरकार को घेरते हैं यह एक नया ट्रेंड है. पहले सरकारी आदेश से कंटेंट ब्लॉक या डिलीट करवाओ और फिर अकाउंट को भारत में बैन कर दो यह काम अश्विनी वैष्णव के Ministry of Electronics and IT और Ministry of Information & Broadcasting के आदेश पर Section 69A of the IT Act के तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्म से कराया जा रहा है. सरकारी बाबू बैठ कर यह निर्धारित कर रहे हैं, क्या कंटेंट चलेगा क्या नहीं यह अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बहुत बड़ा हमला है. मुख्यधारा के मीडिया को अपना चरणचुंबक बना कर यह सारी कवायद अब सोशल मीडिया को रेगुलेट करने की है अश्विनी वैष्णव हर छोर पर विफल होने के बाद अपनी उपयोगिता कंटेंट और अकाउंट ब्लॉक करके सिद्ध कर रहे हैं।"
आईटी एक्ट का Section 69A सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या संप्रभुता से संबंधित मामलों में कंटेंट ब्लॉक करने का अधिकार देता है। MeitY (Ministry of Electronics and IT) और Ministry of Information & Broadcasting के आदेश पर X प्लेटफॉर्म इन ऑर्डर्स का पालन करता है।
पिछले एक महीने में X पर हटाई गई पोस्ट में हॉटमेल के सह-संस्थापक सबीर भाटिया का एक ज़िक्र शामिल है, जिसमें उन्होंने PM मोदी द्वारा एक संस्कृत सुभाषिता के वायरल हुए गलत अनुवाद की आलोचना की थी , भारत में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की आलोचना; और प्रधानमंत्री को दर्शाने वाले दो एनिमेटेड व्यंग्य चित्र शामिल हैं।
पिछले कुछ दिनों में कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के दो कार्टून भी भारत में ब्लॉक कर दिए गए, जिनमें प्रधानमंत्री और भारत-ईरान संबंधों का व्यंग्य था। इसी तरह बहुजन समुदाय से जुड़े एक्टिविस्ट और अन्य स्वतंत्र आवाजें भी प्रभावित हुई हैं। एक्स प्लेटफॉर्म प्रभावित यूजर्स को सूचना दे रहा है कि अकाउंट या पोस्ट भारत में उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्पष्ट कारण नहीं बताया जा रहा। ये ब्लॉक्स geo-specific हैं, यानी भारत से बाहर या VPN के जरिए देखे जा सकते हैं।
सोशल मीडिया सेंसरशिप में चिंताजनक बढ़ोतरी और कंटेंट हटाने की शक्तियों के प्रस्तावित विस्तार के खिलाफ इन्टरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने चिंता जाहिर की है, एक स्टेटमेंट में संगठन ने कहा, " हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि यूज़र्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से धारा 69A के तहत सामान्य "भारत में रोका गया" (withheld in India) नोटिस या ईमेल मिल रहे हैं, जिनमें बहुत कम या कोई स्पष्टीकरण नहीं होता; वहीं स्वतंत्र रिपोर्टों में ऐसे कंटेंट को हटाए जाने के मामले सामने आए हैं जो स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी होने के बजाय राजनीतिक, व्यंग्यात्मक या आलोचनात्मक प्रतीत होते हैं।"
18 मार्च को Business Standard और The Indian Express ने रिपोर्ट किया था, केंद्र सरकार अभी IT अधिनियम की धारा 69A के तहत कंटेंट ब्लॉक करने की शक्तियों को विकेंद्रीकृत करने के एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस नए प्रस्ताव के तहत कई मंत्रालयों को सीधे कंटेंट हटाने की शक्तियां मिल जाएंगी, जिनमें रक्षा, गृह मामले, विदेश मामले और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय शामिल हैं। वर्तमान में, धारा 69A के आदेशों पर MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) की मुहर लगती है, जबकि एक अलग नोटिस और कंटेंट हटाने का चैनल पहले से ही धारा 79(3)(b) और गृह मंत्रालय के नेतृत्व वाले 'सहयोग' पोर्टल के माध्यम से काम कर रहा है; इस पोर्टल में भारत भर के राज्य पुलिस विभागों में कम से कम 35 नोडल अधिकारी तैनात हैं।
इसके साथ ही, फरवरी 2026 में IT नियमों में किए गए संशोधनों ने नियमों के पालन (compliance) की समय-सीमा को काफी कम कर दिया है। MeitY के अपने प्रकाशित FAQ में कहा गया है कि मध्यस्थों (intermediaries) को अदालत के आदेश या सरकारी सूचना के माध्यम से वास्तविक जानकारी मिलने पर 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी; कुछ विशेष त्वरित शिकायतों के लिए 36 घंटे के भीतर; और नग्नता, यौन सामग्री, छेड़छाड़ की गई सामग्री (morphed content) तथा किसी और का रूप धारण करने (impersonation) से जुड़ी विशिष्ट शिकायतों के लिए 2 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। सरकार ने यह भी दोहराया है कि जो मध्यस्थ उचित सावधानी (due diligence) बरतने में विफल रहते हैं, उनके धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (immunity) खोने का जोखिम रहता है। गति, कानूनी धमकी और गोपनीयता पर आधारित एक प्रणाली स्वाभाविक रूप से 'अत्यधिक सावधानी' (over-compliance) बरतने को बढ़ावा देती है।
IFF ने सरकार से अपील करते हुए कहा, " हम केंद्र सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने 'श्रेया सिंघल मामले' में धारा 69A को इस आधार पर सही ठहराया था कि इसमें प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय और लिखित कारण शामिल हैं, जिन्हें चुनौती दी जा सकती है। गुप्त और पहुंच से बाहर सेंसरशिप, व्यवहार में उन सुरक्षा उपायों को ही निष्प्रभावी बना देती है। IFF केंद्र सरकार से अपील करता है कि वह Section 69A के तहत ब्लॉक करने की शक्तियों को और ज़्यादा विकेंद्रीकृत करने के किसी भी कदम को रोक दे; ब्लॉकिंग के आदेशों को केवल 'श्रेया सिंघल फ़ैसले' की भावना और उसके नियमों के अनुसार ही प्रकाशित करे; और प्रभावित यूज़र्स को समय पर नोटिस मिलना सुनिश्चित करे, जिसमें स्पष्ट कारण और समाधान के रास्ते बताए गए हों। प्लेटफ़ॉर्म्स को भी सिर्फ़ रटे-रटाए संदेश भेजने से कुछ ज़्यादा करना चाहिए। उन्हें सार्थक नोटिस देना चाहिए, चुनौती देने के लिए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने चाहिए, और विस्तृत पारदर्शिता रिपोर्ट प्रकाशित करनी चाहिए, क्योंकि ऑनलाइन सेंसरशिप से जानकारी पाने के जनता के अधिकार पर भी असर पड़ता है।"
सरकार का पक्ष है कि ये कदम फेक न्यूज, साम्प्रदायिक तनाव और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाए जा रहे हैं। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि सोशल मीडिया पर फेक कंटेंट को रोकने के लिए अन्य मंत्रालयों को भी ब्लॉकिंग पावर देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। हालांकि विपक्ष और डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता इसे लोकतंत्र पर खतरा बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले महीनों में सैकड़ों पोस्ट्स और कई अकाउंट्स पर ऐसे आदेश जारी हुए हैं। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया रेगुलेशन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस छेड़ दी है। प्रभावित यूजर्स को कानूनी रास्ता अपनाने या प्लेटफॉर्म से अपील करने की सलाह दी जा रही है।
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