स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद निशु आज़ाद की नई मुश्किल: अब सोसाइटी से घर खाली करने का दबाव क्यों?

पड़ोसियों के मुताबिक शनिवार को बाहर लोग खड़े थे, पत्थरबाजी नहीं हुई। एक पड़ोसन, जिनकी बालकनी निशु वाले घर से सटी बताई गई, कहती हैं कि उनके घर एक कंकड़ भी नहीं आया, शीशा नहीं टूटा, आवाज़ नहीं आई।
अंबेडकरवादी विचारों के लिए पहले हिंदुत्वादी समूहों से ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और रेप थ्रेट झेल चुकी निशु अब अपनी ही सोसाइटी के निवासियों के विरोध का सामना कर रही हैं।
अंबेडकरवादी विचारों के लिए पहले हिंदुत्वादी समूहों से ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और रेप थ्रेट झेल चुकी निशु अब अपनी ही सोसाइटी के निवासियों के विरोध का सामना कर रही हैं।ग्राफिक- द मूकनायक
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गाजियाबाद- जंतर मंतर पर एक प्रदर्शनकारी संजय कुमार पर जानलेवा हमला करने के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के जेल जाने के बाद भी पीड़ित परिवार खासकर उनकी 14 वर्षीय बेटी दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। अंबेडकरवादी और नास्तिक विचारों के लिए पहले हिंदुत्वादी समूहों से ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और रेप थ्रेट झेल चुकी निशु अब अपनी ही सोसाइटी के निवासियों के विरोध का सामना कर रही हैं। यूट्यूब चैनल ‘भारत गान’ ने विक्रम इंक्लेव इलाके में पड़ोसियों से लंबी बात की। कैमरे पर अधिकांश आवाज़ एक ही थी- वे नहीं चाहते कि निशु और उनका परिवार यहाँ रहे।

निशु ने 5 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर क्लिप डालकर आरोप लगाया था कि अज्ञात लोगों ने घर पर पत्थर फेंके। उन्होंने दिल्ली पुलिस और गाजियाबाद पुलिस को टैग कर अपने परिवार के लिए सुरक्षा मांगी, दूसरे पोस्ट में उसने पूछा “अगर आज रात हमारे साथ कुछ हुआ तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?” निशु ने अज्ञात लोगों द्वारा उसके घर पर पत्थर-ईंट फेंकने और खिड़की पर निशाना लगाने की बात कही। एसीपी शालीमार गार्डन ने तब कहा था कि सूचना मिल गई है और संबंधित एसएचओ मामले को देख रहे हैं।

अंबेडकरवादी विचारों के लिए पहले हिंदुत्वादी समूहों से ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और रेप थ्रेट झेल चुकी निशु अब अपनी ही सोसाइटी के निवासियों के विरोध का सामना कर रही हैं।
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद दलित कंटेंट क्रिएटर निशु के घर पथराव, पुलिस से मांगी सुरक्षा

भारत गान के साक्षात्कार में पड़ोसी पथराव के आरोप को सिरे से खारिज करते हैं। महिलाएँ कहती हैं कि सोसाइटी “एकदम क्लीन” है, दस साल से ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उनके मुताबिक शनिवार को बाहर लोग खड़े थे, पत्थरबाजी नहीं हुई। एक पड़ोसन, जिनकी बालकनी निशु वाले घर से सटी बताई गई, कहती हैं कि उनके घर एक कंकड़ भी नहीं आया, शीशा नहीं टूटा, आवाज़ नहीं आई। उनका तर्क है- “अगर पत्थर आते तो कांच फूटता।” सुमन कहती हैं कि सोसाइटी मंदिर में कार्यक्रम था, वे रात दो बजे तक वहीं रहीं, पथराव नहीं हुआ। छाया सोनी कहती हैं कि निशु एक महीने पहले यहाँ नहीं थीं, बाहर से कोई घुस नहीं सकता, कैमरों पर कुछ नहीं दिखा, खिड़कियाँ नहीं टूटीं। नेहा मिश्रा कहती हैं कि रात जाग रही थीं, हमला आज पता चला; पंद्रह साल में ऐसी बात नहीं हुई; कैमरा फुटेज से पता चलेगा पत्थर पड़े या नहीं।

भारत गान चैनल पर सोसायटी निवासी बार-बार तीन बातें दोहराते हैं। पहली- सोसाइटी की बदनामी। वे कहते हैं कि कल जो वीडियो पथराव का डाला गया, उस पर विश्वास नहीं; वे नहीं चाहते कि पूरा मोहल्ला बदनाम हो। दूसरी, पुलिस गाड़ियाँ और आने-जाने वालों से बच्चों में डर। सात-आठ गाड़ियाँ आने की बात कही गई। माताएँ कहती हैं कि बच्चे पार्क नहीं जा रहे, मंदिर नहीं जा रहे, बाहर नहीं निकल रहे। एक महिला कहती हैं, “भय 14 साल की लड़की से नहीं है; पुलिस की गाड़ियाँ देखकर बच्चे डरते हैं, उन्होंने ऐसा पहले नहीं देखा।” तीसरी- निशु के सोशल मीडिया विचारों का बच्चों पर असर। कई अभिभावक कहते हैं कि उनके बच्चे टीनएजर हैं, वीडियो देखकर वही सीखेंगे। एक स्वर यह भी है, “ऐसा इंसान जो पूरी सोसाइटी को स्पॉइल कर रहा हो, बच्चों को स्पॉइल कर रहा हो, इस सोसाइटी में नहीं चाहिए।”

