
जूनागढ़- जिले के विसावदर तालुका के भूतड़ी गांव में भगवान राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान दलित समुदाय के सदस्यों के साथ कथित भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार का मामला सामने आया है।
आयोजन समिति ने करीब दस लोगों को को कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, लेकिन उनके साथ शर्त रखी गई कि वे दूसरों के खाने के बाद आएं, अपना खाना अलग से खाएं और मंदिर के अंदर प्रवेश न करें। साथ ही उन्हें घर से अपनी थाली, कटोरी (प्लेट और वाटका) तथा पीने का पानी खुद लाने को कहा गया। दलित समुदाय के सदस्यों का आरोप है कि उनके लिए अलग से भोजन और पानी की व्यवस्था की गई थी जो साफ़ छुआछूत जैसा व्यवहार और जातिगत अपमान का मामला है और इसलिए आहत लोगों ने कार्यक्रम में शरीक नहीं होने का फैसला किया किया।
25 वर्षीय अजय चतुर बोरिचा ने विसावदर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार 27 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे आयोजन समिति के पांच सदस्य उनके मोहल्ले में आए और वहां बैठे अनुसूचित जाति के करीब 10 सदस्यों को मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए बुलाया। उसी समय उन्होंने यह शर्त भी रख दी कि वे दूसरे जाति के लोगों के खाने के बाद आएं और अपने साथ प्लेट-कटोरी साथ लाएं। दलित समुदाय ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया. इस वजह से गांव में प्रस्तावित सामूहिक भोज रद्द कर दिया गया. हालांकि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 29 अप्रैल शाम को संपन्न हो गयी.
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने पांच लोगों बाबू उका हापानी, नरेंद्र भानजी सिरोया, रामनिक समजी सोरठिया, अतुल भिखा सिरोया और फूला पोपट सिरोया के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं 3(1)(r), 3(1)(za)A, 3(1)(za)C के साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(2) और 54 के तहत मामला दर्ज किया है।
विसावदर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के बाद जांच शुरू कर दी गई है। जांच जूनागढ़ एससी/एसटी सेल के डीएसपी रविराजसिंह परमार को सौंपी गई है। पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा किया है, गवाहों के बयान दर्ज किए हैं और आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
पीड़ित दलित परिवारों ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
गुजरात में पिछले कुछ महीनों में दलित समुदाय के खिलाफ जाति-आधारित भेदभाव, छुआछूत और हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन मामलों में मंदिर प्रवेश पर रोक, सामाजिक बहिष्कार, शादी के घोड़े पर सवार होने पर हमला और दैनिक जीवन में छुआछूत जैसी घटनाएं शामिल हैं।
हाल ही अमरेली जिले से सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया जिसमे शांताबा जनरल होस्पीटल में अपने बुजुर्ग चाचा के इलाज के लिए आए एक 24 साल के युवक महेश प्रेमजी राठौड़ को अस्पताल परिसर में चल रही मुफ्त भोजनशाला में बचा हुआ भोजन फेंकने पर प्लास्टिक के पाइपों से पीट पीटकर मार दिया।
इसी वर्ष मार्च में साबरकांठा जिले के एक गांव के दलित उप-सरपंच ने आठ लोगों के खिलाफ पुलिस में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। विवाद की जड़ गांव के एक पुराने और जर्जर पक्षी दाना मीनार (चबूतरे) को हटाने का पंचायत का फैसला बताया जा रहा है। आरोप है कि इसी मुद्दे पर बुलाई गई एक बैठक में इन लोगों ने उप-सरपंच को धमकाया और उनके खिलाफ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया।
इसी तरह फरवरी में पाटन के चंद्रूमाना गाँव में दलित दूल्हे के घोड़ी पर चढ़ने से जातिवादी मानसिकता के लोगों ने हाथों में तलवारें लिए कथित तौर पर गुंडागर्दी शुरू कर दी। उन्होंने न केवल दूल्हे को धमकाया, बल्कि बारात में शामिल लोगों के साथ मारपीट भी की।
इस वर्ष जनवरी में पाटन जिले के संतलपुर तहसील के पिपराला गांव में एक 26 वर्षीय दलित मजदूर तुलसी सोलंकी पर जातिगत हिंसा का शिकार होने का मामला सामने आया है। सोलंकी ने एक व्यक्ति को अपना चश्मा उधार न देने पर तीन लोगों ने उन पर लाठियों, मुट्ठियों और लातों से हमला किया, साथ ही जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी।
2025 में महिसागर जिले में एक गांव में गरबा कार्यक्रम के दौरान एक दलित महिला के साथ मौखिक और शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार करने के आरोप में चार महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पीड़िता ने वीरपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक दोस्त के साथ पारंपरिक नृत्य समारोह में भाग लेने की कोशिश करने के बाद उसे जाति आधारित दुर्व्यवहार और शारीरिक हमले का शिकार होना पड़ा।
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