
भोपाल। शहर में बारिश, जगह-जगह जलभराव और घरों में पानी के बढ़ते भंडारण के बीच डेंगू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अगस्त के महज 23 दिनों में 22 लोगों में डेंगू की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग और मैदानी सर्वे की रफ्तार अपेक्षित स्तर पर नजर नहीं आ रही है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की फॉगिंग और एंटी-लार्वा कार्रवाई को लेकर भी रहवासियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। शहर में बड़ा अमला और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद कई इलाकों में मच्छरों की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं देने का आरोप लगाया जा रहा है।
एक अगस्त से अब तक 22 मरीज, 20 अगस्त को मिले चार नए संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक अगस्त से अब तक शहर और जिले में डेंगू के 22 नए मरीज सामने आ चुके हैं। यानी लगभग हर दिन एक नया मरीज मिलने की स्थिति बन गई है। 20 अगस्त को ही चार नए डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई थी। इनमें प्रीतम बिहार कॉलोनी, माधवनगर और मुरार क्षेत्र के मरीज शामिल हैं। जनवरी से अब तक जिले में डेंगू संक्रमितों की कुल संख्या 64 पहुंच चुकी है। अगस्त में जिस तेजी से मामले बढ़े हैं, उसने आने वाले दिनों में संक्रमण के और फैलने की आशंका बढ़ा दी है।
पिछले साल से कम मामले, फिर भी अगस्त की रफ्तार चिंताजनक
राहत की बात यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल अब तक डेंगू के मामले कम हैं। पिछले साल इसी अवधि तक 86 मरीज सामने आ चुके थे, जबकि इस वर्ष अब तक 64 मरीज मिले हैं। इसके बावजूद अगस्त में मामलों में आई तेजी को नजरअंदाज करना मुश्किल है। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के मौसम में यदि जलभराव और मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में केवल आंकड़ों की तुलना कर स्थिति को बेहतर मान लेना पर्याप्त नहीं होगा।
चिकनगुनिया के पांच और मलेरिया के चार मरीज मिले
शहर में सिर्फ डेंगू ही नहीं, बल्कि अन्य मच्छरजनित बीमारियों के मामले भी सामने आ रहे हैं। इस वर्ष अब तक चिकनगुनिया के पांच मरीज मिल चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 43 मामले सामने आए थे। वहीं मलेरिया के चार मरीजों की पुष्टि हुई है। पिछले साल इसी समय तक नौ मरीज मिले थे। आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में राहत जरूर देते हैं, लेकिन बारिश के बाद बनने वाले हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। मच्छरों की रोकथाम में जरा सी लापरवाही संक्रमण को तेजी से फैलने का मौका दे सकती है।
एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई भी बढ़ा रही चिंता
शहर के कई इलाकों में इन दिनों एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है। इसके कारण लोग मजबूरी में घरों में कई दिनों तक पानी स्टोर करके रख रहे हैं। यही स्थिति डेंगू की रोकथाम के लिए एक नई चुनौती बन सकती है। यदि पानी की टंकियों, ड्रमों, बाल्टियों और अन्य बर्तनों को ठीक से ढंककर नहीं रखा गया या उन्हें नियमित रूप से खाली और साफ नहीं किया गया, तो उनमें एडीज मच्छर का लार्वा पनपने की आशंका रहती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घरों में जमा पानी को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
साफ पानी में भी पनपता है डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर केवल गंदे पानी में ही नहीं, बल्कि साफ और ठहरे हुए पानी में भी पनप सकता है। इसलिए घरों में रखी पानी की टंकियां, कूलर, गमले, पुराने टायर, टूटे बर्तन, छतों पर रखे कंटेनर और अन्य स्थान इसके प्रजनन के लिए अनुकूल बन सकते हैं। बारिश के बाद छोटे-छोटे स्थानों पर जमा पानी भी मच्छरों के लार्वा के लिए पर्याप्त होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सप्ताह में कम से कम एक बार घर और आसपास ऐसे स्थानों की जांच करनी चाहिए, जहां पानी जमा हो सकता है।
फॉगिंग व्यवस्था पर सवाल, रहवासियों ने उठाई शिकायत
डेंगू की रोकथाम के लिए नगर निगम की फॉगिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। कई इलाकों के रहवासियों का आरोप है कि फॉगिंग का काम नियमित रूप से नहीं हो रहा है और यह कार्रवाई चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नजर आती है। शिकायत है कि कुछ वीआईपी कॉलोनियों में तो फॉगिंग की व्यवस्था दिखाई देती है, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों और बस्तियों में टीमों की पहुंच नहीं हो रही। कई रहवासियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद न तो नियमित फॉगिंग कराई जा रही है और न ही एंटी-लार्वा स्प्रे का प्रभावी अभियान चल रहा है।
सर्वे और एंटी-लार्वा अभियान को जमीन पर उतारने की जरूरत
डेंगू पर नियंत्रण के लिए केवल अस्पतालों में मरीजों की पहचान करना पर्याप्त नहीं है। संक्रमित मरीज मिलने के बाद उसके आसपास के क्षेत्रों में सर्वे, लार्वा की जांच, पानी जमा होने वाले स्थानों की पहचान और तत्काल एंटी-लार्वा कार्रवाई जरूरी होती है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के बीच बेहतर समन्वय के बिना संक्रमण की चेन को तोड़ना मुश्किल हो सकता है। जिन इलाकों में लगातार मरीज सामने आ रहे हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर घर-घर जांच और जागरूकता अभियान की जरूरत है।
सावधानी और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों जरूरी
डेंगू से बचाव में नागरिकों की सावधानी जितनी जरूरी है, उतनी ही जिम्मेदारी प्रशासनिक विभागों की भी है। लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, पानी के कंटेनरों को ढंककर रखना चाहिए और कूलर व टंकियों की नियमित सफाई करनी चाहिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ानी होगी और नगर निगम को फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय हर प्रभावित इलाके तक पहुंचाना होगा।
ग्वालियर में 23 दिनों के भीतर 22 डेंगू मरीजों का मिलना एक स्पष्ट चेतावनी है। पिछले वर्ष की तुलना में कुल आंकड़े कम होने के बावजूद अगस्त में संक्रमण की बढ़ती रफ्तार बता रही है कि यदि अभी प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो बारिश के मौसम में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
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