
तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों एक ऐसे नाम की चर्चा है जो न तो परंपरागत राजनीतिक परिवार से आता है और न ही फिल्मी स्टारडम के दम पर सीधे सत्ता में पहुंचा है। यह नाम है राजमोहन अरुमुगम, जिन्हें पूरा तमिलनाडु 'पुट चटनी राजमोहन' के नाम से जानता है। वह आज तमिलनाडु सरकार में मिनिस्टर ऑफ स्कूल एजुकेशन हैं, लेकिन उनका सफर बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक है।
राजमोहन ने अपने करियर की शुरुआत एक टेलीविजन वक्तृत्व प्रतियोगिता से की, फिर यूट्यूब पर तीखे व्यंग्य और सामाजिक मुद्दों पर सीधी बातों के चलते वह घर-घर में पहचाने जाने लगे। उन्होंने तमिल फिल्मों में अभिनय किया, वेब सीरीज का निर्देशन किया, स्टैंड-अप कॉमेडी के प्लेटफॉर्म पर मेंटर की भूमिका निभाई और अंततः 2026 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एग्मोर सीट से तमिलगा वेत्तरी कळगम (TVK) के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने।
उनकी जीत के पीछे सिर्फ उनकी लोकप्रियता नहीं थी, बल्कि वह वीडियो था जो उन्होंने सालों पहले बनाया था 'हू किल्ड अनिता' (अनिता को किसने मारा?)। इस वीडियो ने पूरे तमिलनाडु में शिक्षा व्यवस्था, NEET परीक्षा और सरकारी लापरवाही पर एक ऐसी बहस छेड़ दी थी जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। अब जब वह खुद डिप्टी शिक्षा मंत्री बन चुके हैं, तो जनता को उनसे यही उम्मीद है कि जिन बातों को वह यूट्यूब पर उठाते थे, उन्हें अब सरकारी स्तर पर लागू करेंगे।
आइए विस्तार से जानते हैं कि राजमोहन अरुमुगम आखिर कौन हैं, उनका शुरुआती जीवन कैसा रहा, पुट चटनी चैनल क्या है, वह अनिता वाला वीडियो इतना प्रभावशाली क्यों बना, उन्होंने फिल्मों और वेब सीरीज में क्या किया, और आखिरकार उन्होंने 2026 का चुनाव कैसे जीता और उप शिक्षा मंत्री पद तक का सफर कैसे तय किया।
राजमोहन अरुमुगम का जन्म और पालन-पोषण चेन्नई में ही हुआ है। उनके पिता का नाम आरपी अरुमुगम है। चेन्नई में 'पट्टिमंड्रम' की परंपरा बहुत पुरानी है, जहां त्योहारों के मौके पर टेलीविजन पर वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। इसी परंपरा का असर राजमोहन पर भी पड़ा और उन्होंने बचपन से ही वक्तृत्व कला में रुचि दिखानी शुरू कर दी। जब वह थोड़े बड़े हुए तो उन्होंने औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ मीडिया और संचार में खासी दिलचस्पी दिखाई। साल 2010 में उन्होंने IIT चेन्नई से बिजनेस मैनेजमेंट का डिप्लोमा किया और फिर 2018 में मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की। यानी कि उनके पास एक तरफ एक प्रतिष्ठित संस्थान का तकनीकी अनुभव है तो दूसरी तरफ मीडिया की औपचारिक पढ़ाई।
इसी संयोजन ने उन्हें बाद में एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर बनने में मदद की। उनकी पब्लिक पहचान बनने की शुरुआत हुई स्टार विजय के रिएलिटी शो 'तमिल पेचु एंगल मूचु' से, जो कि एक वक्तृत्व और ओरेटरी प्रतियोगिता थी। यह शो तमिल भाषा पर पकड़, तर्कशक्ति और समझाने की कला को परखता था और राजमोहन ने 2008-09 के बीच इसके दूसरे सीजन को जीता। इस जीत ने उन्हें पूरे तमिलनाडु में एक मेधावी वक्ता के तौर पर पेश कर दिया। इसके बाद वह पारंपरिक पट्टिमंड्रम कार्यक्रमों में भी नियमित रूप से शामिल होने लगे, खासकर धार्मिक त्योहारों के मौके पर टेलीविजन पर आने वाले कार्यक्रमों में। यह दौर राजमोहन के लिए एक तरह का प्रशिक्षण काल था जहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से बोलने, बहस करने और श्रोताओं को अपनी बात समझाने के गुर सीखे।
