MP: रीवा-मऊगंज के 8 CHC होंगे आउटसोर्स, 5 साल निजी एजेंसी संभालेगी संचालन, जानिए क्यों लिया सरकार ने यह फैसला?

पायलट प्रोजेक्ट के तहत बदलेगी सरकारी अस्पतालों के संचालन की व्यवस्था, टेंडर के जरिए होगा निजी एजेंसी का चयन; दवाएं और टीके सरकार देगी, जबकि स्टाफ, सुरक्षा, सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी एजेंसी की होगी
MP: रीवा-मऊगंज के 8 CHC होंगे आउटसोर्स, 5 साल निजी एजेंसी संभालेगी संचालन, जानिए क्यों लिया सरकार ने यह फैसला?
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भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और प्रबंधन को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने रीवा और मऊगंज जिले के 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को पायलट प्रोजेक्ट के तहत आउटसोर्स करने की मंजूरी दी है। इसका मतलब यह है कि इन सरकारी अस्पतालों का संचालन और प्रबंधन पूरी तरह विभागीय व्यवस्था के बजाय चयनित निजी एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। हालांकि अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं सरकारी व्यवस्था के तहत ही रहेंगी और जरूरी सरकारी दवाएं एवं टीके भी विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।

शासन की योजना के मुताबिक निजी एजेंसी का चयन टेंडर प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। चयनित एजेंसी को इन स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी पांच साल के लिए सौंपी जाएगी। एजेंसी को केवल कर्मचारियों की व्यवस्था करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि अस्पताल की रोजमर्रा की प्रशासनिक व्यवस्था, हाउसकीपिंग, सुरक्षा, आंतरिक रखरखाव और निर्धारित मेडिकल एवं अन्य स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। पूरी व्यवस्था की निगरानी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग करेगा।

रीवा के 6 और मऊगंज के 2 CHC प्रोजेक्ट में शामिल

इस प्रोजेक्ट के तहत रीवा जिले के छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को शामिल किया गया है। इनमें चाकघाट, गंगेव, गुढ़, रायपुर कर्चुलियान, रीठी और गोविंदगढ़ के CHC शामिल हैं। वहीं मऊगंज जिले के हनुमना और नईगढ़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस नई व्यवस्था का हिस्सा होंगे।

इस तरह दोनों जिलों के कुल आठ सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन निजी एजेंसी के माध्यम से कराने की तैयारी है। सरकार ने फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मंजूरी दी है। इसके परिणाम और अस्पतालों के संचालन में होने वाले बदलावों का आकलन आगे की नीति तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

पांच साल के लिए होगी निजी एजेंसी की जिम्मेदारी

शासन के प्रस्ताव के अनुसार चयनित एजेंसी को पांच वर्ष की अवधि के लिए अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। एजेंसी को अस्पताल की व्यवस्थाओं को तय मानकों के अनुरूप बनाए रखना होगा। इसमें मरीजों के लिए आवश्यक गैर-चिकित्सकीय सुविधाओं से लेकर अस्पताल की साफ-सफाई, सुरक्षा, रखरखाव और कर्मचारियों की उपलब्धता तक कई जिम्मेदारियां शामिल होंगी।

इस व्यवस्था में सरकार और निजी एजेंसी की जिम्मेदारियां अलग-अलग तय की जाएंगी। अस्पताल की मेडिकल सेवाओं के लिए जरूरी सरकारी दवाओं और टीकों की उपलब्धता सरकार की ओर से सुनिश्चित की जाएगी, जबकि अस्पताल के संचालन से जुड़ी कई व्यवस्थाओं का जिम्मा निजी एजेंसी के पास रहेगा। इसके लिए एजेंसी और विभाग के बीच सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) किया जाएगा।

30 बेड के CHC में 41 कर्मचारियों का प्रावधान

शासन ने 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए मानव संसाधन का एक निर्धारित ढांचा भी तैयार किया है। इसके तहत एक CHC में कुल 41 कर्मचारियों की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसमें डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ विभिन्न विशेषज्ञ और तकनीकी कर्मचारी शामिल होंगे।

निर्धारित मानव संसाधन में 10 डॉक्टर, 10 नर्स, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जरी विशेषज्ञ, तीन मेडिकल अधिकारी और एक दंत चिकित्सक शामिल हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट, अकाउंटेंट-कम-स्टोरकीपर-क्लर्क, रेडियोग्राफर, दो लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, दो एएनएम और ओटी टेक्नीशियन सहित अन्य जरूरी कर्मचारी भी व्यवस्था का हिस्सा होंगे।