साक्षात्कार में धार्मिक आपत्ति सबसे तीखी है। पड़ोसी निशु की उन टिप्पणियों का हवाला देते हैं जो देवी-देवताओं और प्रधानमंत्री से जुड़ी बताई गईं। निवासी कहते हैं , “जो भगवान को नहीं मानते, उनके लिए कुछ कहा नहीं जा सकता।” फिर सीधा निष्कर्ष “तभी भावना आई कि यहाँ से खाली हो जाए।” एक निवासी कहते हैं कि जो हिंदू नहीं मानते, वे उस सोसाइटी में न रहें जहाँ सामने मंदिर है और ज्यादातर लोग इन चीजों को मानते हैं। महिलाओं का एक स्वर कैमरे पर यह भी है, “जो हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करते हैं, गलत माहौल बनाते हैं। इसलिए नहीं चाहते कि वे कॉलोनी में रहें। जल्द खाली करके जाएँ।”

बातचीत में SC/ST एक्ट का जिक्र आता है। निवासी कहते हैं, “हमारे हाथ बँधे हैं, SC/ST भी लग सकता है।” तर्क यह दिया जाता है कि जो “भगवान को नहीं छोड़ सकता, वह हममें से किसी को क्या छोड़ेगा।” कुछ कहते हैं कि भारद्वाज पर लगी धारा उनके बच्चों पर भी लग सकती है, इसलिए बाहर भेजने में हिचक है। एक महिला कहती हैं कि आजकल ऐसे केस चल रहे हैं; जो धर्म नहीं मानता, कल कुछ भी कर सकता है, कोई केस लगा सकता है। पड़ोस में छह और बारह साल के बच्चों का जिक्र करते हुए महिलाएं कहती हैं, पड़ोस का माहौल ऐसा नहीं होना चाहिए।

किरायेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ कहते हैं कि पहले पता नहीं था कौन आया है; वीडियो वायरल होने और पुलिस आने के बाद पहचान पता चली। एक स्वर है कि मकान मालिक ने असली पहचान के आधार पर मकान नहीं दिया होगा, रेंट एग्रीमेंट किसी और नाम पर हो सकता है, दस्तावेज कैमरे पर नहीं दिखाए गए। कई महिलाएँ कहती हैं कि वे परिवार की तरह रहती हैं, निशु को नहीं जानतीं, सभी एक राय से कहते हैं , "जहाँ घर मिले चली जाएँ, यहाँ नहीं रहें।”

स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर क्या है विवाद?

मामला जंतर-मंतर के सीजेपी प्रदर्शन से जुड़ा है। स्वतंत्र भारद्वाज ने निशु के पिता संजय कुमार के सिर पर वार किया । संसद मार्ग थाने में FIR संख्या 62/2026 भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) में दर्ज हुई। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार बताए गए। पॉडकास्ट में भारद्वाज ने हमले का दावा किया और कहा कि धारा 307 बनती थी, फिर भी वे जेल नहीं गए। क्लिप वायरल होने पर निशु ने राहुल गांधी और चंद्रशेखर आजाद से गुहार लगाई। 4 सितंबर को सीजेपी, आजाद समाज पार्टी और युवा कांग्रेस संसद मार्ग थाने पहुँचे। पुलिस ने भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया। पुरानी FIR में SC/ST एक्ट जोड़ा गया। नाबालिग होने और ऑनलाइन रेप थ्रेट के कारण POCSO संबंधी अलग शिकायत/FIR की खबर आई। भारद्वाज का पक्ष आत्मरक्षा का रहा; दिल्ली पुलिस पहले चोट को कड़े से लगी साधारण चोट बता चुकी थी। 6 सितंबर को एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ परिवार से मिले और सहयोग व सुरक्षा का वादा किया। सोमवार 7 सितंबर को दिल्ली की कोर्ट ने भारद्वाज की जमानत याचिका खारिज कर उसे 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजा। कई हिंदूवादी समूह भारद्वाज के समर्थन में आगे आये और उसकी गिरफ्तारी का विरोध किया। कानूनी मामला अदालत में है। घर खाली करने के सामाजिक दबाव को लेकर परिवार का पक्ष जानने के लिए द मूकनायक ने निशु से संपर्क साधने का प्रयास किया लेकिन उससे बात नहीं हो सकी।

अंबेडकरवादी विचारों के लिए पहले हिंदुत्वादी समूहों से ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां और रेप थ्रेट झेल चुकी निशु अब अपनी ही सोसाइटी के निवासियों के विरोध का सामना कर रही हैं।
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