
गाजियाबाद। दलित कंटेंट क्रिएटर 14 वर्षीय निशु आजाद और उनके परिवार की मुश्किलें स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद भी कम होती नजर नहीं आ रही हैं। ऑनलाइन ट्रोलिंग, घर पर पथराव और कथित रेप थ्रेट के बीच निशु ने अब आरोप लगाया है कि जिस सोसाइटी में उनका परिवार किराये के मकान में रह रहा है, वहां भी परिवार पर मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। निशु के मुताबिक, उनके मकान मालिक ने उन्हें मकान खाली करने के लिए करीब 20 दिन का समय दिया है। परिवार अब अपने लिए दूसरी और अधिक सुरक्षित जगह तलाश रहा है।
द मूकनायक से विशेष बातचीत में निशु आजाद ने आरोप लगाया कि शालीमार गार्डन पुलिस की ओर से उनके मकान मालिक को फोन किया गया और उनसे कहा गया कि उन्होंने “किस तरह के लोगों को मकान दे दिया है”, ये “गंदे लोग” हैं और उनसे मकान खाली करवा लिया जाए। निशु का कहना है कि उनके मकान मालिक स्वयं पुलिसकर्मी हैं और 11 महीने की किराया चिठ्ठी के बावजूद अनावश्यक दबाव बनाकर ऐसा किया जा रहा है। निशु के परिवार ने 1 अगस्त को ही इस मकान में शिफ्ट किया था। हाल ही में मकान मालिक घर आये और उनसे 20 दिनों में घर खाली करने को कहा है।
निशु के मुताबिक, स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट के बाद उसके समर्थन में लोगों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने बताया कि नागरिक अधिकार संगठन सीजेपी की टीम पहले से उनके परिवार के साथ खड़ी थी, जबकि बाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी मामले में उनका समर्थन किया। निशु का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ पुलिस स्टेशन जाने के बाद वहां से उन्हें अच्छा सहयोग मिला, लेकिन शालीमार गार्डन पुलिस से उन्हें अपेक्षित कार्रवाई अब तक नहीं मिली है।
निशु ने द मूकनायक से बातचीत में कहा कि मकान खाली करने के दबाव ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। उनके अनुसार, मकान मालिक को पुलिस की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि उन्होंने किस तरह के लोगों को मकान दे दिया है और परिवार को वहां से हटाया जाए।
निशु का कहना है कि परिवार को मकान खाली करने में आपत्ति नहीं है, क्योंकि उनकी पहली प्राथमिकता परिवार की सुरक्षा है। उन्होंने बताया कि किराये का समझौता 11 महीने का है और परिवार को इस मकान में आए अभी लगभग एक महीना ही हुआ है। हालांकि, समझौते में ऐसा प्रावधान है जिसके तहत नोटिस देकर मकान खाली कराया जा सकता है। इसी वजह से परिवार अब दूसरी जगह तलाश रहा है।
निशु ने कहा कि परिवार भी अब यहां सेफ महसूस नहीं करता है और किसी सुरक्षित स्थान पर जाना चाहता है और इस समय मकान बदलना उन्हें एक व्यावहारिक विकल्प लगता है।
निशु ने कुछ दिन पहले अपने घर पर कथित पथराव का आरोप भी लगाया था। उनका कहना है कि अज्ञात लोगों ने उनके घर की ओर कंकड़-पत्थर फेंके। इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस मौके पर जांच के लिए भी पहुंची।
हालांकि, निशु का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर, सोसाइटी के कई निवासियों ने पथराव के दावे को पूरी तरह खारिज किया है। पड़ोसियों का कहना है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई और निशु झूठ बोल रही है, ये सब परिवार ने खुद ही किया है।
निशु का कहना है कि सोसाइटी में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, लेकिन परिवार को अभी तक यह नहीं बताया गया कि घटना के समय की फुटेज में क्या सामने आया। उनका कहना है कि यदि कैमरे की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है तो उसे देखकर स्पष्ट किया जा सकता है कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था।
निशु ने एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ के उनके घर पहुंचने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब जाखड़ उनसे मिलने आए तो आसपास के कुछ लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया कि उनके घर 20-25 गाड़ियां आई थीं।
