संस्थान को फैकल्टी सदस्यों और दलित अधिकार कार्यकर्ताओं से कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें 24 सितंबर को लिंक्डइन और फेसबुक पर प्रो. अवलेन्द्र के. ठाकुर द्वारा की गई कथित टिप्पणियों का जिक्र है।

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