"आप दमन और जातिवाद के प्रतीक न बनें": सहिल वाकोडे मामले में IIT बॉम्बे निदेशक को खुला पत्र, 84 संगठनों ने कहा- जवाबदेह बनिए!

जाति-विरोधी संगठनों और व्यक्तिओं ने अपने पत्र में साहिल की मौत के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति, फ़ैकल्टी फ़ोरम के रुख़, CCTV फ़ुटेज लीक और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर निदेशक प्रो. शिरीष केदारे को ज़िम्मेदार ठहराया गया है।
सहिल वाकोडे मामले में IIT बॉम्बे निदेशक को 84 संगठनों ने एक खुला पत्र जारी कर इस्तीफ़े की मांग की है।
सहिल वाकोडे मामले में IIT बॉम्बे निदेशक को 84 संगठनों ने एक खुला पत्र जारी कर इस्तीफ़े की मांग की है। द मूकनायक
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मुंबई- IIT बॉम्बे के छात्र सहिल वाकोडे की मौत के बाद संस्थान के प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए देश भर के 84 संगठनों और 40 विशिष्ट व्यक्तियों ने निदेशक प्रो. शिरीष केदारे को एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में प्रशासन को "या तो बेहद संवेदनहीन या जाति-भेदभाव की शिकायतों के प्रति दमनकारी" बताया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने निदेशक से अपने पद से इस्तीफ़ा देने की मांग की है।

IIT बॉम्बे के दूसरे वर्ष के बी.टेक छात्र साहिल वाकोडे का मामला 18 सितंबर को उनकी संदिग्ध आत्महत्या के बाद से चर्चा में है। इसी दिन परीक्षा के दौरान प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला ने साहिल पर मोबाइल फोन का उपयोग करने और चीटिंग करने का आरोप लगाया था। इसके कुछ घंटों बाद साहिल ने अपने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली।

साहिल के परिवार और प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि साहिल को उसकी जाति के आधार पर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। परिवार की शिकायत पर प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला और अन्य के खिलाफ एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला (FIR) दर्ज किया गया है। मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है और साहिल की मौत के एक माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, आरोपी प्रोफेसर को अवकाश पर भेजा गया है। इधर, संस्थागत व्यवस्था की विफलता और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज प्रदर्शनकारी संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

इसी क्रम में जाति-विरोधी संगठनों और व्यक्तिओं द्वारा केदारे को एक खुला पत्र जारी किया गया है जिसकी शुरुआत में कहा गया है कि सहिल वाकोडे की "दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु" के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने IIT बॉम्बे प्रशासन को "बेहद असंवेदनशील, या फिर जातिगत भेदभाव की शिकायतों के प्रति दुर्भावनापूर्ण रूप से दमनकारी" साबित किया है। इसके बाद पत्र में चार बिंदुओं में आरोप गिनाए गए हैं।

सहिल वाकोडे मामले में IIT बॉम्बे निदेशक को 84 संगठनों ने एक खुला पत्र जारी कर इस्तीफ़े की मांग की है।
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पत्र के मुताबिक़ संस्थान की ओर से प्रेस को एक बयान जारी किया गया, जिसमें सहिल को परीक्षा में नक़ल करने वाला बताकर बदनाम किया गया और उसी बयान में उसके निधन की सूचना दी गई। पत्र में कहा गया है कि यह उसकी मौत के कुछ ही घंटों के भीतर किया गया, इसलिए संभव है कि मौत की परिस्थितियों की कोई जांच हुई ही न हो।

हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि उन्हें ऐसी कोई और प्रेस विज्ञप्ति ज्ञात नहीं है जिसमें संस्थान ने किसी छात्र को परीक्षा में नक़ल करते पकड़े जाने की बात कही हो। पत्र यह भी कहता है कि किसी छात्र की मौत की परिस्थितियों पर प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए टिप्पणी करना IIT बॉम्बे के लिए सामान्य बात नहीं है। इसी आधार पर पत्र पूछता है कि संस्थान को ऐसा "कठोर और असाधारण" क़दम उठाने के लिए किसने प्रेरित किया।

पत्र के अनुसार जब यह पहला बयान जारी हुआ, तब तक सहिल के परिवार ने मुंबई पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं की थी। पत्र में लिखा है कि चाहे मौजूदा प्रशासन संस्थान के इतिहास का सबसे अक्षम प्रशासन हो, या यह सहिल के ख़िलाफ़ मीडिया अभियान चलाने की बेहद कुशल व्यवस्था हो, "आप ज़िम्मेदार हैं और आपको जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"

