
नोएडा पुलिस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने के आरोप में 25 वर्षीय रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की है। मामला दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है।
रुचिका सिंह लगभग 25 साल की हैं। पुलिस और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वे नोएडा के सेक्टर 168 (लोटस ज़िंग सोसाइटी) में फ्लैट की मालिक हैं, लेकिन वर्तमान में परिवार के साथ फरीदाबाद के ऊंचा गांव में रहती हैं। उनका नोएडा वाला फ्लैट पिछले कुछ समय से बंद पड़ा है। वे एक सैलून में काम करती हैं। सोशल मीडिया और परिचितों से मिली जानकारी के आधार पर उनकी पहचान की गई।
23 जुलाई को जंतर-मंतर पर CJP के पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते दिखाया गया। कुछ रिपोर्ट्स में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का भी अपमानजनक जिक्र बताया गया है। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर फैलने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायतकर्ता गाजियाबाद की सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता स्मृति सिंह हैं। उन्होंने शिकायत में कहा कि रुचिका सिंह ने सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया और यह कृत्य नफरत फैलाने तथा सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से किया गया।
29-30 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो FIR दर्ज की गई। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (जानबूझकर अपमान जिससे शांति भंग हो), 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव भड़काने वाले बयान) और 356(1) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज हुआ। चूंकि घटना दिल्ली में हुई थी, इसलिए केस दिल्ली पुलिस (पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना) को ट्रांसफर कर दिया गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज FIR पर कहा, “ देश में गाली देना कब से अपराध हो गया? रुचिका सिंह के खिलाफ पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है। गाली-गलौज (अभद्र भाषा) अपने आप में आपराधिक मामला नहीं बनता। लोकसभा के 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें करीब 100 सांसद भाजपा के हैं। पुलिस अपनी ऊर्जा उन पर लगाए, न कि एक 25 साल की युवती के पीछे। युवाओं का उत्पीड़न तुरंत बंद होना चाहिए!”
सौरव दास ने एएनआई से बातचीत में कहा, “प्रदर्शन के दौरान किसी ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया हो तो उसकी निंदा की जा सकती है। लेकिन पुलिस के जरिए आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल करके किसी को निशाना बनाना और परेशान करना बिल्कुल जायज नहीं है। इस देश में अभद्र भाषा इस्तेमाल करना कब से आपराधिक अपराध बन गया? लोग रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते ही रहते हैं। लोकसभा के 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक आरोप हैं, जिनमें बलात्कार, हत्या और डकैती जैसे गंभीर मामले भी शामिल हैं, फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। आप सिर्फ इन्हें चुनकर उदाहरण बनाना चाहते हैं। यह पूरी तरह निंदनीय है।
मैं एक बार फिर सरकार और उसकी पुलिस मशीनरी से अपील करता हूं कि युवाओं को परेशान करना बंद करें। युवाओं को इस तरह निशाना बनाना बंद करें और इस लड़की को छोड़ दें। इस तरह के मामलों में पुलिस फोर्स का दुरुपयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है।”
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