‘मुझे मुस्लिमों से नफरत है…’: पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज का शर्मनाक बयान, कबूला - निशु आज़ाद के पिता पर जानलेवा हमला करके भी जेल नहीं गया!

स्वतंत्र भारद्वाज का विवादित इंटरव्यू: मुस्लिमों पर टिप्पणी, आर्थिक आरक्षण की मांग, भाजपा से रिश्ते और मारपीट पर खुलकर बोले
भारद्वाज ने कहा कि आर्थिक आरक्षण मोर्चा तब तक जारी रहेगा जब तक वे जीवित हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार, राजनीतिक दल या किसी भी व्यक्ति की तरफ से कितना भी पैसा या प्रस्ताव मिले, वे आंदोलन छोड़ने वाले नहीं हैं।
भारद्वाज ने कहा कि आर्थिक आरक्षण मोर्चा तब तक जारी रहेगा जब तक वे जीवित हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार, राजनीतिक दल या किसी भी व्यक्ति की तरफ से कितना भी पैसा या प्रस्ताव मिले, वे आंदोलन छोड़ने वाले नहीं हैं।Pic- The casual talk
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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर हिंदुत्ववादी और विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले स्वतंत्र भारद्वाज का नेहा सिंह राठौर के कार्यक्रम ‘द कैजुअल टॉक्स’ में दिए गए बयानों की देशभर में चर्चा हो रही है। करीब एक घंटे की इस बातचीत में भारद्वाज ने मुस्लिम समुदाय को लेकर अपनी नफरत, भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र, पाकिस्तान और विभाजन, किसान आंदोलन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा से अपने संबंध, आरक्षण सुधार मोर्चा और अपने खिलाफ लगे मारपीट के आरोपों पर विस्तार से बात की।

इस बातचीत की खास बात यह रही कि भारद्वाज ने कई ऐसे बयान खुद दिए, जिनमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय के प्रति अपनी व्यक्तिगत घृणा स्वीकार की। साथ ही उन्होंने आरक्षण समाप्त करने के बजाय आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग को अपने आंदोलन का उद्देश्य बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ लोगों के साथ कथित मारपीट और भविष्य में हिंसा की धमकी जैसे बयान भी दिए।

बातचीत की शुरुआत में स्वतंत्र भारद्वाज ने बताया कि वे बिहार के दरभंगा से आते हैं और खुद को मिथिला ब्राह्मण बताते हैं। उन्होंने कहा कि पटना विश्वविद्यालय से उनके आंदोलनकारी सफर की शुरुआत हुई। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय में भगवा झंडे से जुड़े एक विवाद को लेकर हुए आंदोलन में उन्होंने हिस्सा लिया था। इसके बाद दिल्ली में पढ़ाई के दौरान उनका रुझान सोशल मीडिया और राजनीतिक मुद्दों की तरफ बढ़ता गया।

उन्होंने बताया कि दिल्ली आने के बाद श्रद्धा हत्याकांड जैसे मामलों पर उन्होंने अपनी राय रखी। उनके अनुसार, इसी दौरान मीडिया से संपर्क बढ़ा और अलग-अलग मुद्दों पर बोलने के अवसर मिलने लगे। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्होंने कई बार “एक्सट्रीम लेवल” तक जाकर बातें कहीं।

कार्यक्रम का सबसे विवादित हिस्सा तब सामने आया जब नेहा सिंह राठौर ने उनसे पूछा कि वे मुस्लिम विरोधी क्यों हैं और उनके भीतर इतनी नफरत क्यों है।

जवाब में भारद्वाज ने कहा कि उन्हें मुस्लिम समुदाय के लोगों को देखकर घृणा जैसा महसूस होता है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या किसी एक व्यक्ति के गलत काम करने तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें “सारे लोगों से ही दिक्कत” है। उन्होंने यह तक कहा कि उन्हें खुद समझ नहीं आता कि मुस्लिमों से इतनी नफरत क्यों है और इसके पीछे पिछले जन्म से जुड़ी कोई वजह होने की संभावना जताई।

उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के बारे में भी इसी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि बुर्का पहने महिलाओं को देखकर भी उन्हें घृणा महसूस होती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मित्र उन्हें मुस्लिम महिलाओं के सोशल मीडिया संदेश स्वीकार करने और ‘रिवर्स लव जिहाद’ करने की सलाह देते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करते। मुसलमानों को पूरी तरह बॉयकॉट करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिम दुकान से पानी तक नहीं लेंगे और अतिरिक्त पैसे देने से वे “पेट्रोल बम” बना सकते हैं। भारद्वाज ने इंटरव्यू में मुसलमानों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हुए “मुल्ला-मुक्त भारत” और एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने जैसी बात कही।

