
राजस्थान के उच्च शिक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों, शोधार्थियों, छात्र-युवाओं एवं शिक्षण कार्य से जुड़े नागरिकों ने प्रदेश सरकार की संविदा भर्ती नीति को लेकर गंभीर आपत्तियाँ जताई हैं। राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसाइटी (RAJ-CES) द्वारा "Hiring of Manpower Rules, 2023" के तहत महाविद्यालयों में टीचिंग एसोसिएट पदों पर 5 वर्षीय संविदा भर्ती किए जाने का विरोध तेज हो गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इस भर्ती के तहत लगभग 3540 पदों पर संविदा आधार पर नियुक्तियाँ की जा रही हैं, जबकि कार्य की प्रकृति स्थायी है। वहीं, विद्या संबल योजना में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी ने भी इसे अपने अनुभव और योगदान का अपमान बताते हुए नाराजगी जताई है।
सरकार पहली बार राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड से परीक्षा के जरिए संविदा आधारित शिक्षक भर्ती करवा रही है। यह भर्ती 5 साल के लिए या सोसायटी की अवधि की समाप्ति तक के लिए की जा रही है। इसके बाद सोसायटी की अवधि में विस्तार किया जाता है, तो सोसायटी संविदा पर लगे व्यक्ति का मूल्यांकन कर नियुक्ति को 3 साल के लिए बढ़ा सकेगी। मासिक वेतन 28,850 रुपए मिलेगा।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर संभावित न्यायिक चुनौतियों को देखते हुए सरकार द्वारा कैविएट दायर किए जाने की सूचना सामने आई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले से ही विवाद की संभावना थी, और प्रशासन ने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया। साथ ही भर्ती विज्ञापन की शर्तों पर भी सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, प्राधिकरण को बिना कारण बताए भर्ती प्रक्रिया रद्द या संशोधित करने का अधिकार दिया गया है, जो पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है।
युवाओं का कहना है कि यह संविदा मॉडल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के उच्च शिक्षा, शोध और अधिगम के लक्ष्यों के पूर्णतः विरुद्ध है। उनकी प्रमुख आपत्तियाँ इस प्रकार हैं:
असुरक्षा एवं असमानता: 5 वर्षीय संविदा से शिक्षकों में मनोवैज्ञानिक दबाव और असुरक्षा बढ़ती है। समान कार्य के लिए असमान वेतन (मात्र 28,850 रुपये मासिक) दिया जा रहा है।
योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा: हजारों NET/SET/JRF/PhD धारी अभ्यर्थियों को उच्चतम शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद स्थायी रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे।
कॉरपोरेट मॉडल का विस्तार: शिक्षा को 'सामाजिक निवेश' न मानकर 'कॉरपोरेट मॉडल' की तरह चलाने का प्रयास किया जा रहा है।
संवैधानिक अधिकारों का हनन: यह व्यवस्था समान अवसर (अनुच्छेद 16) और समानता (अनुच्छेद 14) के अधिकारों के साथ-साथ 'समान कार्य के लिए समान वेतन' की भावना का उल्लंघन है।
RAJ-CES को समाप्त कर कॉलेजों को सीधे आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा के अधीन लाया जाए तथा नियमित सरकारी पद सृजित किए जाएँ।
टीचिंग एसोसिएट एवं गैर-शैक्षणिक पदों की 5 वर्षीय संविदा भर्ती व्यवस्था तत्काल निरस्त की जाए।
सभी शैक्षणिक पदों पर भर्ती RPSC तथा गैर-शैक्षणिक पदों पर RSSB के माध्यम से कराई जाए।
उच्च शिक्षा में संविदा भर्ती पर पूर्ण रोक लगाई जाए।
स्थायी भर्ती कैलेंडर जारी कर सभी रिक्त पदों पर नियमित भर्ती कराई जाए।
सोढाणी समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
भर्ती प्रक्रिया की पुनः समीक्षा कर विद्या संबल के गेस्ट फैकल्टी को प्राथमिकता दी जाए।
UGC मानकों और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार ही स्थायी भर्ती लागू की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के साथ-साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी करेंगे। विद्या संबल योजना से जुड़े गेस्ट फैकल्टी सदस्यों ने कहा, "हम वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, फिर भी हमें नजरअंदाज किया जा रहा है। सरकार से निवेदन है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया जाए तथा गेस्ट फैकल्टी को उचित अवसर दिया जाए।"
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