साहिल वाकोडे की मौत पर IIT-Bombay एडमिन पर APPSC के बड़े आरोप; पुलिस जांच में खुलासा- साहिल ने मांगी थी माफ़ी!

25 दिन से धरना चल रहा धरना: APPSC ने की संस्थान प्रशासन और फैकल्टी फोरम को भंग करने की माँग, AIISCA का 16 अक्टूबर को बड़े प्रदर्शन का एलान
18 सितंबर को IIT बॉम्बे के 22 साल के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत और उसके बाद से पूरा मामला सवालों के घेरे में है। APPSC ने साहिल की मौत को "संस्थागत हत्या" कहा है।
18 सितंबर को IIT बॉम्बे के 22 साल के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत और उसके बाद से पूरा मामला सवालों के घेरे में है। APPSC ने साहिल की मौत को "संस्थागत हत्या" कहा है।इंटरनेट
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मुंबई- आईआईटी बॉम्बे के छात्र समूह अंबेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्कल (APPSC) ने साहिल वाकोडे की मौत के बाद संस्थान प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की है। छात्र समूह ने आरोप लगाया कि प्रशासन लगातार इनकार की मुद्रा में है, प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला के बचाव में हर हद तक गया है और साहिल के माता-पिता के प्रति पहले दिन से "घोर क्रूरता" दिखाता रहा है। समूह के अनुसार, यह निदेशक प्रो. शिरीष केदारे की अगुवाई वाले मौजूदा प्रशासन के "स्पष्ट रूप से जातिवादी रुख" को दिखाता है। APPSC ने प्रशासन, फैकल्टी फोरम और मनोनीत छात्र परिषद को तुरंत भंग करने की माँग की है।

18 सितंबर को IIT बॉम्बे के 22 साल के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत और उसके बाद से पूरा मामला सवालों के घेरे में है। प्रबंधन ने बताया था कि घटना वाले दिन साहिल चीटिंग करते हुए पाया गया था। हालांकि बाद में संस्थान ने प्रकरण में जांच होने से पहले इस जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए माफ़ी मांगी थी। इधर, प्रकरण को लेकर जांच कर रहे क्राइम ब्रांच सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि साहिल ने कथित तौर पर परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने के बाद संस्थान को दिए अपने लिखित बयान में गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, साहिल ने अपने इस बयान में एक और मौका देने की अपील की थी और भरोसा दिलाया था कि वह भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगा।

इधर, अपने बेटे की मौत के बाद उसके लिए न्याय मांगते हुए साहिल के माता- पिता रविंद्र और सोनाली वाकोड़े मुंबई के आजाद मैदान में 12 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

APPSC ने साहिल की मौत को "संस्थागत हत्या" कहा है। बयान के मुताबिक, यह घटना और उसके बाद का घटनाक्रम इस बात की "बेहद शर्मनाक संस्थागत विफलता" का उदाहरण है कि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए जातिवादी कैसे हुआ जाता है। छात्र समूह ने निदेशक और फैकल्टी फोरम की प्रो. दूल्ला के साथ खुली एकजुटता को "घृणित" बताया, जबकि प्रो. दूल्ला के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज है।

छात्र समूह का दावा है कि प्रो. दूल्ला बीते वर्षों में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स भी रहे हैं और छात्रों को धमकाने, गैसलाइटिंग और हेरफेर करने का उनका स्वभाव संस्थान में "खुला सच" है। इसका संकेत देते हुए बयान में कहा गया कि पहले दिन से सैकड़ों छात्र उनके निलंबन की माँग कर रहे हैं।

APPSC के अनुसार, उसे छात्रों की ऐसी गवाहियाँ मिली हैं जिनमें प्रोफेसर ने मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे छात्रों को, या मदद के लिए उनके दफ़्तर पहुँचे छात्रों को धमकाया। समूह ने कहा कि धमकी और डराने की यह संस्कृति उनके डीन कार्यकाल में कई गुना आगे बढ़ी, जिसमें स्टूडेंट जिमखाना में मनोनीत पदों पर बैठे छात्रों को डराना भी शामिल था। समूह का कहना है कि गंभीर आरोपों और एफआईआर के बावजूद ऐसे व्यक्ति का खुला और आत्मविश्वास से समर्थन करने से निदेशक और अन्य संकाय सदस्य कथित जातिवाद में "सहभागी" बन जाते हैं।

छात्र समूह द्वारा जारी एक बयान में प्रशासन, फैकल्टी फोरम और मौजूदा डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. बोधि की अगुवाई वाली छात्र परिषद को पूरे परिसर में "जातिवाद के गुंडों" को खुला छोड़ने और देश के सामने एक मिसाल कायम करने के लिए व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराया गया है। APPSC के मुताबिक, संस्थान समुदाय को जातिवादी आधार पर सक्रिय रूप से ध्रुवीकृत किया गया, जिससे हाशिये के वर्गों के छात्रों के लिए गंभीर खतरा पैदा हुआ।समूह ने याद दिलाया कि आईआईटी बॉम्बे एक सार्वजनिक संस्थान है, जिसे स्वायत्त दर्जा और इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा प्राप्त है।