असली उछाल तब आया जब राजमोहन यूट्यूब चैनल 'पुट चटनी' से जुड़े। पुट चटनी तमिल भाषा का एक यूट्यूब चैनल है जो राजनीतिक व्यंग्य और सामाजिक टिप्पणी के लिए मशहूर हुआ। राजमोहन इस चैनल के निदेशक और प्राथमिक चेहरा बने और उनके नेतृत्व में पुट चटनी तमिलनाडु के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म में से एक बन गया।
इस चैनल की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर इस तरह बात करता था कि आम आदमी को हंसते-हंसते बात समझ आ जाती थी, लेकिन साथ ही उस बात का तीखापन भी बरकरार रहता था। राजमोहन का अंदाज बेहद निडर था। वह उन मुद्दों पर खुलकर बोलते थे जिन पर आमतौर पर लोग या तो चुप्पी साध लेते थे या फिर हल्के में टाल जाते थे। इसी चैनल पर आया उनका वह ऐतिहासिक वीडियो जिसने सब कुछ बदल दिया।
साल 2017 था और तमिलनाडु में NEET परीक्षा को लेकर आक्रोश का माहौल था। नीट एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है जिसे मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए अनिवार्य कर दिया गया था, लेकिन तमिलनाडु में इसका कड़ा विरोध हो रहा था क्योंकि इससे ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्रों को नुकसान हो रहा था। इसी बीच एक मेडिकल एस्पिरेंट अनिथा ने NEET के खिलाफ विरोध करते हुए आत्महत्या कर ली। पूरे राज्य में सनसनी फैल गई।
राजमोहन ने इस घटना पर एक वीडियो बनाया जिसका शीर्षक था 'हू किल्ड अनिता ' (अनिता को किसने मारा)। यह वीडियो महज एक वीडियो नहीं था, यह एक सवाल था। राजमोहन ने इसमें राजनीतिक सत्ता पर निशाना साधा, शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती असमानताओं को उजागर किया और समाज से पूछा कि आखिर हम सब मिलकर इस लड़की की मौत के लिए कहां तक जिम्मेदार हैं। वीडियो देखते ही देखते आग की तरह फैल गया। लाखों लोगों ने इसे देखा, शेयर किया और NEET को लेकर बहस फिर से गरमा गई। राजमोहन उस समय सिर्फ एक यूट्यूबर नहीं रह गए थे, वह एक ऐसे आवाज के रूप में उभरे जो सत्ता के सामने सीधा सवाल खड़ा कर रहा था। इसी वीडियो ने उनकी राजनीतिक यात्रा की नींव रखी।
इस घटना के बाद राजमोहन का दबदबा और बढ़ता गया। 2018 में उन्होंने कावेरी जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी कंटेंट बनाया और तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच होने वाली राजनीतिक उलझनों पर सीधी बात रखी। उसी साल तेलुगु अभिनेता विजय देवरकोंडा भी उनके चैनल पर प्रचार वीडियो के लिए आए, जो राजनीतिक फिल्म 'नोटा' के प्रमोशन के सिलसिले में था।
राजमोहन ने 'तमिल वनक्कम' नाम का एक और यूट्यूब चैनल लॉन्च किया जो खासतौर पर कॉलेज के छात्रों को ध्यान में रखकर बनाया गया था और उसमें सामाजिक मुद्दों पर बातचीत बेहद ही सादगी से प्रस्तुत की जाती थी। जब कोविड-19 महामारी आई और स्कूल-कॉलेज बंद हो गए तो राजमोहन ने एक नया चैनल शुरू किया जो पूरी तरह से उन छात्रों पर केंद्रित था जिनकी पढ़ाई प्रभावित हुई थी।
यह उनकी सोच और संवेदनशीलता को दिखाता है कि वह सिर्फ वीडियो बनाकर नहीं रुकते थे बल्कि हर जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल लेते थे।