निशु ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज देखकर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि वास्तव में कितनी गाड़ियां वहां आई थीं।
उनका कहना है कि उनके परिवार के घर पर आने वाले लोगों की संख्या को लेकर भी माहौल बनाया जा रहा है, जबकि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अपने वैचारिक सफर के बारे में बात करते हुए निशु ने बताया कि वह करीब 10-11 वर्ष की उम्र से डॉ. बीआर आंबेडकर के विचारों से प्रभावित रही हैं। उन्होंने कहा कि वह चंद्रशेखर आजाद से भी काफी प्रभावित रही हैं और लगभग साढ़े तीन साल से इस तरह का कंटेंट बनाना शुरू किया है।
निशु खुद को नास्तिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाली कंटेंट क्रिएटर के रूप में पेश करती हैं। उनका कहना है कि उनके विचारों और उनके सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर सोसाइटी में कुछ लोगों को आपत्ति है।
निशु का आरोप है कि सोसाइटी में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जिनकी विचारधारा हिंदुत्व या आरएसएस से प्रभावित है और उनके धार्मिक तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले कंटेंट के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
जंतर-मंतर प्रकरण और उसके बाद पैदा हुए विवाद का असर निशु की पढ़ाई पर भी पड़ा है। निशु ने बताया कि वह और उनके भाई-बहन पिछले तीन-चार दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
उनका कहना है कि स्कूल में कुछ सहपाठी जंतर-मंतर की घटना को लेकर उनका मजाक उड़ाते हैं और उन्हें चिढ़ाते हैं। निशु के मुताबिक, कुछ बच्चे यह तक कहते हैं कि वह अपनी “बेइज्जती करवा कर” वापस आई हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि स्कूल के शिक्षक उनका समर्थन करते हैं और स्कूल में उन्हें किसी तरह की बड़ी परेशानी नहीं है। समस्या मुख्य रूप से कुछ सहपाठियों के व्यवहार को लेकर है।
निशु ने परिवार की सुरक्षा को लेकर अपनी सबसे बड़ी चिंता सोशल मीडिया पर उनके घर की लोकेशन सार्वजनिक होने को बताया। उनके मुताबिक, उनके घर के आसपास अब अनजान लोग दिखाई देते हैं और इससे परिवार के भीतर लगातार असुरक्षा की भावना बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि वह खुद ऐसी धमकियों या दबाव से डरने वाली नहीं हैं, लेकिन अपने छोटे भाई-और बड़ी बहन की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं। बहन 11 वीं क्लास में है और तीनों ही बच्चे तीन-चार दिनों से स्कूल नहीं गये हैं।
इसी वजह से, निशु के अनुसार, परिवार ने अब मौजूदा मकान से दूसरी जगह शिफ्ट होने का फैसला किया है। उनका कहना है कि परिवार ऐसी जगह तलाश रहा है जहां वे अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल में रह सकें।
निशु के पिता ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। निशु ने कहा कि लगातार विवाद, ऑनलाइन ट्रोलिंग और दबाव के बावजूद वह अपने विचारों से पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी धमकियों से डर नहीं लगता, लेकिन परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर रहती है।
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद मामला एक नए चरण में पहुंच गया है। एक ओर निशु और उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें धमकियों और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सोसाइटी के कुछ निवासी निशु के सोशल मीडिया कंटेंट, कथित पथराव के दावे और पुलिस और उसके घर लोगों की लगातार आवाजाही को लेकर आपत्ति जता रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट निशु आजाद से द मूकनायक की बातचीत पर आधारित है। पथराव, पुलिस के फोन, मकान खाली कराने और सोसाइटी के दबाव संबंधी आरोप निशु के हैं। द मूकनायक ने इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
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