
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए हमले और वायरल पॉडकास्ट के बाद बढ़ा राजनीतिक-कानूनी दबाव शुक्रवार को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन तक पहुंचा। सीजेपी कार्यकर्ता निशु आजाद अपने पिता संजय कुमार पर हुए हमले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ सख्त धाराएं जोड़ने की मांग लेकर थाने गईं। उनके साथ नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास, सह-संयोजक आशुतोष रांका तथा भारतीय युवा कांग्रेस की कानूनी टीम भी मौजूद रही।
दिल्ली युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने थाने से बाहर आकर बताया कि पुलिस ने मौजूदा FIR में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ दी हैं। उन्होंने कहा कि धारा 308 के अलावा धारा 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ने के लिए मेडिकल राय ली जा रही है। शुक्रवार राजपत्रित अवकाश होने के कारण फिलहाल डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, लेकिन उसी दिन राय तय करने का दावा किया गया। लाकड़ा ने यह भी कहा कि निशु ने सोशल मीडिया पर मिले रेप थ्रेट और गाली-गलौज के खिलाफ अलग शिकायत दी है और दिल्ली पुलिस ने उस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की लीगल सेल के अधिवक्ता ऋषभ ने उसी पॉडकास्ट का हिंदी-अंग्रेजी ट्रांसक्रिप्ट पुलिस को सौंपा, जिसके बाद यह पूरा मामला गरमाया था।
युवा कांग्रेस ने दावा किया कि उसकी पैरवी के बाद FIR में हत्या के प्रयास संबंधी धाराएं और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की गई है तथा रेप थ्रेट वाली अलग शिकायत भी दर्ज हुई है। संगठन ने राहुल गांधी के उस संदेश का हवाला दिया जिसमें उन्होंने निशु से कहा था कि वे अकेली नहीं हैं।
23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद निवासी संजय कुमार के सिर पर चोट लगने की शिकायत पर संसद मार्ग थाने में FIR संख्या 62/2026 दर्ज हुई थी। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 126(2) (गलत तरीके से रोकना) और 3(5) (सामान्य आशय) लगाई गई थी। नामजद आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार बताए गए। घटना शाम करीब 5:30 बजे और तहरीर रात 10:45 बजे दर्ज बताई गई है।
‘द कैजुअल टॉक्स’ का पॉडकास्ट वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयान में कहा था कि संजय कुमार को कड़े से सिर पर चोट आई, आरएमएल अस्पताल की एमएलसी में चोट साधारण बताई गई और खोपड़ी फटने का दावा सही नहीं है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों को मौके से हिरासत में लिया गया, नोटिस देकर पूछताछ की गई और चार्जशीट जल्द दाखिल की जाएगी। राजनीतिक दखल के आरोपों को पुलिस ने खारिज किया था।
सीजेपी और कांग्रेस लीगल टीम की मांग मुख्यतः तीन थीं: मौजूदा FIR में हत्या के प्रयास (धारा 307), आपराधिक धमकी और SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ना; आरोपी की गिरफ्तारी; तथा निशु को सोशल मीडिया पर मिल रही रेप धमकियों पर अलग कार्रवाई। निशु के वकील ऋषभ रंजन ने कहा कि अतिरिक्त डीसीपी की मौजूदगी में हुई बैठक में पुलिस ने इन धाराओं को जोड़ने पर सहमति जताई। निशु ने थाने के बाहर कहा कि अधिकारियों ने स्वतंत्र भारद्वाज को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि समर्थकों द्वारा गाली-गलौज और रेप थ्रेट के खिलाफ उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है।
चंद्रशेखर आजाद भी निशु के साथ थाने पहुंचे थे और सीजेपी नेताओं के साथ पुलिस से मुलाकात की। वे सौरव दास, आशुतोष रांका और निशु के साथ थाने से बाहर आए।
3 सितंबर को पॉडकास्ट वायरल होने के बाद निशु ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी और चंद्रशेखर आज़ाद से मदद की गुहार लगाई थी, दोनों ने तत्काल निशु को समर्थन और न्याय की लड़ाई में मदद करने का आश्वासन दिया। पॉडकास्ट वायरल होने के बाद सीजेपी भी तुरंत एक्शन मोड़ में आई और एलान किया कि वे सभी सुबह संसद मार्ग थाने जायेंगे और भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग करेंगे।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने निशु के वीडियो का जवाब देते हुए लिखा था, “निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ। साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।” उन्होंने अमित शाह की दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि एक ओर छात्रों पर बर्बरता होती है, दूसरी ओर दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला आरोपी खुलेआम घूम रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से पूछा कि ऐसे आरोपी को संरक्षण क्यों है। पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है।”
भारद्वाज ने पॉडकास्ट में हमले का दावा किया था और कहा था कि धारा 307 बनती थी, फिर भी वे जेल नहीं गए। बाद में उन्होंने सफाई दी कि यह आत्मरक्षा थी, वे 10-15 लोगों से घिरे थे और पुलिस मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार गंभीर चोट नहीं थी।
निशु ने कहा है कि इस घटना के बाद वे हफ्तों स्कूल नहीं गईं और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगी। युवा कांग्रेस का कहना है कि सड़क से अदालत तक पैरवी जारी रहेगी।
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