आरोपी डीन के समर्थन में फ़ैकल्टी फ़ोरम का रुख़

पत्र के अनुसार सहिल के माता-पिता ने डीन सूर्यनारायण दूल्ला के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद संस्थान की आधिकारिक फ़ैकल्टी संस्था ने आरोपी प्रोफ़ेसर के साथ एकजुटता का सार्वजनिक रुख़ घोषित किया।

पत्र में कहा गया है कि IIT बॉम्बे के फ़ैकल्टी फ़ोरम के अध्यक्ष ने अपनी आधिकारिक हैसियत से मीडिया से बात की, जो नियमों के अनुसार संस्थान की मंज़ूरी से ही हुआ होगा। हस्ताक्षरकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह संस्थान ने जातिवाद के आरोपी डीन के समर्थन में अभियान चलाया, जबकि मामले की जांच चल रही है। पत्र में सवाल उठाया गया: "आपके संस्थान में जातिवाद का सामना करने वाला कोई भी छात्र इन्हीं नतीजों के डर के बिना शिकायत कैसे कर पाएगा?"

चुनिंदा CCTV फ़ुटेज मीडिया तक पहुंचा

पत्र का तीसरा बिंदु जांच के दौरान परीक्षा हॉल के CCTV फ़ुटेज के मीडिया को जारी होने से जुड़ा है। हस्ताक्षरकर्ताओं का आरोप है कि फ़ुटेज "चुनिंदा" तरीक़े से चुना गया, ताकि सहिल के ख़िलाफ़ मीडिया अभियान से पहले से बने पूर्वाग्रह को बल मिले।

पत्र के अनुसार जहां यह फ़ुटेज सहिल की मौत के बाद भी उन्हें बदनाम करने के लिए "बेतहाशा" प्रसारित किया गया, वहीं सहिल और डीन दूल्ला के बीच की बाद की बातचीत गोपनीय बनी हुई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस लीक के लिए प्रशासन में किसी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई। पत्र के शब्दों में, "इससे आप अपने ही छात्र के ख़िलाफ़ उनकी मृत्यु के बाद भी चल रहे दुष्प्रचार में सहभागी ठहरते हैं।"

साहिल के लिए न्याय की मांग पर अनशन पर बैठे उसके माता पिता और AIISCA के सदस्य
साहिल के लिए न्याय की मांग पर अनशन पर बैठे उसके माता पिता और AIISCA के सदस्य

प्रदर्शनकारी छात्रों और माता-पिता के साथ पुलिस कार्रवाई

पत्र में आरोप है कि हाल ही में सहिल के समर्थन में खड़े होकर न्याय की मांग कर रहे IIT बॉम्बे के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की गई। पत्र के अनुसार पुलिस ने सहिल के माता-पिता और IIT बॉम्बे के गेट के बाहर बैठे प्रदर्शनकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की की।

हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि इससे यह भयावह ख़ाका सामने आया है कि IIT बॉम्बे जातिवाद की चिंताओं से कैसे निपटेगा।

पत्र का निष्कर्ष है कि इन परिस्थितियों में निदेशक का पद पर बने रहना IIT बॉम्बे के सभी छात्रों को एक "भयानक संदेश" देता है। संदेश यह कि जातिवाद, मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक ज़्यादतियों की उनकी चिंताओं से कठोर दमन और घृणित दुष्प्रचार के ज़रिए निपटा जाएगा।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने निदेशक से आग्रह किया है कि वे दमन और जातिवाद के प्रतीक न बनें। पत्र में उनसे इस पूरे "प्रशासनिक विफलताओं के प्रकरण" की ज़िम्मेदारी लेने और अपने पद से इस्तीफ़ा देने का अनुरोध किया गया है।