भारद्वाज ने कहा कि आर्थिक आरक्षण मोर्चा तब तक जारी रहेगा जब तक वे जीवित हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार, राजनीतिक दल या किसी भी व्यक्ति की तरफ से कितना भी पैसा या प्रस्ताव मिले, वे आंदोलन छोड़ने वाले नहीं हैं।
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‘भारत धर्मनिरपेक्ष न पहले था, न अभी है’

भारत के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर भारद्वाज ने कहा कि भारत “धर्मनिरपेक्ष न पहले था, न अभी है और न कभी होगा।” उन्होंने दावा किया कि ‘सेक्युलर’ शब्द संविधान में बाद में “जबरदस्ती” जोड़ा गया।

संविधान निर्माण को लेकर उन्होंने डॉ. बी.आर. आंबेडकर और बी.एन. राव के योगदान पर अपनी अलग राय रखी और कहा कि संविधान निर्माण में कई लोग शामिल थे।

इसके बाद उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और मुस्लिम समुदाय की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इंडिया गेट पर लिखे मुस्लिम सैनिकों के नाम वाले लोग क्रांतिकारी नहीं बल्कि ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए लड़ने वाले लोग थे। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भारत के लिए नहीं बल्कि पाकिस्तान बनाने के लिए लड़ाई लड़ी थी और भारत में बचे उनके वंशजों के बारे में कहा कि “इन लोगों का कोई जगह ही नहीं है।”

भारद्वाज ने मुस्लिम मतदाताओं और राजनीतिक दलों की कथित तुष्टिकरण की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय विकास में रुचि नहीं रखता और भारत में उन्हें “किराएदार” बताते हुए कहा कि हिंदू “लैंडलॉर्ड” हैं।

किसान आंदोलन पर भारद्वाज ने कहा कि एमएसपी को लेकर आंदोलन सही था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पीछे हटना भी सही था। लेकिन उन्होंने आंदोलन के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उसमें “अराजक तत्व” घुस गए थे और इसे आतंकवादी गतिविधियों के जरिए प्रायोजित किया गया।

उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान पत्रकारों पर कथित हमले और प्रदर्शनकारियों के हाथों में तलवार होने का उल्लेख किया। उनका सवाल था कि अगर आंदोलन किसानों का था तो उसमें तलवारें कहां से आईं। उन्होंने यह भी पूछा कि बिहार और उत्तर प्रदेश के किसान बड़ी संख्या में आंदोलन में क्यों नहीं पहुंचे।

'भाजपा से फंड नहीं मिला, लेकिन विरोध नीतियों का है’

बातचीत में भारद्वाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और अब कथित तौर पर नोबेल पुरस्कार चाहते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वे मोदी का सम्मान इसलिए करते हैं क्योंकि वे देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उनकी नीतियों की आलोचना करने का अधिकार वे अपने पास रखते हैं। उन्होंने भाजपा की योजनाओं का प्रचार करने और साथ ही उसकी कुछ नीतियों का विरोध करने की बात कही।

भारद्वाज ने बातचीत में दावा किया कि चुनावों के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को राजनीतिक दलों की तरफ से फंड मिलने की व्यवस्था होती है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे फंड नहीं मिलते क्योंकि उनका चेहरा “कट्टर हिंदुत्ववादी” माना जाता है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा की तरफ से कथित तौर पर यह संदेश दिया गया कि कट्टर हिंदुत्ववादी चेहरों को चुनावी काम से दूर रखा जाए और इसके बजाय फनी कंटेंट बनाने वाले लोगों को काम दिया जाए। हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनका भाजपा से विरोध फंड नहीं मिलने की वजह से नहीं बल्कि नीतियों को लेकर है।

आरक्षण पर बदला रुख, आर्थिक आधार की मांग

बातचीत में आरक्षण आंदोलन पर चर्चा के दौरान भारद्वाज ने कहा कि उनका उद्देश्य आरक्षण समाप्त करना नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की मांग करना है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल एससी-एसटी तक सीमित नहीं है और महिला, ईडब्ल्यूएस तथा दिव्यांग वर्गों के लिए भी आरक्षण मौजूद है। उनके मुताबिक उनका प्रस्ताव है कि आर्थिक स्थिति को आधार बनाकर आरक्षण दिया जाए।

उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन में एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लोग भी शामिल हो सकते हैं और दावा किया कि वाल्मीकि समाज से उन्हें समर्थन मिल रहा है। उन्होंने इसे केवल सवर्ण समाज की लड़ाई मानने से इनकार किया और इसे अमीरी-गरीबी से जोड़ने की कोशिश की।

आरक्षण के मुद्दे पर भारद्वाज ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और सांसद चंद्रशेखर आजाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार को आरक्षण का लाभ मिल चुका है और वह परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो चुका है तो उसी परिवार के अन्य सदस्यों को आरक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने चिराग पासवान, चंद्रशेखर आजाद और आईएएस अधिकारी टीना डाबी जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया।

आरक्षण विरोधी आंदोलन के दो हिस्सों में बंटने के सवाल पर भारद्वाज ने हर्ष दुबे पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें शुरू से ही हर्ष दुबे पर भरोसा नहीं था और आरोप लगाया कि उनका मीडिया में उभरना “स्क्रिप्टेड” था।

उन्होंने यहां तक कहा कि हर्ष दुबे को भाजपा या अखिलेश यादव की तरफ से भेजे गए व्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि बातचीत में इस आरोप के समर्थन में कोई दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

जंतर-मंतर की घटना और ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर सफाई

आरक्षण आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए बस की खिड़की से निकलने का वीडियो वायरल होने के सवाल पर भारद्वाज ने कहा कि वे पुलिस से भागे नहीं थे।

उनके मुताबिक पुलिस उनसे करीब 200-300 मीटर दूर थी और वे खुद गिरफ्तारी देने गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय बीएनएस की धारा 163 लागू थी और उनके साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। उनका दावा था कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय एक सिविल बस में बैठाकर हिरासत में लिया।

उन्होंने कहा कि बाद में वे वापस प्रदर्शन स्थल पर गए और बैरिकेडिंग हटाकर दोबारा जंतर-मंतर में प्रवेश किया। उनके अनुसार वे पुलिस से यह भी कह रहे थे कि यदि लाठी चलानी है तो नेतृत्वकर्ताओं पर चलाई जाए, आम प्रदर्शनकारियों पर नहीं।

भारद्वाज ने कहा कि आर्थिक आरक्षण मोर्चा तब तक जारी रहेगा जब तक वे जीवित हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार, राजनीतिक दल या किसी भी व्यक्ति की तरफ से कितना भी पैसा या प्रस्ताव मिले, वे आंदोलन छोड़ने वाले नहीं हैं।
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मारपीट के आरोप पर खुद भारद्वाज ने क्या कहा?

कार्यक्रम में नेहा सिंह राठौर ने उनसे दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आज़ाद द्वारा लगाए गए आरोप के बारे में पूछा कि उन्होंने उसके पिता के साथ मारपीट की थी।

जवाब में भारद्वाज ने खुद कहा कि उन्होंने लड़की के पिता को मारा था। मारपीट का इकबाल करते हुए भारद्वाज ने कहा, " हम जेल भी नहीं गये, रातभर घूम रहे थे।" जानलेवा हमले जैसे गंभीर अपराध के बावजूद बचने के पीछे की वजह भारद्वाज ने कथित रूप से दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा को दी एवं चिराग पासवान और प्रधानमंत्री मोदी का भी सपोर्ट होने का दावा किया।

उन्होंने बताया कि विवाद की शुरुआत तब हुई जब उस व्यक्ति की तरफ कैमरा उनकी ओर किया गया। उनके अनुसार उन्होंने कैमरा नीचे करने को कहा और इसके बाद धक्का-मुक्की हुई।

उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उनका पैर डस्टबिन से फिसल गया और बाद में उन्हें पता चला कि जिस व्यक्ति को उन्होंने मारा था, वह उसी लड़की का पिता था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता कि वह लड़की का पिता है तो वे उसे नहीं मारते। बातचीत के इसी हिस्से में भारद्वाज ने लड़की और अन्य लोगों को लेकर ऐसे बयान दिए जिनमें उन्होंने भविष्य में हिंसा की संभावना की बात कही। उन्होंने कहा कि संबंधित लोग उनके “टारगेट” पर हैं और “मौके” की तलाश की बात कही।

