LSE में शुरू होगा 'बाबासाहब' पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन: Maharashtra सरकार ने 37 करोड़ से स्थापित की डॉ. आंबेडकर चेयर, ये छात्र होंगे लाभान्वित

मिलेगी 10 पीएचडी फेलोशिप, सिर्फ महाराष्ट्र के SC छात्र कर सकेंगे आवेदन
LSE में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चेयर के साथ मिलकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (BARTI) दस पीएचडी फेलोशिप भी शुरू करेगा।
LSE में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चेयर के साथ मिलकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (BARTI) दस पीएचडी फेलोशिप भी शुरू करेगा।
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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) में डॉ. बी.आर. आंबेडकर के नाम पर एक प्रतिष्ठित पीठ (Chair) स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसके लिए एकमुश्त अनुदान के तौर पर 37 करोड़ रुपये से अधिक (लगभग 30 लाख पाउंड) की राशि को मंजूरी दी गई।

इस पीठ 'डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चेयर' का उद्देश्य भारत के संविधान निर्माता के सामाजिक न्याय, संवैधानिक लोकतंत्र, आर्थिक समानता और मानवाधिकार पर किए गए कार्यों एवं विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है। साथ ही इन विषयों पर एक विश्वस्तरीय शोध केंद्र तैयार करना भी लक्ष्य है।

यह पीठ निम्नलिखित विषयों पर अंतःविषयक शोध (Interdisciplinary Research) को बढ़ावा देगी:

  • संविधान और लोकतंत्र

  • सामाजिक समानता

  • आर्थिक लोकतंत्र और पुनर्वितरण नीतियाँ

  • श्रम अधिकार और सामाजिक सुरक्षा

  • संघवाद और सार्वजनिक वित्त

  • समावेशी शासन

इसके अलावा, पीठ संवैधानिक अध्ययन, सामाजिक न्याय और लोक नीति पर उन्नत शोध का समर्थन करेगी, वार्षिक व्याख्यानमाला, संवाद और शैक्षणिक आयोजन करेगी, और भारतीय व अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देगी।

दस पीएचडी फेलोशिप, मुख्य रूप से महाराष्ट्र के एससी छात्रों के लिए

LSE में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चेयर के साथ मिलकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (BARTI) दस पीएचडी फेलोशिप भी शुरू करेगा। यह पीएचडी कार्यक्रम चार वर्षीय होगा। पहली फेलोशिप शैक्षणिक सत्र 2027-28 और दूसरी 2029-30 में शुरू होगी।

इन फेलोशिप के लिए आवेदनों की जाँच LSE की एक समिति करेगी। केवल महाराष्ट्र के अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के उम्मीदवार ही इस योजना के तहत आवेदन करने के पात्र होंगे। उनके आवेदन सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग और BARTI के माध्यम से LSE के संबंधित विभागों को भेजे जाएंगे। जानकारी के मुताबिक LSE के कई संकाय सदस्य पहले से ही आंबेडकर की बौद्धिक विरासत से जुड़े क्षेत्रों जैसे कानून, शासन, अंतरराष्ट्रीय विकास, दर्शन, अर्थशास्त्र और लोक नीति में कार्यरत हैं। पहले दस वर्षों तक चेयरधारकों का चयन इन्हीं मौजूदा संकाय सदस्यों में से किया जाएगा। उसके बाद खुली, प्रतिस्पर्धी और अंतरराष्ट्रीय चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

यह पीठ मुख्य रूप से निम्नलिखित विभागों को कवर करेगी: दर्शनशास्त्र (फिलॉसफी), समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी), अंतरराष्ट्रीय विकास (इंटरनेशनल डेवलपमेंट), शासन और लोक प्रशासन (गवर्नेंस एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन), कानून (लॉ) और सामाजिक नीति (सोशल पॉलिसी)

महाराष्ट्र सरकार का यह कदम डॉ. आंबेडकर के विचारों को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

तमिलनाडू के नीलम कल्चरल सेंटर ने स्वागत करते हुए कहा, " हम महाराष्ट्र सरकार के उस फ़ैसले का तहे दिल से स्वागत और जश्न मनाते हैं, जिसके तहत लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस जो कि बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर का शिक्षण संस्थान रहा है, में 'बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर चेयर' की स्थापना की जाएगी।

यह एक ऐतिहासिक कदम है, जो UK में बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर की सार्वजनिक स्मृति को सहेजने के लिए चल रहे प्रयासों को और आगे बढ़ाता है, चाहे वह 'डॉ. अंबेडकर हाउस' हो, 'ग्रेज़ इन' (उनका शिक्षण संस्थान) में लगा उनका चित्र हो, या फिर जाति-विरोधी व्यापक प्रयास हों। यह कदम एक अगली कड़ी के तौर पर, वैश्विक अकादमिक जगत, बौद्धिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन में उनकी विरासत को संस्थागत रूप प्रदान करता है।

इस पहल की अगुवाई करने के लिए, सामाजिक न्याय विभाग के प्रधान सचिव हर्षदीप कांबले को हार्दिक बधाई।"

LSE में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चेयर के साथ मिलकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (BARTI) दस पीएचडी फेलोशिप भी शुरू करेगा।
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