इन संगठनों ने लिखा पत्र

इस खुले पत्र पर जिन संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं, उनमें आमची पढ़ाई आमची लढाई, एक्शन फ़ॉर इक्विटी, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियंस, ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन, ऑल इंडिया फ़ोरम फ़ॉर द राइट टू एजुकेशन, ऑल इंडिया इंडिपेंडेंट शेड्यूल्ड कास्ट्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया पीपुल्स फ़्रंट, ऑल इंडिया रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (कर्नाटक), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (मुंबई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन (चेन्नई), ऑल इंडिया यूथ फ़ेडरेशन (चेन्नई), अंबेडकर किंग स्टडी सर्कल (यूएसए), अंबेडकर रीडिंग सर्कल (बेंगलुरु), अंबेडकर रीडिंग सर्कल (मुंबई), अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन, अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बेंगलुरु), अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (PU), अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (UoH), अंबेडकरियन क्रॉनिकल, अंबेडकराइट लॉयर्स कलेक्टिव, बहुजन स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया, बहुत्व कर्नाटक, भीम आर्मी स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन (दिल्ली), भीम सैनिक संगठना, बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BBAU), बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JNU), ब्रेक द साइलेंस (IISc), कास्ट एनिहिलेशन मूवमेंट, COLLECTIVE, कॉमन टीचर्स फ़ोरम (दिल्ली विश्वविद्यालय), दलित संघर्ष समिति, दलित स्टूडेंट्स यूनियन (UoH), दयार-ए-शौक़ स्टूडेंट्स चार्टर (JMI), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन, डेमोक्रेटिक टीचर्स फ़्रंट, डेमोक्रेटिक यूथ-स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पश्चिम बंगाल), डिसेबिलिटी सपोर्ट ग्रुप (NLSIU), दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन (महाराष्ट्र), फ़ातिमा शेख़ स्टडी सर्कल (मुंब्रा), फ़्रैटर्निटी, फ़्रैटर्निटी (HCU), ग्लोबल अंबेडकराइट स्कॉलर्स एसोसिएशन, IISc क्वीयर कलेक्टिव, इंडियन सोसाइटी फ़ॉर कल्चरल को-ऑपरेशन एंड फ्रेंडशिप (चेन्नई), इंक़लाबी छात्र मोर्चा (AU), इंक़लाबी स्टूडेंट्स यूनिटी, IT एंड ITES डेमोक्रेटिक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन, जागृता कर्नाटक, जय भीम नगर बचाव समिति, जनकीय मनुष्यावकाश प्रस्थानम (केरल), जस्टिस फ़ॉर प्रिज़नर्स (केरल), किरुगुंडा भीम टाइगर्स, क्रांतिकारी युवा संगठन, मुक्ति संग्राम मज़दूर मंच, नेशनल अलायंस ऑफ़ पीपुल्स मूवमेंट्स, नौजवान भारत सभा, नेटवर्क फ़ॉर इन्क्लूसिव लिबर्टी बाय एडवोकेसी ट्रस्ट, न्यू डेमोक्रेटिक लेबर फ़्रंट (तमिलनाडु), परिवर्तनकामी छात्र संगठन, पीपल फ़ॉर कास्ट एनिहिलेशन (लखनऊ), प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन, प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन, प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स-यूथ एसोसिएशन, प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (DU), प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JNU), प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फ़्रंट (हरियाणा), RANG फ़ाउंडेशन, रिवोल्यूशनरी कल्चरल फ़ोरम, रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पावर (तमिलनाडु), रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स-यूथ फ़्रंट (तमिलनाडु), सावित्री फुले अंबेडकर कारवां (NLSIU), सावित्रीबाई फुले रिसोर्स सेंटर, सोशलिस्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया, स्त्री जागृति समिति, स्त्री मुक्ति लीग (महाराष्ट्र), स्टूडेंट अपराइज़िंग मूवमेंट फ़ॉर सोशल वेलफ़ेयर, स्टूडेंट्स फ़ॉर पीपुल्स डेमोक्रेसी, स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन, स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (मुंबई), स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (PU), द रिज़र्व्ड कंपार्टमेंट, यूनिवर्सिटी स्टूडेंट स्ट्रगल एक्शन कमेटी (SPPU) और वजूद (गोवा) शामिल हैं।

इधर, साहिल के लिए विगत कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे AIISCA की महाराष्ट्र इकाई की महासचिव दीपाली सालवे ने बताया कि रविवार, 25 अक्टूबर को संगठन साहिल की संस्थागत हत्या और छात्रों की जान के प्रति IIT-B की उदासीनता के विरोध में एकजुट हो रहे हैं। x पर एक पोस्ट में सालवे ने लिखा, " हम प्रो. सूर्य नारायण डूला और प्रो. शिरीष केदारे की गिरफ्तारी की मांग करते हैं। सभी जातिवाद को खत्म करने का संकल्प लेंगेऔर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी छात्र विशेषकर SC/ST छात्रों की जान को फिर कभी इतना तुच्छ न समझा जाए।"

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