अनुशासन या क्रूरता? महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रमशाला में छात्रों का आधा अधूरा मुंडन, हेडमास्टर निलंबित

महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, बच्चों की मौतों और सरकार के फैसलों को लेकर पहले से ही बड़ा विवाद चल रहा है। इन छात्रावासों और स्कूलों में पीने का पानी, शौचालय, बाथरूम, खाना और स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
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चंद्रपुर (महाराष्ट्र): चिमूर तालुका के जांभुलघाट स्थित शासकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आश्रमशाला में शनिवार को हुए बाल कटाने के सत्र के दौरान करीब 80 से 82 छात्रों के सिर आधे-अधूरे मुंडवाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद छात्रों के माता-पिता ने भारी नाराजगी जताई, आदिवासी विकास विभाग ने हेडमास्टर पीएस गिरी को निलंबित कर दिया है, जबकि अधीक्षक पीके आत्राम के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर जांच शुरू की गई है।

आपको बता दें महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों और आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, बच्चों की मौतों और सरकार के फैसलों को लेकर पहले से ही बड़ा विवाद चल रहा है। इन छात्रावासों और स्कूलों में पीने का पानी, शौचालय, बाथरूम, खाना और स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इन विवादों के बीच अब जांभुलघाट हॉस्टल में छात्रों के साथ इस प्रकार के व्यवहार की खबर फैलने से आक्रोश बढ़ गया।

आदिवासी विकास विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार सुबह आश्रमशाला परिसर में छात्रों के बाल कटाने का सत्र चला। इसी दौरान कुछ बच्चे खेल रहे थे। बच्चों के इसी व्यवहार से सुपरिटेंडेंट नाराज हो गए। उन्होंने गुस्से में बच्चों के आधे बाल कटवा दिए। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अधीक्षक पीके आत्राम ने नाई को निर्देश दिया कि छात्रों के सिर आधे मुंडवा दिए जाएं, ताकि वे बीच में खेलने न चले जाएं और अपनी बारी का इंतजार करें। ट्रिमर की बैटरी खत्म हो जाने के कारण करीब 80 छात्रों के बाल अधूरे रह गए।

आधे अधूरे बाल कटी हुई तस्वीरें सोशल सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्कूल को तुरंत बाल कटाने का काम पूरा करने और एकसमान हेयरकट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधीक्षक ने रात करीब 10 बजे नाई को दोबारा बुलाया। बाल कटाने का काम रात भर चला और सुबह करीब 4 बजे तक जारी रहा। छात्रों को जगाकर शेष बाल काटे गए। रविवार के मामले का खुलासा हुआ तो अभिभाववक भड़क उठे। स्कूल के प्रिंसिपल प्रशांत गिरी ने इस घटना को लेकर सुपरिटेंडेंट को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

चार छात्रों ने हेडमास्टर पीएस गिरी से शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। विभाग को प्रशासनिक नियंत्रण में अन्य कमियां भी मिलीं, जिनमें मोबाइल फोन पर प्रतिबंध के बावजूद छात्रों द्वारा मोबाइल इस्तेमाल शामिल है। मुख्याध्यापक पीएस गिरी को महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के तहत निलंबित कर दिया गया है। अधीक्षक पीके आत्राम को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और उनके खिलाफ जांच शुरू की गई। बाद में उन्हें भी निलंबित कर दिया गया।

प्रारंभिक जांच में छात्रों ने यह नहीं कहा कि आधे बाल कटाना सजा के तौर पर या किसी अंधविश्वास से जुड़ा था। विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, कई छात्रों में रूसी और गर्मी से संबंधित फोड़े-फुंसी पाए जाने के बाद बाल कटाने का फैसला लिया गया था। चिमूर के एकीकृत आदिवासी विकास अधिकारी ने प्रारंभिक रिपोर्ट आदिवासी विकास विभाग के अपर आयुक्त को भेज दी है। अंतिम निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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