
दिल्ली- कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) का पहला बड़ा स्ट्रीट प्रदर्शन शनिवार 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ। अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हजारों युवा, छात्र, अभ्यर्थी और अभिभावक इकट्ठा हुए। NEET-UG 2026 पेपर लीक, CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद और शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन चला। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से यूनियन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित था। प्रदर्शन में लद्दाख के क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की मौजूदगी ने युवाओं में जबरदस्त उत्साह भरा।
समर्थकों के लिए यह धरना एक ऐतिहासिक पल था। जो कोकरोच जनता पार्टी महज 21 दिन पहले यानि 16 मई को बनी, उसने 6 जून को देश के सबसे प्रतिष्ठित विरोध-स्थल, जंतर-मंतर पर अपना झंडा गाड़ दिया। संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका से उड़कर आए। कॉकरोच मास्क, तिरंगा, किताबें: यह महज प्रदर्शन नहीं, एक नई राजनीतिक भाषा थी।
आलोचकों के लिए यह धरना उसी सवाल का जवाब था जो शुरू से था- क्या Instagram के लाइक्स सड़क पर भी नजर आयेंगे? जवाब था: उतना नहीं। 22 करोड़ फॉलोअर्स की पार्टी जंतर-मंतर पर 'चंद' हजार लोग ही जुटा पाई। धरना पूरे 5 बजे तक नहीं चला और उससे पहले ही समाप्त हो गया।
इस धरने से पहले दिल्ली पुलिस ने IGI हवाई अड्डे, सीमा चौकियों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया। जंतर-मंतर के आसपास स्टील बैरिकेड्स लगाए गए। 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी पूरे नई दिल्ली में तैनात रहे।
अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के दौरान साफ कहा कि आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते। उन्होंने सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर मांग नहीं मानी गई तो अगले हफ्ते फिर प्रदर्शन होगा – और यह अब राष्ट्रीय स्तर पर फैलेगा। "हमारा मूवमेंट सोशल मीडिया से आगे निकल चुका है, यह अब पूरे देश का आंदोलन है," दीपके ने जंतर-मंतर पर कहा।
CPI(M) ने CJP के मुद्दों का समर्थन किया। पार्टी के सांसदों और नेताओं ने युवाओं की निराशा को स्वीकार करते हुए प्रदर्शन की सराहना की। कई नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। CPI(M) नेता दीपंकर भारत की GenZ के विरोध-प्रदर्शनों की ऊर्जा को महसूस करने और पेपर लीक के ज़िम्मेदार मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे। प्रदर्शन में दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों से लोग पहुंचे – कुछ उम्रदराज भी शामिल हुए, जिन्होंने युवा पीढ़ी की हिम्मत बढाई।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "यह वेक-अप कॉल है सरकार के लिए। हर उम्र और बैकग्राउंड के लोग आए। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही चाहिए।" एक 60 वर्षीय बुजुर्ग बोले, " कॉक्रोच रेजिलिएंट होते हैं। हम भी हैं। सिस्टम में सड़न है, हम उसी में पनप रहे हैं।"
Al Jazeera के अनुसार, यह आंदोलन उसी दक्षिण एशियाई प्रवृत्ति को दर्शाता है जहाँ श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में सोशल मीडिया से उठे युवा आंदोलनों ने सरकारें हिला दीं। महुआ मोइत्रा , कीर्ति आज़ाद सहित कई नेताओं ने CJP को एंडोर्स किया।
मोदी की पार्टी के कुछ समर्थकों ने सीजेपी को एक सोशल मीडिया नौटंकी से ज्यादा कुछ नहीं कहकर खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि पैरोडी पार्टी की सोशल मीडिया सफलता राजनीतिक सड़क पर लामबंदी में तब्दील नहीं हो सकती है और इसका तेजी से बढ़ना संभवतः क्षणभंगुर होगा। व्हाट्सएप्प पर अफवाहों का बाज़ार गरम रहा- लोगों ने तंज कसा कि धरना पूरे समय तक नहीं चला सके, सिस्टम क्या ख़ाक बदलेंगे?
दीपके की AAP से पूर्व-संबद्धता को लेकर यह सवाल भी उठा कि क्या यह "स्वतःस्फूर्त आंदोलन" है या विपक्ष की रणनीति।
रविवार को दीपके एक बार फिर सोशल मीडिया के मार्फ़त समर्थकों से मुखातिब होंगे, अपने x अकाउंट पर उन्होंने लिखा," कल हममें से हज़ारों लोगों ने इतिहास रचा। जंतर-मंतर पर हमारे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन ने सरकार को दिखा दिया कि जब हम एकजुट होते हैं, तो 'कॉकरोच' क्या-क्या कर सकते हैं। कल हमारे साथ शामिल होने वाले ज़्यादातर लोगों ने पहले कभी किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया था। लेकिन हमारी सामूहिक मौजूदगी से उन्हें हिम्मत मिली कि वे शिक्षा व्यवस्था के प्रति अपना गुस्सा और निराशा ज़ाहिर कर सकें। अगर हम अपनी आवाज़ नहीं उठाएंगे, तो बदलाव नहीं आ सकता।
मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ—छोटे बच्चों और छात्रों समेत—जिन्होंने गर्मी की तेज़ धूप का सामना किया और यह साबित किया कि शांतिपूर्ण विरोध ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। सरकार एक एकजुट और शांतिपूर्ण आंदोलन का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हम 'कॉकरोचों' को उनसे कभी डरने की ज़रूरत नहीं है।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। धर्मेंद्र प्रधान ने पूरी एक पीढ़ी के साथ अन्याय किया है। अगर उन्हें हटाया नहीं गया या वे अगले 7 दिनों में खुद पद से नहीं हटे, तो हमें ज़मीन पर अपना विरोध जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
मैं आज बाद में इंस्टाग्राम लाइव के ज़रिए आप सभी से बात करूँगा। जुड़े रहिए।"
CJP ने साबित किया कि मीम और व्यंग्य से भी असली मुद्दे उठाए जा सकते हैं। NEET और CBSE विवादों ने युवाओं की गुस्सा भरा था, CJP ने उसे चैनल दिया। पहला प्रदर्शन शांतिपूर्ण और मीडिया में छाया, यह खुद में सफलता है। लेकिन लंबे असर के लिए संगठन, स्पष्ट एजेंडा और निरंतरता जरूरी है। सरकार ने अभी कोई जवाब नहीं दिया, जो दबाव दिखाता है।
दूर-दूर से आए लोग, CPI(M) समर्थन और दीपके का अगला ऐलान सुझाते हैं कि यह सिर्फ शुरुआत हो सकती है। युवा भारत का गुस्सा अब 'कॉक्रोच' बनकर सड़कों पर है , देखना होगा कि यह आंदोलन कितना टिकाऊ और प्रभावी साबित होता है।
कॉक्रोच जनता पार्टी का संदेश साफ है: हम लेजी नहीं, बस इंसाफ मांग रहे हैं। अगला दौर अगले हफ्ते? जंतर-मंतर फिर गूंज सकता है।
तीन हफ्ते पुरानी किसी भी पार्टी के लिए जंतर-मंतर तक पहुँचना वह भी बिना किसी स्थापित संगठन के छोटी बात नहीं। लेकिन 22 करोड़ फॉलोअर्स की उम्मीद के मुकाबले जमीनी संख्या ने यह भी साबित किया कि ऑनलाइन उत्साह और ऑफलाइन एकजुटता के बीच अभी बड़ी खाई है।
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