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पोस्टर में चार सामाजिक समूहों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का उल्लेख किया गया था। इसमें ब्राह्मणों के लिए “ईश्वर का संदेश फैलाना”, क्षत्रियों के लिए “समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना” और वैश्यों के लिए “अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना तथा दूसरों की सहायता करना” जैसी भूमिकाएं लिखी गई थीं। वहीं शूद्रों के लिए “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखा था। यही हिस्सा विवाद का मुख्य कारण बना।
Geetha Sunil Pillai
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संस्थान ने पोस्टर की सामग्री से खुद को अलग कर लिया है और स्पष्ट किया है कि वह जातिगत भेदभाव का समर्थन नहीं करता।
निशु आजाद गाजियाबाद की दलित परिवार से आने वाली किशोरी कंटेंट क्रिएटर हैं। वे जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन में दिखीं, अंबेडकराइट पहचान सार्वजनिक रखती हैं और सोशल मीडिया पर जाति-अन्याय व छात्र मुद्दों पर बोलती हैं।
Meerut News, Dalit Lawyer Ravi Gautam
संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर निशु आज़ाद पहुंची
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग तेज, दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हो रहे सवाल।
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