18 सितंबर को IIT बॉम्बे के 22 साल के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत और उसके बाद से पूरा मामला सवालों के घेरे में है। APPSC ने साहिल की मौत को "संस्थागत हत्या" कहा है।
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साहिल की परीक्षा के बाद क्या हुआ: APPSC का आरोप

APPSC का आरोप है कि साहिल की परीक्षा के बाद, जिसकी जानकारी की जाँच आंतरिक स्तर पर और क्राइम ब्रांच द्वारा अभी जारी है, प्रो. दूल्ला ने अपने "स्वघोषित दबंग और धौंस भरे" रवैये के साथ जज, जूरी और जल्लाद की भूमिका निभाई। समूह का कहना है कि इससे साहिल जैसे प्रतिभाशाली युवा छात्र का हौसला टूटा और अंततः उन्हें खुद की जान लेने के लिए उकसाया गया।

मौत के तुरंत बाद सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतरे और जवाबदेही की माँग की। APPSC ने बताया कि साहिल बीते एक साल में परिसर में चौथे छात्र की मौत हैं। समूह का आरोप है कि इस घटना के पहले दिन से ही आईआईटी बॉम्बे ने "लचर लीपापोती" शुरू कर दी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सवाल

APPSC ने प्रशासन की प्रतिक्रिया के क्रम को इस तरह रखा है:

पहला आधिकारिक संवाद: 19 सितंबर को निदेशक प्रो. शिरीष केदारे के कार्यालय से एक सामान्य ईमेल आया, जिसमें साहिल वाकोडे का नाम तक नहीं था। समूह का कहना है कि सामान्य श्रेणी के छात्रों की पिछली मौतों में ऐसा नहीं हुआ।

आधिकारिक पोस्ट: छात्रों की जवाबदेही की माँग के बाद प्रशासन ने एक पोस्ट जारी की, जिसमें, APPSC के अनुसार, बिना किसी जाँच के साहिल को बदनाम किया गया और उन्हें दोषी ठहराया गया। समूह इसे जाँच में हेरफेर की शुरुआत बताता है।

प्रदर्शनकारियों का उत्पीड़न: समूह के अनुसार, इसके बाद डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रो. बोधि की अगुवाई वाली छात्र परिषद, जो काफ़ी हद तक प्रो. दूल्ला द्वारा मनोनीत थी, ने प्रदर्शनकारी छात्रों का उत्पीड़न किया। आरोप है कि अपने ही छात्रों पर "बेहद घिनौनी ट्रोलिंग, डॉक्सिंग, हैकिंग और हूटिंग" की गई।

फैकल्टी फोरम पर आरोप

APPSC ने कहा कि फैकल्टी फोरम के सदस्य, "शायद उत्तर-औपनिवेशिक इतिहास में पहली बार", किसी विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों के छात्रों के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में सामने आए। समूह के अनुसार, मार्च और प्रो. दूल्ला के समर्थन में जारी बयान से फोरम ने यह दिखाया कि जो भी उनके जातिवाद पर सवाल उठाएगा, उसे वे बर्बाद कर देंगे। उसने कहा कि प्रोफेसर और छात्र में से चुनने की बात आए तो फैकल्टी हमेशा अपनों का साथ देगी।

समूह का आरोप है कि आईआईटी बॉम्बे के जनसंपर्क कार्यालय ने राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया को परिसर के भीतर प्रदर्शनकारियों की असली माँगों और आवाज़ों से भटकाने के लिए अतिरिक्त समय तक काम किया। परिसर में प्रदर्शनकारी अभी भूख हड़ताल के 11वें दिन और धरने के 25वें दिन में हैं।

APPSC के अनुसार, इसका प्रमाण यह है कि प्रो. पंत जैसे संकाय सदस्यों या कुछ छात्रों के लिए दिशानिर्देश लचीले कर दिए जाते हैं, जबकि प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए मीडिया से बात करना या प्रेस कॉन्फ्रेंस करना मना है।

18 सितंबर को IIT बॉम्बे के 22 साल के स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत और उसके बाद से पूरा मामला सवालों के घेरे में है। APPSC ने साहिल की मौत को "संस्थागत हत्या" कहा है।
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बयान में 5 अक्टूबर की घटना का भी ज़िक्र है, जब एक "सम्मानित अतिथि" और पूर्व आईएएस अधिकारी ने, APPSC के अनुसार, दलित गरिमा के प्रतीक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के प्रति जातिवादी नफ़रत उगली। समूह के अनुसार, यह जस्टिस कॉर्नर के प्रदर्शन के संदर्भ में कहा गया। उसने कहा कि इसके बाद भी एससी/एसटी सेल ने इस अपराध का कोई संज्ञान नहीं लिया। APPSC का आरोप है कि प्रशासन जातिवादी ताकतों को बढ़ावा दे रहा है और परिसर में जाति-विरोधी संघर्ष की राह में पूरी तरह रोड़ा बना है।

