Jantar Mantar Updates | '20 जुलाई को संसद चलो': सोनम वांगचुक बोले, "घर बैठकर सोशल मीडिया सपोर्ट से नहीं..."

वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा सुधारों पर भी जोर दे रहे हैं।
सोनम वांगचुक की सेहत में लगातार गिरावट हो रही है जिससे देशभर में उनके समर्थक चिंतित हैं।
सोनम वांगचुक की सेहत में लगातार गिरावट हो रही है जिससे देशभर में उनके समर्थक चिंतित हैं।द मूकनायक
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नई दिल्ली- लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान किया है। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से शुरू होने वाले इस मार्च में वे सांसदों से छात्रों की समस्याओं, परीक्षा घोटालों और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर स्थायी समाधान की अपील करेंगे।

वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में कहा, “ मेरे अनशन का 11 दिन ख़त्म हो रहा है, मैं अंदर से मजबूत हूँ लेकिन बाहर से कमज़ोर दिख रहा हूँ, शायद इसलिए मेरे भूख हड़ताल तोड़ने के लिए देशभर से सैकड़ों संदेश आए, लेकिन इससे उन 20 छात्रों की मदद नहीं होगी जिन्होंने आत्महत्या कर ली, न ही इससे लद्दाख की पहाड़ियों या भारत की नदियों की रक्षा हो पाएगी। अगर आप वाकई मदद करना चाहते हैं तो आरामदायक सोफों से सिर्फ संदेश भेजने से थोड़ा ज्यादा करें। दिल्ली आएं, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचें। हम सब मिलकर संसद की ओर एक बहुत शांतिपूर्ण मार्च शुरू करेंगे और अपने माननीय सांसदों से अपील करेंगे कि वे इन मुद्दों को उठाएं और स्थायी समाधान निकालें।”

मेरे लिए अनशन तोड़कर चले जाना आसान है लेकिन क्या इससे रिया, आकांक्षा जैसे जिन 20 बच्चों ने आत्महत्याएं की हैं , वो रुक जायेंगे?
- सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। वे और कई छात्र लगातार उपवास रख रहे हैं। कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, AISA नेता कॉमरेड ऋषिकेश की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें RML अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

यह भूख हड़ताल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के साथ जुड़ी हुई है, जिसमें NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्याओं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा सुधारों पर भी जोर दे रहे हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा घोटालों के कारण छात्रों में हताशा बढ़ी है और कई ने आत्महत्या का रास्ता चुना। वांगचुक ने युवाओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे सिर्फ सोशल मीडिया पर समर्थन न दिखाएं बल्कि दिल्ली पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से मार्च में शामिल हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मार्च पूरी तरह अहिंसक रहेगा। कोकरोच जनता पार्टी ने जून 6 को सबसे पहले जंतर मंतर पर एक दिन का धरना दिया था जिसे खासा जन समर्थन मिला। उसके बाद देश के कई प्रमुख शहरों जैसे बंगलुरु, लखनऊ, पुणे, अमृतसर, जयपुर आदि जगह भी धरने दिए गये और उसके बाद 20 जून से दिल्ली के जंतर मंतर पर लगातार धरना दिया जा रहा है जिसे अब करीब तीन सप्ताह होने को हैऔर इसमें छात्र, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

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