"पीआर स्टंट के लिए बुक स्टोर से उठाई बाबा साहब की किताब...": वंचित बहुजन आघाडी का CJP फाउंडर दीपके पर तंज!

वीबीए ने ‘पीआर स्टंट’ करार देते हुए कहा कि दीपके ने बिना समझे महज फोटो खिंचवाने के लिए किताब का सहारा लिया।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके 6 जून को जब दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकले तो उनके हाथों में बाबा साहब की एक किताब थी।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके 6 जून को जब दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकले तो उनके हाथों में बाबा साहब की एक किताब थी।
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मुंबई/पुणे: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके इन दिनों लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। विदेश से वापस लौटने के बाद से ही वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, लेकिन अब उन्हें ‘वंचित बहुजन आघाडी’ (VBA) के तीखे निशाने पर झेलना पड़ रहा है। वीबीए ने दीपके पर बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रतीकों का ‘नाटकीय’ इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए जमकर निशाना साधा है। वीबीए ने x पर एक पोस्ट में लिखा, "अगर आप BJP और कांग्रेस की तरह अंबेडकरवादी प्रतीकों का इस्तेमाल दिखावटी PR स्टंट के तौर पर करने जा रहे हैं, तो कम से कम इसे ठीक से तो कीजिए।"

दरअसल विवाद की जड़ वह तस्वीर है जो 6 जून को दिल्ली हवाई अड्डे पर सामने आई थी। अमेरिका से वापस लौटते ही अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले अपने हाथों में एक किताब ले रखी थी । यह किताब डॉ. अंबेडकर की आत्मकथा बताई जा रही थी। हालांकि कई जगह इस किताब की पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति भी बनी।

वीबीए ने इस कदम को ‘पीआर स्टंट’ (PR Stunt) करार देते हुए कहा कि दीपके ने बिना समझे महज फोटो खिंचवाने के लिए किताब का सहारा लिया। वीबीए ने कटाक्ष करते हुए कहा, "आप हवाई अड्डे के बुक स्टोर से कोई भी किताब उठाकर प्रचार कर रहे हैं, जैसे भाजपा और कांग्रेस करती है। अगर बाबा साहब के प्रतीकों का इस्तेमाल करना है तो कम से कम सही तरीके से तो करें।" वीबीए ने कहा कि अगर वह वाकई अंबेडकरवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो पुणे में कार्यकर्ताओं से इस किताब की कॉपी मांगकर देख लें ।

आपने PR फ़ोटो-ऑप के लिए एयरपोर्ट के बुकस्टोर से "बाबासाहेब की तथाकथित आत्मकथा" की कॉपी उठाई और फिर जंतर-मंतर पर भी वही गलती दोहराई। अगर आप BJP और कांग्रेस की तरह अंबेडकरवादी प्रतीकों का इस्तेमाल दिखावटी PR स्टंट के तौर पर करने जा रहे हैं, तो कम से कम इसे ठीक से तो कीजिए।
- वंचित बहुजन आघाडी

दूसरी ओर अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी का फोकस शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। नीट परीक्षा (NEET) में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के मामले ने करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं । पिछले कई दिनों से दिल्ली, लखनऊ और पुणे समेत कई शहरों में छात्र सड़कों पर उतरे हुए हैं।

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर देशव्यापी अभियान छेड़ा हुआ है और अब तक दिल्ली और पुणे में प्रदर्शन हो चुके हैं।

वीबीए ने साफ किया है कि वह सिर्फ दीपके की आलोचना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क पर उतरेगी। पार्टी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 12 जून को मुंबई में छात्रों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। वीबीए का कहना है कि नीट की अव्यवस्थाओं के लिए धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं और उनका इस्तीफा जरूरी है।

पुणे में गुरूवार को प्रदर्शन के लिए उमड़ी भीड़
पुणे में गुरूवार को प्रदर्शन के लिए उमड़ी भीड़

युवाओं से हिन्दू-मुस्लिम राजनीति से दूर रहने की अपील

इधर, अभिजीत दीपके 11 जून को पुणे में बड़ा प्रदर्शन किया। कॉकरोच जनता पार्टी ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) परिसर में शाम 4 बजे प्रदर्शन आयोजित किया जिसमे काफी तादाद में युवाओं और उनके पेरेंट्स ने हिस्सा लिया। आयोजन में सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके ने संबोधित किया। दीपके ने युवाओं से कहा, " पिछले दस-बारह सालों से देश में सिर्फ़ हिंदू-मुसलमान की राजनीति चल रही है। वे हमें बहका रहे हैं। हमने एक नागरिक के तौर पर सोचना बंद कर दिया है। हम इस नज़रिए से सोचते हैं कि हम हिंदू हैं या मुसलमान। वे हमें बांटते हैं। क्योंकि जब आप खुद को हिंदू या मुसलमान समझते हैं, तो आप सिर्फ़ धार्मिक मामलों के बारे में सोचते हैं। आप रोज़गार के बारे में नहीं सोचेंगे। आप शिक्षा के बारे में नहीं सोचेंगे। आप महंगाई के बारे में नहीं सोचेंगे।

हिंदू-मुसलमान की राजनीति ने हमें क्या दिया है? पिछले चालीस सालों में देश ने इतनी ज़्यादा बेरोज़गारी देखी है। बाकी दुनिया भविष्य के लिए नौकरियां पैदा करने के लिए AI, सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी में निवेश कर रही है, हम क्या कर रहे हैं? हिंदू-मुसलमान, धार्मिक बंटवारे, धार्मिक झगड़े। सत्ता में बैठे हर व्यक्ति ने हिंदू-मुसलमान की राजनीति से फ़ायदा उठाया है।"

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