नई दिल्ली: शिक्षा क्षेत्र में हुए लगभग 4,000 करोड़ रुपये के कथित घोटालों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गहन जांच की जा रही है। इन मामलों में मुख्य रूप से पेपर लीक, फर्जी दाखिले, छात्रवृत्ति धोखाधड़ी, जाली डिग्री रैकेट और भर्ती घोटाले शामिल हैं। जांच एजेंसी ने अब तक विभिन्न राज्यों में कार्रवाई करते हुए 1,500 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है और कई हाई-प्रोफाइल आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस कड़ी में सबसे ताजा मामला अल-फलाह ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं का है। ईडी ने हाल ही में ग्रुप के प्रमुख जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हथियाने के आरोप में दोबारा गिरफ्तार किया है।
इससे पहले जवाद पर अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों में फंड की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था। ईडी ने इस मामले में 139.97 करोड़ रुपये की 54 एकड़ जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क करने के बाद अपनी अभियोजन शिकायत दर्ज की है। इस पूरे मामले में अपराध से हुई कुल कमाई का अनुमान 493.24 करोड़ रुपये लगाया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन संस्थानों ने छात्रों को प्रवेश के लिए लुभाने के वास्ते समाप्त हो चुके नैक (NAAC) मान्यता को भी वैध बताकर पेश किया। इसके साथ ही, यूनिवर्सिटी को फर्जी तरीके से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम की धारा 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त भी दिखाया गया था। इसके अलावा, मंजूरी और प्रमाणन प्राप्त करने में भी कई कथित अनियमितताएं पाई गई हैं।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी तब भी जांच के घेरे में आई थी जब नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए विस्फोट से जुड़े मॉड्यूल के सिलसिले में संस्थान के तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था।
पश्चिम बंगाल के कथित प्राथमिक शिक्षक घोटाले में ईडी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 151.26 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। इस मामले में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही, विधायक चंद्रनाथ सिन्हा से जुड़ी 3.65 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी कुर्क किया गया है।
इसी राज्य से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला नौवीं से बारहवीं कक्षा के सहायक शिक्षकों की भर्ती से संबंधित है। इसमें जांच एजेंसी ने 238.8 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में शांति प्रसाद सिन्हा, प्रसन्न कुमार रॉय और विधायक जीवन कृष्ण साहा शामिल हैं। 3 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 25,000 नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा था। वहीं, पश्चिम बंगाल के 'ग्रुप सी और डी स्टाफ' भर्ती घोटाले में कुर्की की रकम बढ़कर 247 करोड़ रुपये हो गई है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के स्कूलों में हुए कथित घोटाले की जांच भी पिछले साल शुरू की गई थी। ईडी 2015 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकाल के दौरान दिल्ली के सरकारी स्कूलों के लिए 12,000 से अधिक कक्षाओं और अर्ध-स्थायी संरचनाओं के निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। इस मामले में पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जांच के घेरे में हैं।
एजेंसी कर्नाटक के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों की कथित फर्जी ब्लॉकिंग की भी जांच कर रही है। दूसरी तरफ, नीट-यूजी 2024 (NEET-UG 2024) पेपर लीक मामले में रांची, पटना और नालंदा में छापेमारी की गई है।
नीट मामले की जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया और उसके साथियों ने गोपनीय परीक्षा सामग्री के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रिंटिंग प्रेस, गोदामों और परिवहन वाहनों की पूरी जानकारी जुटाई थी। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा केंद्रों के रास्ते में सीलबंद बक्सों के साथ छेड़छाड़ की और छात्रों तक पहुंचने से पहले ही प्रश्न पत्र चुरा लिए। बाद में इन पेपर्स को एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से बेचा गया।
इसके अतिरिक्त, ईडी ने राजस्थान में हुए 2022 के वरिष्ठ शिक्षक द्वितीय श्रेणी प्रतियोगी परीक्षा पेपर लीक मामले की भी जांच की है और कई गिरफ्तारियां की हैं।
जांच एजेंसी ने कथित छात्रवृत्ति धोखाधड़ी के कई मामलों को भी अपने हाथ में लिया है। हिमाचल प्रदेश में निजी संस्थानों ने कथित तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए आवंटित सरकारी छात्रवृत्ति का पैसा हड़प लिया। आरोपियों ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत धन का दावा करने के लिए फर्जी छात्र बनाए और रिकॉर्ड में हेरफेर किया। इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया और संपत्तियां कुर्क की गईं।
ऐसा ही एक छात्रवृत्ति घोटाला उत्तर प्रदेश में सामने आया, जहां हाइजिया ग्रुप ने कथित तौर पर छात्रों के डेटा में फर्जीवाड़ा करके केंद्रीय और राज्य छात्रवृत्ति का दावा किया।
कर्नाटक के महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज में भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां 2018 और 2024 के बीच स्नातकोत्तर मेडिकल छात्रों के लिए रखे गए वजीफा फंड में से 33.34 करोड़ रुपये की कथित तौर पर हेराफेरी की गई। इस पर कार्रवाई करते हुए ईडी ने 5.87 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क की और 85 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की।
अगस्त 2025 में कई निजी कॉलेजों में मेडिकल प्रवेश से जुड़ा एक फर्जी एनआरआई कोटा रैकेट भी जांच के घेरे में आया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों को प्रवेश दिलाने के लिए निजी कॉलेजों ने एजेंटों के साथ मिलकर दूतावास द्वारा जारी किए गए जाली एनआरआई प्रमाण पत्र और फैमिली ट्री तैयार किए। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 23 करोड़ रुपये से अधिक के ऐसे मामलों की पहचान की गई है, जिसमें से ईडी ने करीब 19 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।
अन्य महत्वपूर्ण मामलों में हिमाचल प्रदेश की मानव भारती यूनिवर्सिटी से जुड़ा कथित फर्जी डिग्री रैकेट शामिल है। जांच एजेंसी ने इस मामले में अपराध से अर्जित आय का अनुमान लगभग 387 करोड़ रुपये लगाया है।
इसके अलावा, पिछले साल अप्रैल में ईडी ने फोरम फॉर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (FIITJEE) कोचिंग केंद्रों के प्रमोटरों और मालिकों से जुड़े एक मामले में दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में तलाशी ली थी। यह बड़ी कार्रवाई इन कोचिंग केंद्रों के कथित तौर पर बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बंद होने के कुछ महीनों बाद की गई थी।
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