अपने डिजिटल सफर के साथ-साथ राजमोहन ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी कदम रखा। उन्होंने सहायक भूमिकाओं में कई मशहूर फिल्मों में काम किया जिनमें 'थाना सेरंध कूट्टम', 'वेलाइला पट्टाधारी 2' जिसे VIP 2 भी कहा जाता है, 'नटपे थुनाई', 'इस्पाडे राजावुम इधयारानियुम' और 'नेन्जामुंडु नेरमैयुंडु ओडु राजा' शामिल हैं। ये बड़ी भूमिकाएं तो नहीं थीं, लेकिन इनसे उनकी स्क्रीन पर उपस्थिति मजबूत हुई और उन्हें फिल्म उद्योग में एक पहचान मिली। साल 2023 में उन्होंने फिल्म 'बाबा ब्लैक शीप' का निर्देशन किया, जिसे वह काफी दिनों से डेवलप कर रहे थे। यह उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी। इसके अलावा उन्होंने 2022 में वेब सीरीज 'फॉल' में काम किया और ओटीटी स्पेस में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अमेजन प्राइम वीडियो पर आने वाले शो 'कॉमिकस्टान सेम्मा कॉमेडी पा' में वह जज और मेंटर के रूप में भी दिखे। यह शो हिंदी के मशहूर स्टैंड-अप शो 'कॉमिकस्टान' का तमिल संस्करण था और राजमोहन के जज बनने से तमिल कॉमेडी इकोसिस्टम में उनकी विश्वसनीयता और बढ़ गई।
राजमोहन की सबसे बड़ी छलांग राजनीति में आने की थी। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत तमिलगा वेत्तरी कळगम (TVK) से की, जो तमिल सुपरस्टार विजय द्वारा स्थापित पार्टी है। साल 2025 में उन्हें TVK का प्रचार सचिव नियुक्त किया गया। यह भूमिका उनके लिए बिल्कुल उपयुक्त थी क्योंकि वह लंबे समय से संचार के क्षेत्र में काम कर रहे थे और उनकी सार्वजनिक छवि एक निडर और सीधे बोलने वाले व्यक्ति की बन चुकी थी।
जब 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ तो राजमोहन को एग्मोर विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया गया। एग्मोर चेन्नई का एक अहम और संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र है। यहां पर अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए सीट आरक्षित है और यहां से जीतना आसान नहीं होता। राजमोहन ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा। उनकी ताकत उनकी सीधी बातचीत और जमीनी संपर्क था। उन्होंने यूट्यूब और सोशल मीडिया का पूरा इस्तेमाल किया लेकिन साथ में पारंपरिक तरीके से दर-दर जाकर लोगों से मिले भी। चुनाव के नतीजे आए और राजमोहन ने शानदार जीत दर्ज की।
उन्हें कुल 53,901 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 10,804 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह TVK के लिए एक बेहद अहम जीत थी क्योंकि पार्टी को चेन्नई जैसे बड़े शहर में अपनी पैठ बनाने में मदद मिली। चुनाव जीतने के बाद राजमोहन को तमिलनाडु सरकार में डिप्टी मिनिस्टर ऑफ एजुकेशन (उप शिक्षा मंत्री) का पद सौंपा गया। यह फैसला काफी चर्चा में रहा क्योंकि राजमोहन खुद कभी शिक्षक नहीं रहे हैं न ही उनका कोई सीधा शैक्षणिक प्रशासनिक अनुभव है, लेकिन सरकार और पार्टी का तर्क था कि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए जरूरी है कि वहां ऐसे लोग हों जो समस्या को समझते हों और जनता की बात सुन सकें। राजमोहन ने जब 'हू किल्ड अनिता ' वाला वीडियो बनाया था तो उन्होंने NEET और शिक्षा व्यवस्था में पैठी असमानताओं पर सबसे सख्ती से बात की थी। अब जब वह खुद शिक्षा विभाग के प्रभारी हैं तो जनता की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।
अब लोग यह देखना चाहते हैं कि जो वीडियो उन्होंने बनाए थे, क्या उनके पॉलिसी लेवल पर असर दिखेगा। NEET को लेकर तमिलनाडु में अब भी असहजता है और प्राइवेट स्कूलों के बढ़ते दबदबे से सरकारी स्कूलों की हालत कमजोर हो रही है। राजमोहन खुद एक सरकारी स्कूल में नहीं पढ़े हैं, लेकिन उन्होंने अपने वीडियो और बातचीत में हमेशा यह कहा है कि सरकारी स्कूलों को मजबूत किए बिना शिक्षा में समानता नहीं आ सकती। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने पद पर बैठकर किस तरह के बदलाव लाते हैं।
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