"CJP Protest में नहीं जाना": दिल्ली पुलिस की मनमानी; युवती को जिम से उठाकर लगाया 'वर्चुअल हाउस अरेस्ट'

दिल्ली पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में बृंदा करात ने कहा है कि यह पुलिस अधिकारों का सबसे बड़ा दुरुपयोग है। एक युवती को बिना किसी वारंट के उठाया गया, बिना वारंट पूछताछ की गई, उसकी निजता का उल्लंघन किया गया और बिना किसी आरोप या स्पष्टीकरण के उसे ‘वर्चुअल हाउस अरेस्ट’ में डाल दिया गया।
युवती को निर्देश दिया गया कि वह अपनी लोकेशन पुलिस के साथ शेयर करे और घर से बाहर न निकले। अगर बाहर निकलती है तो लाइव लोकेशन भेजना अनिवार्य होगा, नहीं तो कार्रवाई होगी।
युवती को निर्देश दिया गया कि वह अपनी लोकेशन पुलिस के साथ शेयर करे और घर से बाहर न निकले। अगर बाहर निकलती है तो लाइव लोकेशन भेजना अनिवार्य होगा, नहीं तो कार्रवाई होगी।एआई निर्मित चित्र
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नई दिल्ली – दिल्ली पुलिस के खिलाफ एक गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि न्यू राजेंद्र नगर थाने की पुलिस ने एक युवती को ‘सीजेपी’ (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन में जाने से रोकने के लिए उसे बिना किसी वारंट के जिम से उठाया, घंटों पूछताछ की, उसका मोबाइल चेक किया और फिर उस पर ‘वर्चुअल हाउस अरेस्ट’ लगा दी।

इस मामले में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा की पूर्व सांसद बृंदा करात ने दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

पत्र में बृंदा करात ने बताया कि उन्हें 6 जून की दोपहर को आहाना सिंह कैथ नाम की एक युवती का फोन आया, जिसे वह कई वर्षों से जानती हैं। आहाना ने अभी 4 जून को अपनी मास्टर डिग्री की अंतिम परीक्षा दी थी। वह पूरी तरह से परेशान और सहमी हुई थी।

5 जून दोपहर करीब 12:30 बजे आहाना न्यू राजेंद्र नगर स्थित "एनीथिंग फिटनेस" जिम में थी। तभी पुलिसकर्मियों का एक दल जिम में घुसा और उसे बाहर ले गया। इसमें ज्यादातर पुरुष पुलिसकर्मी थे और एक महिला पुलिसकर्मी भी थी। उसे पास के एक कोचिंग संस्थान "श्रीराम आईएएस" के पार्किंग क्षेत्र में ले जाया गया, जहां उसे घेरकर पूछताछ शुरू कर दी गई।

आहाना ने इस दल में शिवम नाम के एक अधिकारी और रीता नाम की एक महिला उप-निरीक्षक की पहचान की। पूछताछ में उससे परिवार, पढ़ाई और फिर बार-बार उसके राजनीतिक विचारों के बारे में सवाल पूछे गए। उसे चेतावनी दी गई कि वह अगले दिन होने वाले ‘सीजेपी’ प्रदर्शन में न जाए।

 ‘हमें सूचना है तुम जाने वाली हो’

जब आहाना ने पुलिस को बताया कि उसका प्रदर्शन में जाने का कोई इरादा नहीं है, तो पुलिसकर्मियों ने कहा, "हमें तुम्हारे बारे में सूचना है और पता है कि तुम जाने की योजना बना रही हो।" साथ ही, उसे यह भी कहा गया कि अगर वह प्रदर्शन में जाने वाले किसी अन्य व्यक्ति के बारे में जानती है तो पुलिस को बताए। बृंदा कराट के अनुसार, यह सीधा खतरा था कि उसे पुलिस की मुखबिर बनना होगा, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने आहाना से उसका मोबाइल फोन सौंपने की मांग की। आहाना ने कहा कि इसके लिए कोर्ट का आदेश चाहिए, लेकिन बाद में डरी-सहमी हालत में उसने पुलिस को अपने व्हाट्सएप मैसेज दिखा दिए। इसके बावजूद पुलिस ने उसे चेतावनी दी कि उस पर नजर रखी जा रही है।

