
हैदराबाद- तेलंगाना में बाबा साहब डॉ. बी.आर. अंबेडकर को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हैदराबाद के हिंदुत्व कार्यकर्ता और राष्ट्रीय दलित सेना से जुड़े नागुलारापु वर प्रसाद, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘हमारा प्रसाद’ के नाम से जाना जाता है, ने अपनी आगामी तेलुगु किताब ‘काल्पित नायकुडु’ (Kalpitha Nayakudu) का कवर सार्वजनिक किया है। किताब के कवर पर अंग्रेजी में इसका अर्थ ‘The Fabricated Leader’ यानी ‘गढ़ा हुआ/काल्पनिक नेता’ बताया गया है।
करीब 730 पन्नों की इस किताब को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद तेज हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किताब के कवर और उससे जुड़े पोस्ट में डॉ. अंबेडकर की विरासत को कथित तौर पर ‘राष्ट्र-विरोधी’, ‘हिंदू-विरोधी’ विचारों और अलगाववाद के संदर्भ में देखने का दावा किया गया है। किताब के एक अन्य प्रचार पोस्ट में लेखक ने व्यक्तिपूजा को ‘तथ्यों’ के जरिए चुनौती देने और देश का ‘वास्तविक इतिहास’ सामने रखने की बात कही है। किताब 18 सितंबर से बिक्री के लिए उपलब्ध होने की घोषणा की गई है।
यही वजह है कि यह मामला केवल एक किताब के प्रकाशन तक सीमित नहीं रहा। इसकी चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि इसी व्यक्ति को 2023 में डॉ. अंबेडकर को लेकर दिए गए एक बेहद विवादित बयान के बाद हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब तीन साल बाद अंबेडकर को केंद्र में रखकर नई किताब की घोषणा ने पुराने विवाद को फिर सामने ला दिया है।
हमारा प्रसाद ने सोशल मीडिया पर किताब का अंतिम कवर साझा किया। कवर पर ‘Kalpitha Nayakudu’ शीर्षक के साथ अंग्रेजी में ‘The Fabricated Leader’ लिखा है जिसके अनुसार बाबा साहब को एक काल्पनिक नेता के रूप में विवेचित किया गया है। सूत्रों के अनुसार किताब में अंबेडकर के राजनीतिक और सामाजिक योगदान की आलोचनात्मक समीक्षा करने का दावा किया गया है और उनके विचारों को ‘एंटी-नेशनल’ तथा ‘एंटी-Hindu’ नजरिए और अलगाववाद से जोड़कर देखने की बात कही गई है।
किताब से जुड़े एक पोस्ट में लेखक की ओर से यह भी कहा गया कि वह ‘पर्सनैलिटी कल्ट’ को तथ्यों के जरिए चुनौती देना चाहते हैं और देश का ‘वास्तविक इतिहास’ प्रस्तुत करना चाहते हैं। हालांकि, किताब अभी सार्वजनिक रूप से बिक्री में नहीं आई है, इसलिए उसके पूरे 730 पन्नों की स्वतंत्र समीक्षा के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि पुस्तक के अंदर अंबेडकर के बारे में प्रत्येक अध्याय में क्या लिखा गया है।
विवाद का केंद्र फिलहाल किताब का शीर्षक, उसका सार्वजनिक प्रचार और सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री है।
हमारा प्रसाद का नाम पहली बार 2023 में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। फरवरी 2023 में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह हाथ में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की किताब ‘Riddles in Hinduism’ लिए नजर आए थे।
वीडियो में उन्होंने अंबेडकर की किताब पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर वह अंबेडकर के समय में होते और उनके हाथ यह किताब लगती, तो वह महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे की तरह अंबेडकर को गोली मार देते। इस बयान के बाद तेलंगाना में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।
मामला बढ़ने के बाद हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने फरवरी 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, FIR संख्या 256/2023 दर्ज की गई थी और उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A और 505(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने उस समय कहा था कि मामला अंबेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वीडियो प्रसारित करने से जुड़ा था।
‘Riddles in Hinduism: An Exposition to Enlighten the Masses’ डॉ. अंबेडकर की एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है, जिसमें उन्होंने हिंदू धर्म, ब्राह्मणवादी धर्मशास्त्र, धार्मिक मान्यताओं और जाति व्यवस्था सहित कई विषयों पर सवाल उठाए।
यह पुस्तक अंबेडकर के जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हुई थी। बाद में महाराष्ट्र सरकार ने इसे 1987 में ‘Dr. Babasaheb Ambedkar: Writings and Speeches’ श्रृंखला के हिस्से के रूप में प्रकाशित किया।
किताब के उद्देश्य को समझने के लिए अंबेडकर की अपनी प्रस्तावना महत्वपूर्ण है। उसमें उन्होंने इसे हिंदू समाज में प्रचलित धार्मिक मान्यताओं और ब्राह्मणवादी धर्मशास्त्र की आलोचनात्मक पड़ताल के रूप में प्रस्तुत किया था। पुस्तक का उद्देश्य लोगों को तर्क के आधार पर धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करना था।
यही किताब 2023 में हमारा प्रसाद के बयान का संदर्भ बनी थी।
