दलित छात्र सुसाइड: IIT Bombay ने माफ़ी मांगी- "साहिल की मौत से पहले हुई घटनाओं के बारे में जानकारी देना सही नहीं था" | आरोपी प्रोफेसर सस्पेंड

साहिल की मौत के बाद तीन दिन से छात्र आंदोलन कर रहे हैं और संस्थान के डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे ने रविवार देर रात छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों पर हस्ताक्षर किए।
आईआईटी बोम्बे के 21 सितंबर को एक बयान में कहा कि साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में हमारे पिछले संदेश में कही गई बातों के लिए हम माफ़ी मांगते हैं।
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। सोमवार को आरोपी शिक्षक को निलंबित किया गया।द मूकनायक
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मुंबई- आईआईटी बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत ने देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव, छात्र सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। साहिल के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा महीनों से जातिगत टिप्पणियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहा था। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। साहिल की मौत के बाद तीन दिन से छात्र आंदोलन कर रहे हैं और संस्थान के डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे ने रविवार देर रात छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों पर हस्ताक्षर किए। संस्थान प्रशासन साहिल की मौत से जुड़े हालात की स्वतंत्र जांच शुरू करने पर सहमत हो गया है और उसने 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट तथा 15 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का वादा किया है।

छात्रों के भारी दबाव के बीच केदारे ने स्वयं इस्तीफा देने की भी बात कही, वहीं केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने भी मामले में निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की। आठवले ने साहिल की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं और इस मामले में SC/ST अत्याचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज हुआ है। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष और पूरी जांच होनी चाहिए तथा जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। आठवले ने यह भी कहा कि देश के हर छात्र को जातिवाद से मुक्त, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए। मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है।

पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह घटना याद दिलाती है कि इन बड़े संस्थानों को कैंपस के माहौल और मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने की ज़रूरत है। लेकिन विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने के लिए प्रोफ़ेसरों को नौकरी से निकालना एक ऐसी समस्या का सिर्फ़ ऊपरी इलाज है, जिसके लिए असल में सर्जरी की ज़रूरत है। साथ ही, उन प्रोफ़ेसरों पर दोष मढ़ना जो परीक्षा के दौरान नकल की रिपोर्ट करने का अपना काम कर रहे थे, और इसे जातिगत भेदभाव का मुद्दा बना देना, एक दुखद नतीजा है।

परीक्षा में मोबाइल से शुरू हुआ विवाद, फिर सामने आए जातिगत भेदभाव के आरोप

साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सेकंड ईयर का छात्र था,18 सितंबर को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन पाए जाने को लेकर विवाद हुआ। IIT Bombay के अनुसार, साहिल ने परीक्षा का प्रश्नपत्र AI प्लेटफॉर्म पर डालकर उत्तर प्राप्त करने की कोशिश की थी। कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने उन्हें पकड़ा था और इसकी जानकारी संस्थान के बाकी अधिकारियों को दी थी. संस्थान का कहना है कि इस घटना के बाद उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कारवाई शुरू नहीं की गई और विभाग के अध्यक्ष ने उन्हें समझाया था कि इसका उनके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इसके कुछ घंटे बाद साहिल अपने हॉस्टल कमरे में मृत पाए गए। पुलिस ने शुरुआत में एक्सीडेंटल मौत दर्ज की थी। बाद में उनके पिता रविंद्र वाकोडे की शिकायत के आधार पर प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि साहिल को पिछले करीब तीन महीनों से जातिगत टिप्पणियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था।

साहिल के परिवार के आरोपों के विपरीत IIT Bombay ने संस्थान में जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे ने कहा है कि संस्थान में छात्रों की जाति संबंधी जानकारी इस तरह उपलब्ध नहीं होती कि उसके आधार पर शिक्षक या प्रशासन भेदभाव कर सकें। संस्थान के एससी/एसटी स्टूडेंट्स एंड स्टाफ सेल ने भी कहा है कि साहिल की ओर से जातिगत भेदभाव को लेकर उसके पास कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।

