स्वास्थ्य

एमपी के बैगा इलाकों में बीमारी की गंभीर तस्वीर! 7,711 बच्चे गंभीर कुपोषित, 13,406 को डायरिया; 19 मौतों के बाद व्यापक जांच में कई स्वास्थ्य संकट उजागर
MP में 108 एंबुलेंस का घंटों इंतजार! 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला का घर पर प्रसव, सुबह पहुंची एंबुलेंस
सांकेतिक
MP: छिंदवाड़ा सरकारी अस्पताल SNCU में वार्मर में आग! झुलसे तीन नवजातों में एक की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
MP: रीवा-मऊगंज के 8 CHC होंगे आउटसोर्स, 5 साल निजी एजेंसी संभालेगी संचालन, जानिए क्यों लिया सरकार ने यह फैसला?
घंटों इंतजार के बाद अस्पताल की तरफ से कचरा उठाने वाला ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराया गया। परिवार शव को प्लास्टिक शीट में लपेटकर उसी वाहन से घर ले गया।
 गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव एवं प्रसवोत्तर अवधि तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राजस्थान में परिवार नियोजन की आवश्यकता वाली वर्तमान में विवाहित महिलाओं में से केवल 57.1 प्रतिशत आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग कर रही हैं। 17-18 प्रतिशत महिलाएँ पारंपरिक गर्भनिरोधक साधनों पर निर्भर हैं।
महिला पुलिस कर्मियों के लिए एक व्यापक मासिक धर्म स्वच्छता नीति (Menstrual Hygiene Policy) बनाने का भी निर्देश देने की प्रार्थना की गई है।
नवजात मासूम
जवान विकास सिंह 32वीं बटालियन आईटीबीपी महाराजपुर में तैनात हैं और फतेहपुर जिले के खागा हथगाम क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनके बटालियन में भी इस घटना पर गुस्सा है।
शोध में माना गया कि जिस तरह अमेरिका में अश्वेत और श्वेत समुदायों के बीच सामाजिक-आर्थिक स्थिति में समानता के बावजूद स्वास्थ्य असमानताएँ बनी रहती हैं, उसी तरह भारत में SC समुदाय के लिए जाति-आधारित भेदभाव, सामाजिक बहिष्करण और मनोसामाजिक तनाव बाल स्वास्थ्य को प्रभावित करते रहते हैं।
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