मामला यहीं नहीं रुका। उसी दिन रात करीब 8 बजे ‘रीतू’ नाम की एक महिला पुलिसकर्मी आहाना के फ्लैट पर पहुंची और उसे बताया कि उसे उसकी निगरानी के लिए पीएसओ (निजी सुरक्षा अधिकारी) लगाया गया है। उसे निर्देश दिया गया कि वह अपनी लोकेशन पुलिस के साथ शेयर करे और घर से बाहर न निकले। अगर बाहर निकलती है तो लाइव लोकेशन भेजना अनिवार्य होगा, नहीं तो कार्रवाई होगी।

युवती को निर्देश दिया गया कि वह अपनी लोकेशन पुलिस के साथ शेयर करे और घर से बाहर न निकले। अगर बाहर निकलती है तो लाइव लोकेशन भेजना अनिवार्य होगा, नहीं तो कार्रवाई होगी।
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बिना वारंट पूछताछ और निजता का उल्लंघन

6 जून को फिर वही पीएसओ उसके फ्लैट पर पहुंची और बार-बार डोरबेल बजाई। उसने कहा कि वह बाहर ही तैनात रहेगी और आहाना को फिर से अपनी लाइव लोकेशन भेजनी होगी। इसके बाद ही आहाना ने बृंदा कराट को फोन कर पूरा घटनाक्रम बताया। कराट के मुताबिक, वह बेहद डरी और रो रही थी।

बृंदा करात ने तुरंत पुलिसकर्मी ‘रीतू’ को फोन किया। रीतू ने माना कि उसे यह ड्यूटी न्यू राजेंद्र नगर थाने ने दी है। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह मौके पर मौजूद नहीं थी, लेकिन उसे पता है कि आहाना को जिम से पुलिस लेकर गई थी और उसे प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी दी गई थी। कराट के फोन के बाद आहाना को ‘किरण’ नाम के एक अन्य पुलिसकर्मी का फोन आया, जिसने पूछा कि क्या उसने घर छोड़ा है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त को लिखे पत्र में बृंदा करात ने कहा है कि यह पुलिस अधिकारों का सबसे बड़ा दुरुपयोग है। एक युवती को बिना किसी वारंट के उठाया गया, बिना वारंट पूछताछ की गई, उसकी निजता का उल्लंघन किया गया और बिना किसी आरोप या स्पष्टीकरण के उसे ‘वर्चुअल हाउस अरेस्ट’ में डाल दिया गया।

उन्होंने कहा, “आहाना फिलहाल एक सार्वजनिक परीक्षा की तैयारी कर रही है, लेकिन भले ही वह ऐसा नहीं कर रही होती और प्रदर्शन में जाने का फैसला कर लेती, तो भी ऐसा करना उसका लोकतांत्रिक अधिकार है। पुलिस को उसे रोकने का कोई हक नहीं है।”

बृंदा करात ने कहा कि एक तरफ दिल्ली पुलिस कहती है कि वह संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इसलिए उसने ‘सीजेपी’ के प्रदर्शन की अनुमति दी, वहीं दूसरी तरफ वही पुलिस युवाओं को डरा-धमकाकर प्रदर्शन में जाने से रोक रही है। उन्होंने इसे पूरी तरह से निंदनीय और अस्वीकार्य बताया और संबंधित पुलिस अधिकारियों व उनके आदेश देने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

युवती को निर्देश दिया गया कि वह अपनी लोकेशन पुलिस के साथ शेयर करे और घर से बाहर न निकले। अगर बाहर निकलती है तो लाइव लोकेशन भेजना अनिवार्य होगा, नहीं तो कार्रवाई होगी।
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युवती को निर्देश दिया गया कि वह अपनी लोकेशन पुलिस के साथ शेयर करे और घर से बाहर न निकले। अगर बाहर निकलती है तो लाइव लोकेशन भेजना अनिवार्य होगा, नहीं तो कार्रवाई होगी।
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