
गाजियाबाद/नई दिल्ली। हिंदूवादी और जातिवादी युवा स्वतंत्र भारद्वाज की 4 सितंबर की गिरफ्तारी के अगले दिन दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद ने आरोप लगाया कि अज्ञात लोगों ने उनके घर पर पथराव किया। उन्होंने क्लिप सोशल मीडिया पर साझा की और कहा कि “मैं पुलिस अधिकारियों से सम्मानपूर्वक अनुरोध करता हूँ कि वे मुझे ज़रूरी सुरक्षा प्रदान करें, क्योंकि मुझे अपनी सुरक्षा को लेकर वास्तविक चिंता है।” दिल्ली पुलिस और गाजियाबाद पुलिस को टैग कर उन्होंने लिखा, उसी रात उसने फिर पूछा “अगर आज रात हमारे साथ कुछ हुआ तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?”
घटना गाजियाबाद के शालीमार गार्डन इलाके में शनिवार रात बताई गई। एसीपी शालीमार गार्डन ने कहा कि जानकारी मिल गई है और संबंधित एसएचओ मामले को देख रहे हैं।
6 सितंबर को एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ निशु के आवास पर परिवार से मिले। संगठन ने न्याय की लड़ाई में लोकतांत्रिक-कानूनी सहयोग और पर्याप्त सुरक्षा की मांग की। निशु ने जाखड़ का आभार जताते हुए लिखा कि उन्होंने उन्हें बहन कहा और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का विश्वास दिलाया। जाखड़ पहले भी देरी पर सवाल उठा चुके थे और कहा था कि एनएसयूआई मदद के लिए आ रही है।
आपको बता दें स्वतंत्र भारद्वाज ने सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान निशु के पिता संजय कुमार पर जानलेवा हमला किया था जिसके बाद उनके सिर पर गंभीर चोटें लगी और टाँके आये, पुलिस ने निशु की शिकायत के बाद मारपीट की मामूली धाराओं में भारद्वाज के विरुद्ध कारवाई कर उसे छोड़ दिया और इसमें एससी/एसटी एक्ट के प्रावधान नही जोड़े। पुलिस पहले चोट को साधारण बता चुकी थी। दो महीने बाद भी प्रकरण में कोई बड़ी कारवाई नहीं हुई लेकिन हाल ही में स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो वायरल होने के बाद मामला दुबारा चर्चा में आया।
‘द कैजुअल टॉक्स’ के पॉडकास्ट वीडियो में भारद्वाज ने संजय कुमार पर हमला करने का दावा करते हुए घटना को लेकर कई बातें कहीं। भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस और भाजपा के बड़े नेताओं तक अपनी पहुंच होने का दम भरते हुए कहा कि जानलेवा हमला करने पर हाफ मर्डर का चार्ज लगना चाहिए लेकिन मैं आराम से घूम रहा था, जेल भी नहीं गया। पॉडकास्ट में भारद्वाज ने नाबालिग निशु के लिए भी आपत्तिजनक बातें बोली और उसे अगला टारगेट बताया।
पॉडकास्ट वायरल होने के बाद निशु आजाद ने सार्वजनिक रूप से विपक्षी नेताओं से मदद की अपील की। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने निशु को समर्थन देने का ऐलान किया, जबकि नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी उनके पक्ष में आवाज उठाई। सोशल मीडिया पर छात्र संगठनों, आंदोलन से जुड़े लोगों, कार्यकर्ताओं और अन्य राजनीतिक हस्तियों ने भी मामले में कार्रवाई की मांग की है। सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका भी थाने पहुंचे और संसद मार्ग थाने पर धरने के बाद समुदाय के दबाव के चलते दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। पुरानी FIR में SC/ST एक्ट जोड़ा गया। नाबालिग होने के कारण रेप थ्रेट और गाली-गलौज पर POCSO सहित धाराएं जोड़ी गयीं।
निशु आजाद गाजियाबाद की दलित परिवार से आने वाली किशोरी कंटेंट क्रिएटर हैं। वे जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन में दिखीं, अंबेडकराइट पहचान सार्वजनिक रखती हैं और सोशल मीडिया पर जाति-अन्याय व छात्र मुद्दों पर बोलती हैं। पिता पर जानलेवा हमले के बाद जुलाई में उसने पुलिस से गुहार लगाई थी कि सत्य दिखाना और अंबेडकर के विचार रखना इतना महंगा क्यों पड़ रहा है।
लक्ष्य इसलिए बना क्योंकि मामला केवल एक झड़प नहीं रह गया। एक तरफ दलित किशोरी और उसके पिता थे, दूसरी तरफ खुद को कट्टर हिंदू बताने वाला इन्फ्लुएंसर, जिसने पॉडकास्ट में हमले का दावा किया और कहा कि जेल नहीं गया। वीडियो वायरल होते ही निशु परिवार इस कहानी का चेहरा बन गया। राहुल गांधी, चंद्रशेखर आजाद और विपक्षी संगठनों के समर्थन ने विवाद को और राजनीतिक बना दिया। नतीजा यह रहा कि हमला सिर्फ थाने या प्रदर्शन स्थल तक नहीं रहा ऑनलाइन गाली, रेप थ्रेट और अब घर पर पथराव का आरोप उसी श्रृंखला का हिस्सा बताया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि पथराव की सूचना पर कार्रवाई देखी जा रही है। परिवार सुरक्षा मांग रहा है। एनएसयूआई ने साथ खड़े होने का वादा किया है। गिरफ्तारी के बाद भी दबाव खत्म नहीं हुआ, अब सवाल हिरासत से आगे बढ़कर नाबालिग पीड़िता और उसके घर की सुरक्षा तक पहुंच गया है।
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