भारत राष्ट्र समिति के आर.एस. प्रवीण कुमार ने हमारा प्रसाद के विरुद्ध कानूनी कारवाई करने और बुक रिलीज को रोकने की मांग की है. कुमार ने कहा, " हमारा प्रसाद नाम का एक RSS सदस्य सोशल मीडिया पर ज़ोर-शोर से प्रचार कर रहा है कि वह जल्द ही "इमेजिनरी लीडर" (Imaginary Leader) नाम की एक किताब जारी करने वाला है, जिसमें भारतीय संविधान के निर्माता और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. बी.आर. अंबेडकर की कड़ी आलोचना की गई है। इससे पहले भी वह विवादित बयान दे चुका है; उसने कहा था कि अगर अंबेडकर ज़िंदा होते तो वह उन्हें गोली मार देता, और इस वजह से वह जेल भी जा चुका है। "
"अगर यह विवादित किताब जारी होती है, तो इससे लाखों गरीब लोगों की भावनाएं आहत होंगी। राज्य में हालात विस्फोटक हो सकते हैं। लेखक की सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं होगी। यह हैरानी की बात है कि साइबर सुरक्षा पुलिस, जो हर दिन विपक्षी दलों पर पैनी नज़र रखती है, इस मामले से अनजान है। तेलंगाना पुलिस से मेरा अनुरोध है कि इस व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और बाबासाहेब अंबेडकर के खिलाफ ज़हर फैलाने में RSS की भूमिका की जांच की जाए। मेरी मांग है कि शांति और सुरक्षा को बिगाड़ने वाले इस हमारा प्रसाद को तुरंत राज्य से बाहर निकाला जाए।"
हैदराबाद के अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. बी. कार्तिक नवायन ने हमारा प्रसाद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर ऑनलाइन कैंपेन शुरू किया है जो लोगों का सपोर्ट हासिल कर रहा है।
द मूकनायक से बातचीत में नवायन ने कहा कि, " डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर भारत के संविधान के मुख्य निर्माता, भारत रत्न से सम्मानित और समानता, भाईचारे और कानून के शासन के राष्ट्रीय प्रतीक हैं। अनुसूचित जातियों सहित नागरिकों का एक बड़ा वर्ग उनकी याद और उनके लेखन का सम्मान करता है। आरोपी फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से प्रचार कर रहा है कि वह "झूठे नेता डॉ. अंबेडकर" / "कल्पित नायकडु" / "द फैब्रिकेटेड लीडर" (बनावटी नेता) शीर्षक वाली एक किताब प्रकाशित करेगा। वह इस शीर्षक और इससे जुड़ी सामग्री को फैलाने की कोशिश कर रहा है। इसमें 20 अगस्त के आसपास की ऐसी पोस्ट भी शामिल हैं जिनमें उन लोगों का धन्यवाद किया गया है जिन्होंने "द फैब्रिकेटेड लीडर" और "आबद्थपु पुनादुलपई निर्मिंचबडिना नायकडु" जैसे वाक्यांश सुझाए थे और लोगों से इस सामग्री को बड़े पैमाने पर साझा करने के लिए कहा गया था।"
नवायन ने कहा," भारतीय संविधान के जनक को "काल्पनिक नेता" कहना कोई अकादमिक आलोचना नहीं है। यह जनता की नज़र में उनकी छवि खराब करने, उनसे जुड़ाव महसूस करने वाले समुदायों की गरिमा को ठेस पहुँचाने और टकराव भड़काने के इरादे से किया गया एक सोझा-समझा सार्वजनिक आरोप है। जब ऐसी सामग्री को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर फैलाया जाता है, तो इससे डर, घबराहट, जातिगत ध्रुवीकरण और सार्वजनिक शांति भंग होने की पूरी संभावना होती है।"
30 अगस्त को नवायन ने हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस के स्टेशन हाउस ऑफिसर को लिखित शिकायत दी। इसकी प्रतियां हैदराबाद, साइबराबाद और राचकोंडा पुलिस आयुक्तों तथा तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई हैं। शिकायत में BNSS की धारा 173 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
शिकायत में नागुलारापु वर प्रसाद उर्फ हमारा प्रसाद को आरोपी बताते हुए कहा गया है कि वह ‘False Leader Dr Ambedkar / Kalpitha Nayakudu (The Fabricated Leader)’ नाम से किताब के प्रचार और सोशल मीडिया पोस्ट कर रहे हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इन पोस्टों का उद्देश्य सामाजिक वैमनस्य, सार्वजनिक अशांति और अंबेडकर को मानने वाले समुदायों की भावनाओं को चोट पहुंचाना हो सकता है।
नवायन ने अपनी शिकायत में 2023 की घटना को भी आपराधिक पृष्ठभूमि के तौर पर सामने रखा है। शिकायत के मुताबिक, फरवरी 2023 में वायरल वीडियो के बाद हमारा प्रसाद को हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने गिरफ्तार किया था और FIR 256/2023 में IPC की धारा 153-A और 505(2) लगाई गई थी।
नवायन ने शिकायत में सोशल मीडिया पोस्ट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और प्रकाशन सामग्री को सुरक्षित करने तथा कानून के अनुसार गिरफ्तारी और जरूरत पड़ने पर मजिस्ट्रेट के सामने रिमांड की मांग भी की है।
उन्होंने तेलंगाना के Prevention of Dangerous Activities Act, 1986 (PD Act) के तहत भी कार्रवाई पर विचार करने का अनुरोध किया है। शिकायत में तर्क दिया गया है कि आरोपी के खिलाफ 2023 में इसी तरह के मामले में कार्रवाई हो चुकी है और नए किताब को देखते हुए दोबारा ऐसी गतिविधि की आशंका है।
नवायन ने अलग से Change.org पर ऑनलाइन याचिका भी शुरू की है।
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