परिसर का माहौल

बयान के मुताबिक, सोशल मीडिया, हॉस्टल मेस और खेल के मैदानों में बातचीत दमनकारी हो गई है। समूह का कहना है कि आरक्षण-विरोधी और श्रेणी-विरोधी भावनाओं में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है और कभी-कभी खुलेआम जातिसूचक अपशब्द भी कहे जाते हैं। APPSC ने इसके लिए मौजूदा प्रशासन को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उसके रवैये की कड़ी निंदा की और कहा, "उनके अपराध अक्षम्य हैं।"

"सामान्य स्थिति की वापसी" पर चेतावनी

APPSC ने कहा कि साहिल के मामले से ही दिखता है कि "इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंस" और "इंस्टिट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस" कहे जाने वाले इस संस्थान में स्थापना से ही सभी निकायों में तत्काल बदलाव लंबित हैं। समूह के अनुसार, "सामान्य स्थिति की वापसी" का कोई भी अन्य रूप परिसर में व्याप्त जातिवाद के प्रति "आपराधिक लापरवाही" होगा। बयान में एससी/एसटी सेल के "रीढ़विहीन" अस्तित्व पर तरस जताया गया, जिसके पास मौजूदा हालात में एससी/एसटी छात्रों के साथ खड़े होने का भी अपना अधिदेश नहीं है।

APPSC ने माँग की है कि आईआईटी बॉम्बे का प्रशासन, फैकल्टी फोरम और मनोनीत छात्र परिषद तुरंत भंग किए जाएँ। समूह के अनुसार, इन्हें सबसे पहले एक खुले सदन में, फिर एक बाहरी जाँच समिति के सामने और अंततः अदालत में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

पुलिस जांच में आया अपडेट

इधर मुम्बई क्राइम ब्रांच द्वारा प्रकरण को लेकर चल रही जांच में कुछ अपडेट आया है। पुलिस सूत्रों ने बताया है कि नकल करते पकड़े जाने के बाद IIT बॉम्बे को दिए गए एक लिखित बयान में साहिल ने माना कि उससे गलती हुई है, लेकिन उसने वादा किया है कि वह इसे दोबारा नहीं करेगा, साथ ही उसने एक मौका देने की रिक्वेस्ट की है। पुलिस सूत्रों ने बताया है कि साहिल ने यह भी कहा कि उसने एग्जाम की अच्छी तैयारी नहीं की थी, इसलिए उसे यह कदम उठाना पड़ा।

कहा गया कि पुलिस इस बयान के आधार पर डिटेल में जांच कर रही है। इस बीच, साहिल वाकोडे के नकल करते पकड़े जाने के बाद, उसने तुरंत अपने एक दोस्त से बात की, जिसमें उसने कहा कि उसका 'थर्मोडायनामिक्स थ्योरी' का पेपर अच्छा नहीं गया था, जिसके कारण वह परेशान था क्योंकि वह अच्छे मार्क्स लाना चाहता था। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि उसने बातचीत के दौरान अपनी गर्लफ्रेंड को बताया था कि वह एग्जाम के दौरान नकल करते हुए पकड़ा गया था। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान IIT बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे का बयान भी दर्ज किया गया है। इसके अलावा, मामले से जुड़े 20 से अधिक लोगों के बयान लिए जा चुके हैं. इनमें 12 छात्र भी शामिल हैं।

इधर, ऑल इंडिया इंडिपेंडेंट शेड्यूल्ड कास्ट्स एसोसिएशन (AIISCA) भी साहिल वाकोडे मामले में प्रदर्शन कर रही है। संगठन के सदस्य साहिल के माता पिता के साथ कई दिनों से प्रोटेस्ट में शामिल हैं। संगठन की महासचिव दीपाली सालवे ने बताया कि AIISCA ने सभी नागरिक समाज संगठनों, आंबेडकरवादियों, समुदाय के सदस्यों, राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और न्यायप्रिय नागरिकों से अपील की है कि वे मुंबई के आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे साहिल वाकोडे के माता-पिता के साथ एकजुटता दिखाएँ। यह प्रदर्शन 16 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे से आज़ाद मैदान, मुंबई में होगा। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सोमवार को जब वे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, तो देखा कि वहां सभी पोस्टर हटा दिए गए थे। यहाँ तक कि मुख्य पोस्टर, जिस पर "मनुवाद की छाती पर बिरसा, फुले, आंबेडकर" का नारा लिखा था, उसे भी उतार दिया गया था।

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IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद छात्र क्यों नहीं थम रहे, APPSC ने बताई पूरी कहानी!

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