
प्रयागराज/बरेली- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के मोहम्मदगंज गांव में निजी घर में नमाज अदा करने के विवाद मामले में घर के मालिक हसीन खान को तत्काल 24 घंटे सशस्त्र पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि उनकी या उनकी संपत्ति पर कोई हिंसा हुई तो इसे प्रथम दृष्टया राज्य की जिम्मेदारी मानी जाएगी । हसीन खान ने कोर्ट को बताया था कि पुलिस ने उन्हें जबरन एक कागज पर अंगूठा लगवाया और स्थानीय लोगों ने धमकी दी कि अगर कोर्ट में उन लोगों के मुताबिक बयान नहीं दिए तो घर पर बुलडोजर चला दिया जाएगा।
यह मामला WRIT-C No. 5646 of 2026 (तारिक खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं 2 अन्य) से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता तारिक खान ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने निजी परिसर में नमाज अदा करने में बाधा डाली, जो हाईकोर्ट के 27 जनवरी 2026 के आदेश का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य को अवमानना मामले में 23 मार्च को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का सख्त निर्देश दिया है। यदि वे पेश नहीं हुए तो गैर-जमानती वारंट जारी कर उनकी जबरन उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। कोर्ट ने 11 मार्च को दिए गए आदेश में कहा कि वह अगली तारीख पर फैसला सुनाएगा।
16 जनवरी 2026 को मोहम्मदगंज गांव में हसीन खान (मकान मालिक) के घर में कुछ मुस्लिमों ने नमाज अदा की। मालिक की अनुमति थी और नमाज निजी परिसर तक सीमित थी। पुलिस ने तारिक खान सहित कई लोगों को हिरासत में लिया, बाद में छोड़ा लेकिन CrPC की धारा 151 (अब BNSS धारा 170) के तहत चालान किया।
27 जनवरी 2026 को मरनाथा फुल गोस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत निजी संपत्ति में धार्मिक प्रार्थना (नमाज, प्रेयर मीटिंग आदि) के लिए किसी पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने भी स्वीकार किया कि निजी परिसर में ऐसी गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, बशर्ते यह सार्वजनिक सड़क या भूमि पर न फैले।
तारिक खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रमजान में निजी घर में नमाज के लिए बाधा न डालने का निर्देश मांगा। 12 फरवरी को कोर्ट ने DM और SSP को अवमानना नोटिस जारी किया, क्योंकि उनके कृत्य से जनवरी आदेश का उल्लंघन प्रतीत होता है। याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई जबरदस्ती कार्रवाई पर रोक लगाई और 11 मार्च को सुनवाई तय की थी।
प्रतिवादियों (DM और SSP) की ओर से 11 मार्च को दाखिल डिस्चार्ज एप्लीकेशन को रिकॉर्ड पर लिया गया। हसीन खान (घर के मालिक, जिनके घर में नमाज अदा की गई थी) की कोर्ट में खुली अदालत में बयान दर्ज किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने उनकी पहचान की पुष्टि की, जिस पर राज्य पक्ष ने कोई आपत्ति नहीं जताई। हसीन खान ने अपने बयान में कहा:
"उस दिन मैं अपने घर में नमाज पढ़ रहा था, मेरे परिवार वाले भी पढ़ रहे थे। अचानक पुलिस आई और हमें उठाकर ले गई, चालान कर दिया। बाद में आरिफ प्रधान और मुख्तार मुझसे मिले। उन्होंने धमकी दी कि अगर कोर्ट में मेरे मुताबिक नहीं बोलोगे तो तेरे घर में बुलडोजर चल जाएगा। उसके बाद आरिफ प्रधान और कुछ लोग मुझे गांव के बाहर ले जाकर छोड़ गए। पुलिस वालों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया और एक लिखित कागज पर अंगूठा लगवा लिया। उस पर क्या लिखा था, मैं नहीं जानता क्योंकि मैं अनपढ़ हूं।"
राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी से पूछे जाने पर उन्होंने चालान पढ़कर बताया कि 16 जनवरी को नमाज के लिए सभी मौजूद लोगों (मालिक सहित) से अनुमति मांगी गई थी।
कोर्ट ने हसीन खान की सुरक्षा की मांग पर सख्त निर्देश दिए: उनकी और उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए आज से ही 24 घंटे दो सशस्त्र गार्ड तैनात रहेंगे। गार्ड उन्हें कहीं भी जाते समय साथ रहेंगे। यदि उनकी या उनकी संपत्ति पर कोई हिंसा हुई तो इसे prima facie राज्य की ओर से माना जाएगा।
आदेश की प्रति महाधिवक्ता कार्यालय को भेजी गई है ताकि संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं। मामला अब 23 मार्च को दोपहर 2 बजे अंतिम आदेश के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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