शिक्षा

साहिल वाकोडे के माता-पिता ने मकवाना के समक्ष अपने बेटे की मृत्यु से पहले की परिस्थितियों संबंधी आरोप रखे और आयोग से उचित हस्तक्षेप की मांग करते हुए लिखित शिकायत प्रस्तुत की।
सुजात अम्बेडकर की अगुवाई में वंचित बहुजन अघाड़ी ने आईआईटी बॉम्बे निदेशक  शिरीष केदारे से मुलाकात कर साहिल वाकोडे के लिए न्याय की मांग की।
आईआईटी बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने छात्र साहिल वाकोडे की मौत के हालात की जांच के लिए 10 सदस्यों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई और प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला से छुट्टी पर जाने को कहा।
आईआईटी बॉम्बे के सभी शिक्षक इस समूह की पहचान या उसके रुख से सहमत नहीं हैं।
आईआईटी बोम्बे के 21 सितंबर को एक बयान में कहा कि साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में हमारे पिछले संदेश में कही गई बातों के लिए हम माफ़ी मांगते हैं।
जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में बुनियादी शैक्षणिक एवं छात्रहित से जुड़ी सुविधाओं और अधिकारों की मांग उठाने के कारण उनके साथ लगातार भेदभाव एवं उत्पीड़न किया जा रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट
पोस्टर में शूद्रों की भूमिका के तौर पर “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखे होने पर सबसे ज्यादा आपत्ति सामने आई और इसे जातिगत पदानुक्रम को बढ़ावा देने वाला बताया गया।
Allahabad High Court, UP Police
वीडियो में ज्ञान प्रकाश हाथ में गिलास लिए कुर्सी पर जल छिड़कते, मंत्रोच्चार करते तथा कुर्सी को प्रणाम करते दिख रहे हैं। कुछ क्लिप में पृष्ठभूमि में “शांति-शांति” और “ओम शांति” जैसे शब्द भी सुनाई देते हैं।
पोस्टर में चार सामाजिक समूहों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का उल्लेख किया गया था। इसमें ब्राह्मणों के लिए “ईश्वर का संदेश फैलाना”, क्षत्रियों के लिए “समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना” और वैश्यों के लिए “अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना तथा दूसरों की सहायता करना” जैसी भूमिकाएं लिखी गई थीं। वहीं शूद्रों के लिए “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखा था। यही हिस्सा विवाद का मुख्य कारण बना।
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