एक महीने में न निष्कर्ष, न मोबाइल हुआ अनलॉक? साहिल वाकोडे केस में भीम आर्मी चीफ ने मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच पर उठाए सवाल

अमित शाह से की CBI जांच की मांग, IIT-B प्रशासन के बयानों पर भी सवाल
साहिल वाकोडे मामले में न्याय मांग रहे स्टूडेंट्स कहते हैं मुम्बई पुलिस ने 18 अक्टूबर को प्रोटेस्ट साईट को जबरन हटाया और विरोध कर रहे लोगों को हिरासत में लिया।
साहिल वाकोडे मामले में न्याय मांग रहे स्टूडेंट्स कहते हैं मुम्बई पुलिस ने 18 अक्टूबर को प्रोटेस्ट साईट को जबरन हटाया और विरोध कर रहे लोगों को हिरासत में लिया।
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मुंबई/नई दिल्ली- नगीना से सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर IIT-बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध मौत की CBI जांच कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने मौत के बाद न्याय मांग रहे विद्यार्थियों के साथ पुलिस के कथित बर्बरतापूर्ण व्यवहार की जांच की भी मांग की है। साहिल की मृत्यु 18 सितंबर को हुई थी। एक महीने से अधिक बीतने के बाद भी मामले में कोई निर्णायक नतीजा सामने नहीं आया है, और 18 अक्टूबर को अखिल भारतीय स्वतंत्र अनुसूचित जाति संघ (AIISCA) के आह्वान पर बुलाए गए प्रदर्शन में प्रोटेस्ट करने वालों के साथ जबरदस्ती की गई जिसके बाद विवाद और गहरा गया है।

अपने पत्र में चंद्रशेखर आजाद ने साहिल की मृत्यु को "अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक" बताया। उन्होंने लिखा कि घटना के बाद से साहिल के माता-पिता लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और उनका भूख हड़ताल तक पहुंच जाना बताता है कि वे अपने बेटे की मौत की सच्चाई जानने के लिए कितनी पीड़ा से गुजर रहे हैं।

पत्र में IIT-बॉम्बे प्रशासन पर भी सवाल उठाए गए हैं। आजाद के अनुसार प्रशासन के "गैर-जिम्मेदाराना बयानों" ने मामले में भ्रम की स्थिति पैदा की है। उन्होंने यह भी लिखा कि एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच किसी निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है और अब तक साहिल का मोबाइल फोन भी अनलॉक नहीं किया जा सका है। पत्र के मुताबिक यह स्थिति जांच की प्रगति और अहम साक्ष्यों को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। साहिल के साथ निर्धारित प्रक्रिया से हटकर जरूरत से ज्यादा सख्ती बरते जाने के आरोपों को भी उन्होंने गंभीर सवाल बताया।

आजाद ने गृह मंत्री से ये मांगें रखी हैं:

  • साहिल की संदिग्ध मृत्यु की जांच तत्काल CBI को सौंपी जाए।

  • मोबाइल फोन, परीक्षा कक्ष के रिकॉर्ड, संस्थान के संबंधित दस्तावेजों और घटना से पहले व बाद की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच हो।

  • 18 अक्टूबर को आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के साथ हुए पुलिसिया व्यवहार की जांच कराई जाए।

  • आंदोलनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक भविष्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

पत्र में कहा गया है कि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन की मौत की सच्चाई जानने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करने को विवश नहीं होना चाहिए। आजाद ने न्याय की मांग उठाने वाले विद्यार्थियों के साथ "सम्मानजनक और संवेदनशील" व्यवहार की अपील भी की।

18 अक्टूबर: 'जस्टिस कॉर्नर' पर कार्रवाई

साहिल की मौत के बाद से छात्र परिसर के बाहर 'जस्टिस कॉर्नर' नाम से प्रदर्शन स्थल चल रहा था, जहां तीन सप्ताह से धरना जारी था।18 अक्टूबर को इस स्थल को हटा दिया गया। प्रदर्शनकारियों और समर्थक संगठनों का आरोप है कि मुंबई पुलिस ने स्थल को जबरन हटाया और विरोध कर रहे लोगों को हिरासत में लिया।

हिरासत में लिए जाने वालों में AIISCA के संस्थापक राहुल सोनपिंपले, सचिव दीपाली साल्वे और कई अन्य कार्यकर्ता व छात्र थे। साहिल के माता-पिता, रवींद्र वाकोडे और सोनाली वाकोडे, को भी हिरासत में लिया गया। दोनों अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांग रहे छात्रों और एक शोकग्रस्त परिवार के साथ इस व्यवहार को लेकर छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा रोष है। पुलिस बर्बरता पर दीपाली कहती हैं, " मुंबई पुलिस को यह समझ लेना चाहिए कि हम दलित पैंथर्स और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की संतानें हैं। हम अपना इतिहास जानते हैं और उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस की बर्बरता या बाबासाहेब की तस्वीर को बेरहमी से फाड़े जाने की घटना पर हम चुप नहीं बैठेंगे।"

ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (AILAJ) ने साहिल के परिवार और IIT-B के छात्रों की स्वतंत्र जांच की मांग के साथ एकजुटता जताई है। संगठन ने पुलिस की बर्बरता, साहिल के शोकग्रस्त माता-पिता और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिरासत की कड़ी निंदा की है। AILAJ ने "संस्थागत हत्याएं बंद करो" और "रोहित एक्ट लागू करो" की मांग दोहराई है।

साहिल के माता पिता को भी 18 अक्टूबर को पुलिस ने हिरासत में लिया।
साहिल के माता पिता को भी 18 अक्टूबर को पुलिस ने हिरासत में लिया। फाइल फोटो

प्रदर्शन के बाद लैपटॉप, दवाइयां और चाबियां जब्त

प्रोटेस्ट स्थल हटाए जाने के बाद लगभग 22 से 25 प्रदर्शनकारी नंदन नीलेकणी मुख्य भवन के भीतर 'जस्टिस कॉर्नर 2.0' में चले गए हैं, जो निदेशक और मुख्य सुरक्षा अधिकारी (CSO) के कार्यालयों के पास है। उनकी मांग है कि निदेशक शिरीश केदारे को हटाया जाए और बातचीत के लिए एक प्रशासनिक प्रतिनिधि नियुक्त किया जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संस्थान को भेजे गए बार-बार के ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

प्रदर्शन स्थल हटने के बाद छात्रों के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि लैपटॉप, चार्जर, हॉस्टल की चाबियां, दवाइयां, जूते और बटुए समेत उनका निजी सामान जब्त कर लिया गया और अब तक लौटाया नहीं गया।

मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार एक छात्र ने बताया कि उसका लैपटॉप दो दिन से जब्त है, जबकि बुधवार सुबह 11 बजे परीक्षा है। स्टूडेंट्स का कहना है कि लैपटॉप में परीक्षा के लिए जरूरी दस्तावेज और अध्ययन सामग्री है।

चाबियों का संकट भी गंभीर है। आरोप है कि तीन प्रदर्शनकारियों की हॉस्टल की चाबियां बिना लौटाए गए बैगों में रह गईं, जिससे वे अपने कमरों में नहीं जा पा रहे। एक छात्र ने बताया कि उन्हें नहाने और कपड़े बदलने के लिए भी कमरे में जाना था, और उनके पास चप्पल तक नहीं थी।

सबसे चिंताजनक मामला दवाइयों का है। एक छात्र का आरोप है कि उनकी चाबियां तीन दिनों से रोकी गई हैं, जिससे कमरे में रखी दवाइयों और मेडिकल रिकॉर्ड तक वे नहीं पहुंच पा रहे। छात्र के अनुसार वे गंभीर अवसाद, चिंता और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) की दवा लेते हैं। दवा न मिलने से खाने की कोशिश करते समय उन्हें गंभीर चिंता और उल्टी हो रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें अस्पताल जाकर मेडिकल रिकॉर्ड दिखाने की सलाह दी गई, जो चाबियों के बिना संभव नहीं है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ईमेल करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला।

सामान वापस पाने की कोशिश में छात्रों को कथित तौर पर कई जगह घुमाया गया। पहले उन्हें मुख्य भवन, फिर मुख्य गेट और फिर पवई पुलिस स्टेशन भेजा गया, जहां पुलिस ने कहा कि सामान वहां नहीं है। CSO से संपर्क करने पर शुरू में इसे गोपनीय बताया गया, फिर कहा गया कि सामान परिसर में ही है, लेकिन पुलिस को सूचित किए बिना नहीं लौटाया जाएगा। छात्रों ने गुमशुदा सामान की सूची जमा की, पर आरोप है कि उन्हें दोपहर 3 से 3:30 बजे तक इंतजार कराया गया और फिर भी सामान नहीं मिला। एक सुरक्षा गार्ड ने कथित तौर पर बताया कि सामान एक स्टोररूम में बंद है। छात्रों ने सामान का निरीक्षण किए बिना पावती पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, ताकि किसी चीज के गायब होने की जिम्मेदारी उन पर न डाली जा सके।एक छात्र ने कहा, "अभी हमारी मुख्य मांग है कि वे हमारा सामान वापस करें। कम से कम हमारी चाबियां या दवाइयां तो लौटाएं।"

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