MP में 108 एंबुलेंस का घंटों इंतजार! 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला का घर पर प्रसव, सुबह पहुंची एंबुलेंस

शंकरगढ़ गांव में शुक्रवार शाम शुरू हुई थी प्रसव पीड़ा, परिजनों का आरोप- कई बार कॉल के बावजूद नहीं पहुंची एंबुलेंस; रातभर दर्द से जूझती रही महिला
MP में 108 एंबुलेंस का घंटों इंतजार! 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला का घर पर प्रसव, सुबह पहुंची एंबुलेंस
Published on

भोपाल। मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां शंकरगढ़ गांव में 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद भी समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। परिजनों का आरोप है कि शुक्रवार शाम से 108 एंबुलेंस के लिए लगातार फोन किए जाते रहे, लेकिन उन्हें हर बार यही आश्वासन दिया गया कि एंबुलेंस थोड़ी देर में पहुंच जाएगी। रातभर प्रसव पीड़ा से जूझने के बाद शनिवार सुबह महिला का घर पर ही प्रसव हो गया। इसके कई घंटे बाद, सुबह करीब 8 बजे 108 एंबुलेंस गांव पहुंची।

शंकरगढ़ गांव निवासी राजा आदिवासी की पत्नी सपना 9 माह की गर्भवती थी और उसका प्रसव का समय नजदीक था। शुक्रवार शाम अचानक उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने तत्काल पास में रहने वाली आशा कार्यकर्ता को सूचना देकर मदद के लिए बुलाया। इसके बाद महिला को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया गया। परिजनों के मुताबिक, स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी और महिला दर्द से परेशान थी, लेकिन एंबुलेंस समय पर गांव नहीं पहुंच सकी।

कई बार किया फोन, मिलता रहा ‘थोड़ी देर में पहुंचने’ का जवाब

सीएचओ डॉ. नितिन कुमार के अनुसार, महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए शुक्रवार शाम से लगातार 108 एंबुलेंस के लिए कॉल की जा रही थी। हर बार एंबुलेंस के जल्द पहुंचने की बात कही गई, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी वाहन गांव नहीं पहुंचा। इस दौरान परिजन महिला की हालत को लेकर परेशान रहे। आरोप है कि पर्याप्त समय बीतने के बावजूद एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण परिवार को पूरी रात घर पर ही प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला की देखभाल करनी पड़ी।

रातभर दर्द में रही महिला, सुबह घर पर हुआ प्रसव

परिजनों के अनुसार, पूरी रात सपना को प्रसव पीड़ा होती रही। एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण उसे अस्पताल तक नहीं ले जाया जा सका। आखिरकार शनिवार सुबह महिला का घर पर ही प्रसव हो गया। प्रसव के बाद भी परिवार एंबुलेंस का इंतजार करता रहा, ताकि जच्चा और नवजात को अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय जांच कराई जा सके। बताया गया कि सुबह करीब 8 बजे 108 एंबुलेंस प्रसूता के घर पहुंची। तब तक महिला घर पर बच्चे को जन्म दे चुकी थी।

सीएचओ ने अस्पताल में भर्ती कराने की दी सलाह, परिजन नहीं हुए तैयार

घटना की जानकारी मिलने के बाद सीएचओ डॉ. नितिन कुमार ने प्रसूता और नवजात की सुरक्षा को देखते हुए महिला को अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। हालांकि, बताया जा रहा है कि परिजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। फिलहाल घटना ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और 108 एंबुलेंस की समयबद्ध पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि प्रसव के दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना मां और नवजात दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी होता है। परिजनों का आरोप है कि अगर एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती तो महिला को अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। अब एंबुलेंस के कई घंटे की देरी से पहुंचने के आरोपों और इस दौरान हुई पूरी घटना को लेकर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

MP में 108 एंबुलेंस का घंटों इंतजार! 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला का घर पर प्रसव, सुबह पहुंची एंबुलेंस
MP में बाल विवाह की तस्वीर बेहद असमान: आगर मालवा में हर दूसरी युवती की शादी 18 से पहले, जानिए क्या है स्थिति?
MP में 108 एंबुलेंस का घंटों इंतजार! 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला का घर पर प्रसव, सुबह पहुंची एंबुलेंस
MP: धार के बालिका छात्रावास में व्यवस्थाओं पर सवाल, आदिवासी छात्राओं ने नहाने और भोजन को लेकर की शिकायत!
MP में 108 एंबुलेंस का घंटों इंतजार! 9 माह की गर्भवती आदिवासी महिला का घर पर प्रसव, सुबह पहुंची एंबुलेंस
MP: हाई कोर्ट में उठा माइनिंग अफसर के तीसरे बच्चे का मामला, सरकार से पूछा- नौकरी के बाद नियम क्यों नहीं?

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक को सब्सक्राइब करें

'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।

यहां सब्सक्राइब करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com