अस्पताल की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था के लिए भी अलग से कर्मचारी उपलब्ध कराने होंगे। तीन शिफ्ट में सुरक्षा व्यवस्था के लिए तीन सुरक्षा कर्मचारियों तथा सफाई के लिए दो कर्मचारियों का प्रावधान किया गया है। यानी निजी एजेंसी को अस्पताल की केवल प्रशासनिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि निर्धारित मानव संसाधन को भी उपलब्ध और कार्यरत रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

दवाएं और टीके सरकार उपलब्ध कराएगी

CHC के आउटसोर्स होने का यह अर्थ नहीं है कि अस्पताल में मिलने वाली सभी सुविधाओं और संसाधनों की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को सौंप दी जाएगी। शासन ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अपने पास रखी हैं। मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक सरकारी दवाएं और टीके विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।

ओपीडी, आईपीडी और ऑपरेशन के लिए आवश्यक दवाओं तथा अन्य जरूरी मेडिकल सामग्री की उपलब्धता भी सरकारी व्यवस्था के तहत सुनिश्चित की जाएगी। दूसरी ओर अस्पताल के संचालन, कर्मचारियों की व्यवस्था, सुरक्षा, सफाई और आंतरिक रखरखाव जैसे काम निजी एजेंसी की जिम्मेदारी में होंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी संसाधनों और निजी प्रबंधन को एक साथ जोड़कर अस्पतालों की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करना बताया गया है।

SLA में तय होंगे निजी एजेंसी के काम और मानक

निजी एजेंसी के साथ सर्विस लेवल एग्रीमेंट यानी SLA किया जाएगा। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि एजेंसी को अस्पताल में कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध करानी हैं और उनकी गुणवत्ता के क्या मानक होंगे।

इसका मतलब यह है कि एजेंसी की भूमिका केवल डॉक्टर, नर्स या अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होगी। उसे अस्पताल की निर्धारित व्यवस्थाओं को तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार संचालित करना होगा। अस्पताल में स्टाफ की उपलब्धता, सफाई, सुरक्षा और रखरखाव जैसी व्यवस्थाओं की निगरानी भी इसी अनुबंध के आधार पर की जाएगी।

सरकार की ओर से इस पूरी व्यवस्था की निगरानी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग करेगा। ऐसे में पायलट प्रोजेक्ट के सफल या असफल होने में SLA में तय शर्तों और उनके प्रभावी पालन की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

टेंडर के बाद चुनी जाएगी निजी एजेंसी

इन आठ CHC के संचालन के लिए किसी निजी एजेंसी का सीधे चयन नहीं किया जाएगा। शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार टेंडर जारी किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों और पात्रता के आधार पर एजेंसी का चयन किया जाएगा।

चयनित एजेंसी को शासन द्वारा तय नियमों के अनुसार पांच साल तक अस्पताल के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाएगी। फिलहाल मंजूरी के बाद अब टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार है। टेंडर और एजेंसी के चयन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन अस्पतालों का संचालन किस संस्था या एजेंसी को सौंपा जाता है और वह किस तरह व्यवस्था लागू करती है।

पहले से पदस्थ सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर का विकल्प

आउटसोर्स किए जाने वाले स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से पदस्थ सरकारी कर्मचारियों को लेकर भी शासन ने व्यवस्था तय की है। ऐसे कर्मचारियों को जिले के दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में स्थानांतरण का विकल्प दिया जाएगा।

जो कर्मचारी दूसरे स्वास्थ्य संस्थान में जाना चाहते हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसका विकल्प चुन सकेंगे। वहीं जो कर्मचारी स्थानांतरण का विकल्प नहीं चुनते हैं, उनके वेतन आदि के भुगतान की व्यवस्था संस्था द्वारा प्रमाणित किए जाने के आधार पर की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्सिंग के कारण मौजूदा सरकारी कर्मचारियों के सामने उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक स्थिति को स्पष्ट करना है।

मरीजों की सुविधाओं पर रहेगी सबसे बड़ी नजर

सरकार ने इस मॉडल को अस्पतालों के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने का फैसला किया है। निजी एजेंसी को निर्धारित स्टाफ उपलब्ध कराने के साथ अस्पताल की गैर-चिकित्सकीय व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संचालित करना होगा। इससे अस्पतालों में डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों की उपलब्धता, साफ-सफाई, सुरक्षा तथा रखरखाव जैसी व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

हालांकि, इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं होंगी। आउटसोर्सिंग के बाद अस्पतालों में डॉक्टर और विशेषज्ञ नियमित रूप से उपलब्ध रहते हैं या नहीं, दवाएं और जांच की सुविधाएं समय पर मिलती हैं या नहीं, अस्पताल की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था कैसी रहती है और मरीजों को इलाज के लिए पहले की तुलना में कितनी बेहतर सुविधा मिलती है, इन सभी पहलुओं पर निगरानी जरूरी होगी।

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