गुजरात: जर्जर चबूतरा हटाने पर विवाद, दलित उप-सरपंच को जातिसूचक गालियां देने पर 8 के खिलाफ FIR

साबरकांठा के मेमदपुर गांव में पंचायत के फैसले पर बवाल; जर्जर चबूतरा हटाने गए दलित उप-सरपंच से हाथापाई, 8 लोगों पर SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज।
Dalit Deputy Sarpanch Casteist Slurs in Gujarat.
गुजरात के साबरकांठा में जर्जर चबूतरा हटाने पर विवाद। दलित उप-सरपंच को धमकाने और जातिसूचक गालियां देने पर 8 लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट में FIR दर्ज।(Ai Image)
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साबरकांठा: गुजरात के साबरकांठा जिले से जातिगत भेदभाव और जबरन मनमानी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गांव के दलित उप-सरपंच ने आठ लोगों के खिलाफ पुलिस में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। विवाद की जड़ गांव के एक पुराने और जर्जर पक्षी दाना मीनार (चबूतरे) को हटाने का पंचायत का फैसला बताया जा रहा है। आरोप है कि इसी मुद्दे पर बुलाई गई एक बैठक में इन लोगों ने उप-सरपंच को धमकाया और उनके खिलाफ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

प्रांतिज तहसील के मेमदपुर गांव का है मामला

यह पूरी घटना प्रांतिज तहसील के मेमदपुर गांव की है और पुलिस में इसकी रिपोर्ट 26 फरवरी को दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता दलित उप-सरपंच का नाम कांजीभाई अरखाभाई है। अपनी शिकायत में कांजीभाई ने गांव के ही आठ लोगों को नामजद किया है। पुलिस ने जिन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनकी पहचान अतुलसिंह परमार, रमेशजी चौहान, हिम्मतसिंह परमार, मनहरसिंह परमार, पिंटूसिंह परमार, उदयसिंह परमार, हाथीसिंह परमार और अनिरुद्धसिंह परमार के रूप में हुई है।

क्या है पूरा विवाद?

प्रांतिज पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, पेशे से किसान कांजीभाई पिछले छह महीनों से मेमदपुर गांव के उप-सरपंच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि ग्राम पंचायत ने गांव में स्थित एक जर्जर पक्षी दाना मीनार (चबूतरे) को किसी संभावित हादसे से बचने के लिए गिराने का प्रस्ताव पारित किया था।

इसी सिलसिले में 25 फरवरी को वह कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ उस जगह का मुआयना करने गए थे। तभी वहां मौजूद कुछ आरोपियों ने यह कहते हुए विरोध शुरू कर दिया कि यह चबूतरा उनके पूर्वजों ने बनवाया था, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर तोड़ा नहीं जाना चाहिए।

रात 8:30 बजे की बैठक में हुई बदसलूकी

विवाद बढ़ता देख उप-सरपंच और अन्य लोगों ने समझदारी दिखाते हुए तय किया कि इस मुद्दे पर रात में ग्रामीणों के साथ बैठक कर शांतिपूर्ण हल निकाला जाएगा। उसी रात करीब 8:30 बजे जब गांव के वरिष्ठ लोगों की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई, तो एक आरोपी ने फिर से वही बात दोहराई कि वे इस चबूतरे को खुद गिराएंगे और उसकी जगह एक नया बनवाएंगे।

कांजीभाई का आरोप है कि इसी बातचीत के दौरान कुछ आरोपियों ने सीधे तौर पर उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने उप-सरपंच को जातिसूचक गालियां दीं और आरोप लगाया कि चबूतरा गिराने में केवल उनकी (उप-सरपंच की) ही व्यक्तिगत दिलचस्पी है।

हाथापाई और धमकी के बाद केस दर्ज

इस तीखी कहासुनी के बाद मौके पर हाथापाई की नौबत आ गई। आरोपियों ने चबूतरा गिराने को लेकर उप-सरपंच व अन्य लोगों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं। घटना के बाद उप-सरपंच की तहरीर पर पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी आठों आरोपियों के खिलाफ 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) और 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।

इस मामले की जांच कर रहे पुलिस उपाधीक्षक (DSP) ए. के. पटेल ने बताया कि फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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