एक अन्य हिस्से में उन्होंने अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित धमकियों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो दूसरे लोग उनका सिर काटने की बात कर रहे हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वे उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करवाना चाहते क्योंकि उनके अनुसार ऐसे लोगों के खुले में रहने से उन्हें अपने दुश्मनों की पहचान रहती है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि भीड़ में उनका कोई दुश्मन मौजूद हुआ तो वे उसे भीड़ से निकालकर मारेंगे। बातचीत के दौरान भारद्वाज ने पुलिस के साथ अपने कथित संबंधों को लेकर भी कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन में कोई आरएसएस या विश्व हिंदू परिषद का राजनीतिक समर्थन नहीं है और आंदोलन वे लोग खुद चला रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके संपर्क में कुछ पुलिसकर्मी हैं और जंतर-मंतर की घटना के दौरान उन्होंने पुलिस से संबंधित कुछ लोगों को अपना “भाई” बताया।

भारद्वाज ने बातचीत में भाजपा के साथ अपने वैचारिक संबंधों को स्वीकार किया लेकिन यह भी कहा कि वे भाजपा की हर नीति का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि वे भाजपा की योजनाओं का प्रचार करते रहे हैं, लेकिन सरकार की उन नीतियों का विरोध भी करते हैं जिन्हें वे गलत मानते हैं। उनका कहना था कि सरकार का समर्थन करने पर व्यक्ति सरकार का “चहेता” बना रहता है, लेकिन जैसे ही वह विरोध करता है, दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

आंदोलन की फंडिंग पर सवाल पूछे जाने पर भारद्वाज ने कहा कि उन्हें किसी राजनीतिक दल की आर्थिक मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि लोग खुद उन्हें आर्थिक सहायता की पेशकश करते हैं।

उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर एक नंबर जारी करने के बाद उन्हें अलग-अलग लोगों के फोन आए। उनके अनुसार किसी ने 2,000 रुपये भेजने की बात कही तो किसी ने संगठन बनाने के लिए एक से तीन लाख रुपये देने की पेशकश की। उन्होंने अपने निजी खर्च को भी लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये प्रतिमाह बताया और कहा कि आंदोलन के लिए उन्हें किसी पार्टी की फंडिंग की जरूरत नहीं है।

कार्यक्रम में बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप का जिक्र आने पर भारद्वाज ने उन्हें लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि जेल से आने के बाद मनीष कश्यप को भाजपा और बाद में जन सुराज से जुड़ना नहीं चाहिए था।

भारद्वाज ने दावा किया कि मनीष कश्यप के लिए उन्होंने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस और भीड़ जुटाने में मदद की थी, लेकिन बाद में मनीष कश्यप ने उनसे सलाह नहीं ली। उन्होंने उन्हें विचारधारा के मामले में अस्पष्ट बताते हुए कई व्यक्तिगत टिप्पणियां भी कीं।

बातचीत के आखिर में जब उनसे पूछा गया कि यदि उन्हें भविष्य में राजनीति में बड़ा पद या सत्ता मिल जाती है तो क्या उनका आंदोलन समाप्त हो जाएगा, भारद्वाज ने इससे इनकार किया।

उन्होंने कहा कि आर्थिक आरक्षण मोर्चा तब तक जारी रहेगा जब तक वे जीवित हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार, राजनीतिक दल या किसी भी व्यक्ति की तरफ से कितना भी पैसा या प्रस्ताव मिले, वे आंदोलन छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने जातिगत जनगणना का भी विरोध करते हुए कहा, " कास्ट सेंसस होना ही नहीं चाहिए। सारे हिंदू हैं। जो योग योग्य है उनको आगे बढ़ाइए। जो पढ़े लिखे नहीं है उनको पीछे कर दीजिए।" भारद्वाज ने कहा वे ना तो आरक्षण के विरोधी हैं ना ही आरक्षित वर्ग के लेकिन वे योग्यता आधारित व्यवस्था के पक्षधर हैं।

भारद्वाज ने कहा कि आर्थिक आरक्षण मोर्चा तब तक जारी रहेगा जब तक वे जीवित हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार, राजनीतिक दल या किसी भी व्यक्ति की तरफ से कितना भी पैसा या प्रस्ताव मिले, वे आंदोलन छोड़ने वाले नहीं हैं।
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