“कभी लगता था इस निजाम से लड़ना नामुमकिन है, आज लगता है जीता भी जा सकता है…": आइसा अध्यक्ष नेहा

आरक्षण हटाने के सोशल मीडिया कैंपेन पर नेहा कहती हैं कि आरक्षण हटाने की मांग करने से पहले उसे सही तरीके से लागू करने की जरूरत है।
CJP आंदोलन में जेन-Z की जीत के बाद नेहा का यह बयान युवा संघर्ष की नई चेतना को रेखांकित करता है। उन्होंने साफ कहा कि अब लड़ना सिर्फ निराशा नहीं, इतिहास दर्ज करने और आगे बढ़ने का जरिया है।
CJP आंदोलन में जेन-Z की जीत के बाद नेहा का यह बयान युवा संघर्ष की नई चेतना को रेखांकित करता है। उन्होंने साफ कहा कि अब लड़ना सिर्फ निराशा नहीं, इतिहास दर्ज करने और आगे बढ़ने का जरिया है।
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नई दिल्ली- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर चले ऐतिहासिक युवा आंदोलन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद स्टूडेंट लीडर नेहा बोरा ने करवां-ए-मोहब्बत द्वारा हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि युवा आंदोलन ने निराशा को उम्मीद में बदल दिया है।

डॉक्टरेट की छात्रा नेहा बोरा, 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की अध्यक्ष हैं। यह संगठन 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन)' से जुड़ा है। जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान, जिनके कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था, बोरा ने AISA के अन्य कार्यकर्ताओं और लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक के साथ मिलकर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की।

नेहा ने कहा, “कभी लगता था कि इस निजाम से लड़ना नामुमकिन है। आज लगता है, जीता भी जा सकता है। इस उम्मीद को संभाल कर रखना होगा।” उन्होंने विस्तार से बताया कि आंदोलन से पहले ऐसा लगने लगा था कि जुल्म ऐसे ही बढ़ता रहेगा और लोगों की किस्मत यही होगी कि वे इसे सहते रहें। लेकिन अब रूपक बदल गए हैं। अब यह साफ है कि फासीवादी ताकतों से लड़ा जा सकता है और जीता जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आगे आने वाले सालों में बार-बार इस उम्मीद को याद करना होगा ताकि आने वाली लड़ाइयों को जीता जा सके और उस हिंदुस्तान को फिर से जिंदा किया जा सके जिसकी कल्पना सबके सपनों और संघर्षों का हिस्सा है।

जंतर-मंतर पर CJP आंदोलन के दौरान नेहा समेत आइसा के सदस्य नेहा, आमीन अमितोज और मनीष कुमार 28 जून से 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे थे। 20 जुलाई को सांसदों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और हस्तियों के प्रतिनिधिमंडल के आग्रह पर उन्होंने अनशन तोड़ा। इस प्रतिनिधिमंडल में शबाना आजमी, प्रकाश राज, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और मनोज झा जैसे लोग शामिल थे। शबाना आजमी ने नेहा से मुलाकात की, उन्हें जूस पिलाकर अनशन तोड़ने में भागीदारी निभाई और समर्थन व्यक्त किया।

नेहा ने हाल ही में अपने एक्स अकाउंट पर हैकिंग और दबाने की कोशिशों का जिक्र करते हुए लिखा, “कोशिश तुम्हारी जारी है पर GenZ तुम पर भारी है!

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आरक्षण हटाने (Reservation Hatao) के सोशल मीडिया कैंपेन पर द हिंदू से बात करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि आरक्षण हटाने की मांग करने से पहले उसे सही तरीके से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में आरक्षित सीटें खाली पड़ी रहती हैं, फैकल्टी पदों पर एससी-एसटी-ओबीसी समुदायों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है और कई जगहों पर आरक्षित पद भर ही नहीं पाते। नेहा ने कहा कि असली संकट यही है कि आरक्षण की नीति का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा, जबकि आरक्षण हटाने का शोर मचाया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि खाली आरक्षित सीटें, अधूरे फैकल्टी पद और एससी-एसटी-ओबीसी की लगातार कम भागीदारी ही उच्च शिक्षा का असली संकट उजागर करती है। सेन्ट्रल और स्टेट युनिवरसिटीज में कुलपतियों के पदों पर अजा,जजा और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व ही नहीं है।

CJP आंदोलन में जेन-Z की जीत के बाद नेहा का यह बयान युवा संघर्ष की नई चेतना को रेखांकित करता है। उन्होंने साफ कहा कि अब लड़ना सिर्फ निराशा नहीं, इतिहास दर्ज करने और आगे बढ़ने का जरिया है।
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