इधर सोमवार 21 सितंबर को आईआईटी बोम्बे ने एक माफीनामा जारी किया जिसमे कहा गया कि, "साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में हमारे पिछले संदेश में कही गई बातों के लिए हम माफ़ी मांगते हैं। इस घटना से जुड़ी जानकारी और हालात की जांच अभी संबंधित अधिकारियों द्वारा की जानी बाकी है। चल रही जांच को देखते हुए, उनकी मौत से पहले हुई घटनाओं के बारे में जानकारी देना या उनके बारे में कोई राय बनाना सही नहीं था, क्योंकि अभी तक जांच की सही प्रक्रिया से ये बातें पूरी तरह साबित नहीं हुई थीं।" संस्थान ने यह भी साफ़ किया कि निदेशक ने इस्तीफा नहीं दिया है।

आईआईटी बोम्बे के 21 सितंबर को एक बयान में कहा कि साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में हमारे पिछले संदेश में कही गई बातों के लिए हम माफ़ी मांगते हैं।
IIT बॉम्बे में दलित छात्र ने की आत्महत्या; पिता बोले- बेटे पर एक प्रोफेसर करते थे 'जातिसूचक कमेंट्स'

साहिल की मौत के बाद प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला मामले के केंद्र में आ गए। परिवार की शिकायत में उनका नाम है और प्रदर्शनकारी छात्र उनके निलंबन की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर IIT Bombay फेकल्टी फोरम ने 20 सितंबर को दूल्ला के समर्थन में बयान जारी किया। फोरम ने कहा प्रो दूल्ला 18 सितंबर को मिड-सेमेस्टर परीक्षा में निरीक्षक थे और उन्होंने एक छात्र को परीक्षा के दौरान बिना अनुमति स्मार्टफोन रखने और इस्तेमाल करने के मामले में देखा। फोरम का कहना है कि दूल्ला ने संस्थान की सीनेट अनुमत अकादमिक पालिसी के तहत घटना की रिपोर्ट अधिकारियों को की। बयान में कहा कि फोरम प्रो दूल्ला के साथ एकजुटता से खड़ा है और उन्हें लेकर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए जाने से चिंतित है।

इधर IIT Bombay स्टूडेंट्स नाम के हैंडल से एक पोस्ट किया गया जिसमे कुछ स्टूडेंट्स प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के सपोर्ट में आये और कहा कि "हम एनर्जी डिपार्टमेंट के छात्र, साहिल के परिवार और उनके करीबियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। हम प्रोफ़ेसर डूला के साथ खड़े हैं और उन पर लगाए गए झूठे आरोपों को खारिज करते हैं। अगर वे इस्तीफ़ा देते हैं या उन्हें सस्पेंड किया जाता है, तो मीडिया इसे जातिवादी टिप्पणियों की पुष्टि के तौर पर पेश कर सकता है।"मामले में जातिगत भेदभाव के आरोपों के बीच जहां स्टाफ और स्टूडेंट्स का एक वर्ग आरोपी शिक्षक के समर्थन में आकर उनका बचाव कर रहा है वहीं बहुजन चिंतक, एक्टिविस्ट और राजनेता इसे बरसों से शिक्षा में व्याप्त जातिगत मानसिकता से जुड़ा मुद्दा मानते हैं।

यूपीएससी कोचिंग करवाने वाले एजुकेटर अनिल कहते हैं, "इस मामले को 'नॉर्मल सुसाइड' या प्रोफेसर के 'फॉरेन-एजुकेटेड' होने का हवाला देकर डिफेंड करने वाले लोग या तो नासमझ हैं या सिस्टम के पाखंड को छिपा रहे हैं, जातिगत भेदभाव कोई खुली हिंसा नहीं है, बल्कि यह इम्प्लिसिट बायस (अप्रत्यक्ष पूर्वाग्रह) और माइक्रो-अग्रेशंस के जरिए काम करता है...वाइवा में कम मार्क्स देना, लैब स्पेस में आइसोलेट करना या 'कोटा' का ताना मारना। पहली बात इंडियंस विदेश में भी अपनी जाति ले जाते हैं, और अमेरिका के कई शहरों ने तो इंडियंस की समस्या को लेकर एंटी कास्ट लॉ बनाए हैं, और दूसरी बात, प्रोफेसर के विदेश से पढ़कर आने भर से उनकी जातिवादी मानसिकता खत्म नहीं हो जाती; हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड की स्टडीज बताती हैं कि एलीट स्पेसेस में यह बायस सबसे गहरा होता है। इसे महज़ 'अकैडमिक स्ट्रैस' या व्यक्तिगत असफलता बताना इंसटीट्यूशनल मर्डर पर पर्दा डालने जैसा है।"

