
भोपाल। इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। मध्य प्रदेश में एलपीजी (LPG) गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से संकट की स्थिति बन गई है। राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं और उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
गैस की कमी का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट और विवाह घरों के कारोबार पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। गैस की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती कीमतों के कारण कई होटल और मैरिज गार्डन संचालक अब खाना पकाने के लिए लकड़ी और अन्य वैकल्पिक ईंधनों का सहारा लेने लगे हैं।
भोपाल के कई विवाह घरों और होटलों में रसोई व्यवस्था बदलनी पड़ रही है। गैस सिलेंडर की कमी के चलते बड़े स्तर पर खाना बनाने के लिए लकड़ी के चूल्हों का उपयोग शुरू कर दिया गया है। होटल संचालकों का कहना है कि बिना गैस के बड़े पैमाने पर भोजन बनाना मुश्किल हो गया है, इसलिए उन्हें पुराने पारंपरिक तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
द मूकनायक की टीम ने भोपाल के एमपी नगर स्थित एक रेस्टोरेंट का भी दौरा किया, जहां गैस संकट का असर साफ तौर पर देखने को मिला। रेस्टोरेंट संचालक नवीन ने बताया कि एलपीजी गैस की कमी के कारण होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को संचालन में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे हालात में कारोबार को जारी रखने के लिए उन्हें अपने किचन के कामकाज में कई बदलाव करने पड़े हैं। नवीन ने बताया कि गैस की अनिश्चित आपूर्ति को देखते हुए उन्होंने अपने रेस्टोरेंट के किचन में इलेक्ट्रिक इंडक्शन आधारित कलेक्टिव किचन सेटअप तैयार किया है, ताकि खाना बनाने का काम पूरी तरह से ठप न हो।
नवीन ने बताया कि गैस संकट के कारण उन्हें किचन की पूरी व्यवस्था पर दोबारा विचार करना पड़ा। उन्होंने कहा, “गैस की कमी और सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए हमने अपने रेस्टोरेंट में कई बदलाव किए हैं। अब कई व्यंजन इंडक्शन चूल्हों पर बनाए जा रहे हैं, जिससे गैस पर निर्भरता कम हो सके। इसके साथ ही किचन स्टाफ को भी नई व्यवस्था के अनुसार काम करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि ग्राहकों को सेवा देने में ज्यादा परेशानी न हो।” उन्होंने बताया कि अचानक इस बदलाव को लागू करना आसान नहीं था, लेकिन कारोबार को जारी रखने के लिए यह जरूरी कदम उठाना पड़ा।
रेस्टोरेंट संचालक के अनुसार गैस संकट का असर मेन्यू पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि जिन व्यंजनों में गैस की खपत ज्यादा होती थी, जैसे तवा रोटी, कुछ ग्रिल आइटम और अन्य डिश, उन्हें फिलहाल मेन्यू से हटा दिया गया है। उनका कहना है कि अगर आने वाले दिनों में गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होती है, तो रेस्टोरेंट को और भी बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। नवीन के मुताबिक मौजूदा हालात में होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सीमित संसाधनों में ग्राहकों को बेहतर सेवा कैसे दी जाए।
द मूकनायक की टीम ने राजधानी भोपाल के एक लकड़ी टाल संचालक जमीर से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में लकड़ी की मांग में अचानक तेजी देखी जा रही है। जमीर के अनुसार पहले लकड़ी की खपत सीमित थी और यह मुख्य रूप से घरेलू उपयोग या छोटे स्तर के कारोबार तक ही सीमित रहती थी, लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। एलपीजी गैस की कमी के कारण कई बड़े होटल, रेस्टोरेंट और विवाह घर भी लकड़ी के सहारे खाना पकाने लगे हैं, जिससे बाजार में लकड़ी की मांग अचानक बढ़ गई है।
जमीर ने बताया कि पहले उनके यहां रोजाना सीमित मात्रा में ही लकड़ी की बिक्री होती थी, लेकिन अब बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों से भी लगातार ऑर्डर आ रहे हैं। कई होटल और कैटरिंग से जुड़े लोग एक साथ बड़ी मात्रा में लकड़ी खरीद रहे हैं ताकि गैस की अनिश्चित आपूर्ति के बीच उनका काम प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि खासकर शादी-विवाह के सीजन में विवाह घरों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोग बड़ी मात्रा में लकड़ी ले जा रहे हैं, क्योंकि उनके लिए खाना बनाना बंद करना संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल बाजार में लकड़ी की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं आया है और अभी लकड़ी का भाव करीब 08 से 10 रुपये प्रति किलो के आसपास बना हुआ है। हालांकि उन्होंने आशंका जताई कि अगर एलपीजी गैस का संकट लंबे समय तक जारी रहता है और लकड़ी की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। जमीर के मुताबिक अगर मांग बढ़ी और आपूर्ति सीमित हुई, तो बाजार में लकड़ी के दाम बढ़ना लगभग तय है।
द मूकनायक की टीम ने राजधानी भोपाल के अलग-अलग इलाकों में कई रेस्टोरेंट और ढाबों का दौरा किया। इस दौरान यह देखने को मिला कि एलपीजी गैस की कमी का असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर किचन में गैस सिलेंडर की जगह अब कोयले के अंगारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की अनियमित आपूर्ति और सिलेंडर मिलने में हो रही देरी के कारण उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ रही है।
कई रेस्टोरेंट में बड़े चूल्हों पर कोयले के अंगारे जलाकर खाना तैयार किया जा रहा है, ताकि ग्राहकों की सेवा प्रभावित न हो। खासतौर पर तंदूरी और ग्रिल से जुड़े व्यंजन कोयले की आंच पर बनाए जा रहे हैं। रेस्टोरेंट संचालकों के मुताबिक यह तरीका अस्थायी है, लेकिन जब तक गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक उन्हें इसी तरह काम चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर गैस संकट लंबा चला तो होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
एलपीजी गैस संकट का असर सिर्फ होटल और रेस्टोरेंट कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है। शहर के कई इलाकों में लोगों को गैस सिलेंडर के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि सिलेंडर बुक करने के बावजूद समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है, जिससे घरों में खाना बनाने तक की समस्या खड़ी हो रही है।
उपभोक्ताओं के अनुसार, गैस एजेंसियों से स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। कई लोगों को सिलेंडर की स्थिति जानने के लिए एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि कई बार फोन करने के बाद भी सही जवाब नहीं मिलता, जिसके कारण लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो घरेलू स्तर पर भी हालात और मुश्किल हो सकते हैं।
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