
मुंबई- वंचित बहुजन आघाडी के राज्य अध्यक्ष राजेंद्र पातोडे ने महाराष्ट्र सरकार पर फिर से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षित फंड के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। 24 सितंबर के शासन निर्णय के अनुसार, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के अनुसूचित जाति घटक से मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के लिए 339.14 करोड़ रुपये महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित किए गए हैं। पातोडे के मुताबिक, अब तक इस योजना के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति घटकों से कुल पांच हजार करोड़ रुपये डायवर्ट किए जा चुके हैं।
सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के शासन निर्णय संख्या बीजीटी-2026/प्र.क्र.105/अर्थसंकल्प (विधयो) दिनांक 24 सितंबर 2026 के अनुसार:
वर्ष 2026-27 में मांग संख्या एन-3, लेखाशीर्ष 2235-सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के अंतर्गत अनुसूचित जातियों के लिए विशेष घटक योजना में मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना (लेखाशीर्ष 2235 डी 767) के लिए 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान मंजूर है।
अगस्त 2026 महीने का आर्थिक लाभ अनुसूचित जाति घटक की पात्र लाभार्थी महिलाओं को देने के लिए 339.14 करोड़ रुपये सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग को बजटरी फंड वितरण प्रणाली पर उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है।
इस फंड का उपयोग केवल अनुसूचित जाति और नवबौद्ध प्रवर्ग की महिलाओं के लिए ही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की होगी। विभाग को इन श्रेणियों की लाभार्थी संख्या भी उपलब्ध करानी होगी।
शासन निर्णय में यह भी कहा गया है कि फंड खर्च करते समय वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन किया जाए और मासिक रिपोर्ट भेजी जाए।
राजेंद्र पातोडे ने कहा कि वंचित बहुजन आघाड़ी ने पहले भी दो मंत्रियों के घरों तक मार्च निकालकर इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी। फिर भी सरकार ने अनुसूचित जाति योजनाओं के लिए आरक्षित 340 करोड़ रुपये का फिर से दुरुपयोग किया है।
उन्होंने आरोप लगाया, “अभी तक लाडकी बहिन योजना के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति घटकों से पांच हजार करोड़ रुपये डायवर्ट किए जा चुके हैं। नीति आयोग के दिशानिर्देश साफ कहते हैं कि अनुसूचित जाति-जनजाति के आरक्षित फंड को कहीं और नहीं लगाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने भी कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में निर्देश दिया है कि आरक्षित फंड का अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न हो। इन नियमों की अनदेखी करते हुए सरकार बजट चोरी कर रही है। अब वंचित बहुजन आघाड़ी इस बजट चोरी के खिलाफ सीधे पुलिस शिकायत दर्ज करेगी।”
पातोडे ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह अनुसूचित जाति-जनजाति के विकास के लिए निर्धारित फंड को लाडकी बहिन जैसी सामान्य योजना में लगाकर इन समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को कमजोर कर रही है।
मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये दिए जाते हैं। राज्य में लगभग 1.66 करोड़ महिलाएं इस योजना की लाभार्थी हैं। पिछले कई महीनों से सामाजिक न्याय विभाग के अनुसूचित जाति घटक से नियमित रूप से फंड महिला एवं बाल विकास विभाग को ट्रांसफर किए जा रहे हैं। इससे पहले भी जुलाई 2026 के लिए 344.74 करोड़ और अन्य महीनों के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये इसी तरह हस्तांतरित किए गए थे।
वंचित बहुजन आघाड़ी समेत कई दलित-आदिवासी संगठनों ने बार-बार इस फंड डायवर्जन का विरोध किया है। वे कहते हैं कि यह नीति आयोग और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। सरकार का पक्ष यह है कि बजट में ही अनुसूचित जाति-जनजाति घटक के अंतर्गत लाडकी बहिन योजना के लिए प्रावधान किया गया है और फंड केवल उसी श्रेणी की महिलाओं पर खर्च हो रहा है।
राजेंद्र पातोडे ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस प्रवृत्ति को नहीं रोकती तो संगठन कानूनी और आंदोलनात्मक दोनों रास्ते अपनाएगा।
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