22 दिनों से कर रही अनशन, अब कोमा में जाने का भय: मिलिए नेहा बोरा से जिनके जंतर-मंतर पर हौसले हैं बुलंद

नेहा बोरा ने छात्रों के मुद्दों पर लंबे समय से सतत संघर्ष किया है। फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति, सार्वजनिक शिक्षा की कमी और परीक्षा घोटालों जैसे मुद्दों पर उन्होंने कई प्रदर्शन किए।
नेहा ने रविवार को कहा कि सुबह से दिल्ली पुलिस तीन बार भूख हड़तालियों को डिटेन करने की कोशिश कर चुकी है। हर कोशिश के बावजूद जंतर मंतर पर लोग भूख हड़तालियों के समर्थन में डटे हुए हैं।
नेहा ने रविवार को कहा कि सुबह से दिल्ली पुलिस तीन बार भूख हड़तालियों को डिटेन करने की कोशिश कर चुकी है। हर कोशिश के बावजूद जंतर मंतर पर लोग भूख हड़तालियों के समर्थन में डटे हुए हैं।
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नई दिल्ली- जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पेपर लीक मामलों को लेकर चल रहे आंदोलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा 22 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। उनके स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होती जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार ब्लड शुगर लेवल बेहद कम हो गया है और कोमा में जाने या जान जाने का खतरा मंडरा रहा है। फिर भी नेहा अनशन जारी रखे हुए हैं।

नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में पीएचडी की तीसरी वर्ष की छात्रा हैं। वे उत्तराखंड से हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और अम्बेडकर विश्वविद्यालय से एमए किया है। नेहा थिएटर आर्टिस्ट और छात्र कार्यकर्ता के रूप में भी जानी जाती हैं। AISA जो सीपीआई (एमएल) लिबरेशन की छात्र इकाई है, की वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने 2021 से ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुए पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को लगातार उठाया है।

जून में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान AISA कार्यकर्ताओं ने अलग मंच से अनशन शुरू किया। नेहा के साथ मनीष (AISA उत्तर प्रदेश अध्यक्ष, इलाहाबाद विश्वविद्यालय पीएचडी छात्र) और आमीन अमितोज जैसे अन्य कार्यकर्ता भी शामिल रहे। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, NTA को खत्म करने, परीक्षाओं के विकेंद्रीकरण और छात्र आत्महत्याओं जैसी समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की। नेहा का कहना है कि यह आंदोलन नया नहीं है, बल्कि 2021 से चल रही लड़ाई का हिस्सा है।

नेहा बोरा की तारीफ इसलिए हो रही है क्योंकि उन्होंने छात्रों के मुद्दों पर लंबे समय से सतत संघर्ष किया है। फीस वृद्धि, छात्रवृत्ति, सार्वजनिक शिक्षा की कमी और परीक्षा घोटालों जैसे मुद्दों पर उन्होंने कई प्रदर्शन किए। जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों को संवाद का रास्ता नहीं छोड़ा, इसलिए शरीर को सजा देनी पड़ रही है। उनके साहस, प्रतिबद्धता और युवा नेतृत्व को छात्र समुदाय और समर्थक सराह रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें Gen Z की मजबूत आवाज बताया।

AISA के अनुसार अनशन के दौरान नेहा और अन्य कार्यकर्ताओं की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ी। कुछ साथी अस्पताल पहुंचे, लेकिन नेहा, मनीष और आमीन अनशन पर डटे रहे। 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद भी नेहा ने अनशन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि एक को अस्पताल भेजने से संघर्ष कमजोर नहीं होगा।

नेहा बोरा जैसे युवा कार्यकर्ताओं का योगदान इस लड़ाई को मजबूती दे रहा है। सभी अनशनकारियों के स्वास्थ्य की चिंता बनी हुई है और उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीर संवाद करेगी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

नेहा ने रविवार को कहा कि सुबह से दिल्ली पुलिस तीन बार भूख हड़तालियों को डिटेन करने की कोशिश कर चुकी है। हर कोशिश के बावजूद जंतर मंतर पर लोग भूख हड़तालियों के समर्थन में डटे हुए हैं।
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नेहा ने रविवार को कहा कि सुबह से दिल्ली पुलिस तीन बार भूख हड़तालियों को डिटेन करने की कोशिश कर चुकी है। हर कोशिश के बावजूद जंतर मंतर पर लोग भूख हड़तालियों के समर्थन में डटे हुए हैं।
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