वे आगे कहते हैं, " प्रो. सुखदेव थोराट कमेटी रिपोर्ट (2007) और UGC के इक्वेलिटी रेगुलेशंस साफ गवाही देते हैं कि प्रीमियर संस्थानों में SC/ST छात्रों के लिए कैंपस कभी सुरक्षित नहीं रहे, और नाममात्र के SC/ST सेल्स के पास कोई वास्तविक अधिकार नहीं होते। जब तक 'मैरिट' के नाम पर हो रहे इस स्ट्रक्चरल डिस्क्रिमिनेशन को स्वीकार नहीं किया जाएगा और रोहित वेमुला जैसे कड़े एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कानून सख्ती से लागू नहीं होंगे, तब तक यह खामोश हिंसा चलती रहेगी। संविधान का अनुच्छेद 15 और 21 हर नागरिक को गरिमा का अधिकार देता है....किसी संस्थान का ब्रांड नेम या डिग्री किसी की इंसानी dignity नहीं छीन सकती।"

नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद कहते हैं, " साहिल वाकोड़े की असामयिक मृत्यु ने देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव, अपमान या किसी भी प्रकार की संस्थागत प्रताड़ना की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। छात्रों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।"

वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के संस्थापक प्रकाश अंबेडकर ने एक पोस्ट में कहा, ""IIT बॉम्बे के फैकल्टी की ओर से तीन महीने तक लगातार जाति-आधारित दुर्व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न का सामना करने के बाद एक दलित छात्र ने आत्महत्या कर ली। शिक्षण संस्थानों में जाति-भेदभाव को गंभीरता से लेने से पहले और कितनी जानें जाएंगी?"

पार्टी के महाराष्ट्र स्टेट प्रेसिडेंट राजेंद्र पाटोडे कहते हैं, "IIT बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दलित-बहुजन छात्रों के खिलाफ़ जातिगत अत्याचारों का सिलसिला चल रहा है; अनिकेत अम्भोरे, दर्शन सोलंकी और अब साहिल वाकोडे की संस्थागत हत्या हुई है। यह सिलसिला संस्थान के भीतर मौजूद जातिगत भेदभाव का ही नतीजा है। इन सभी मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए और जातिगत उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। संस्थान के डीन और डायरेक्टर को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। IIT बॉम्बे में जातिगत भेदभाव के खिलाफ़ एक ठोस और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। जाति के आधार पर भेदभाव, उत्पीड़न और संस्थागत प्रताड़ना को रोकने के लिए राज्य और पूरे देश में 'रोहित वेमुला एक्ट' को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।"

समूचे प्रकरण में दो विरोधाभासी दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। कुछ सार्वजनिक टिप्पणीकारों ने भी दूल्ला के समर्थन में यह तर्क दिया है कि परीक्षा में कथित कदाचार की रिपोर्ट करना शिक्षक की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर छात्र और अम्बेडकरवादी समूह इस बात पर जोर दे रहे हैं कि परीक्षा में कथित चीटिंग और साहिल द्वारा झेले गए कथित लंबे समय के उत्पीडन के आरोपों को एक ही घटना मानकर जांच को सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

मामले में तीन प्रक्रियाएं समानांतर चल रही हैं। मुंबई Crime Branch FIR की जांच कर रही है। आईआईटी बॉम्बे में छात्रों की 18 मांगों पर आगे की प्रक्रिया सोमवार के ओपन हॉउस और बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स की बैठक में तय होगी।

अपडेट: 21 सितंबर दोपहर को IIT बॉम्बे ने एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के डीन प्रोफ़ेसर सूर्यनारायण डूला को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। डायरेक्टर शिरीष बी. केदारे ने छात्रों को ईमेल के ज़रिए बताया कि आगे की कार्रवाई जांच के बाद की जाएगी।

आईआईटी बोम्बे के 21 सितंबर को एक बयान में कहा कि साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में हमारे पिछले संदेश में कही गई बातों के लिए हम माफ़ी मांगते हैं।
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