
मुंबई। नवरात्रि अभी एक महीने दूर है, लेकिन महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया को लेकर सियासी घमासान शुरू हो चुका है। विश्व हिंदू परिषद ने राज्यभर के गरबा-डांडिया आयोजनों में मुसलमानों की एंट्री न देने की अपील की है और आयोजकों से आधार कार्ड जांचने व तिलक लगाने को कहा है। इस गाइडलाइन का शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने विरोध किया। बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी समावेशी रुख अपनाया। वहीं भाजपा नेता नितेश राणे ने VHP का समर्थन किया। अब बहस सिर्फ एंट्री पर नहीं, हिंदुत्व की परिभाषा पर भी सिमट गई है।
विहिप के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन ने फैसला लिया है कि 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया में मुसलमानों को शामिल नहीं होने दिया जाएगा। उनका तर्क है कि नवरात्रि सिर्फ गीत और नृत्य नहीं, देवी की पूजा का पर्व है। उन्होंने सवाल किया कि मूर्ति पूजा के खिलाफ रहने वाले मुसलमान इस त्योहार में क्यों शामिल हों। आयोजकों के लिए जारी सुझावों में प्रतिभागियों के आधार कार्ड की जांच और माथे पर तिलक लगाना शामिल है। कुछ बयानों में हनुमान चालीसा का पाठ कराने का भी जिक्र आया। नायर ने इसे किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, हिंदू त्योहारों की सांस्कृतिक पहचान बचाने का पूर्वोपाय बताया।
विहिप की अपील का विरोध करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा, " देश में हर जगह अपनी-अपनी संस्कृति होती है, अपना-अपना हिंदुत्व होता है। हमारा मराठी हिंदुत्व अलग है, बंगाल का अलग होगा, पंजाब का अलग होगा, केरल का अलग होगा, कश्मीर का अलग होगा मगर हम अपनी तरह से हर त्योहार मनाते हैं। आप वहां अपनी तरह से मनाओ, हम यहां अपनी तरह से मनाएंगे।"
विहिप की अपील पर राज्य सरकार या पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक निर्देश नहीं आया है कि आयोजक किसी समुदाय को प्रवेश से रोकें। फिर भी बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेजी से आईं।
शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने पहले मुलुंड में कहा था कि हिंदुत्व का सर्टिफिकेट देने वाले ये लोग कौन हैं। उनके मुताबिक मुंबई में गरबा, नवरात्रि, दही हांडी या गणपति उत्सव में आने वाले हर व्यक्ति की पहली पहचान मुंबईकर की है। भाषा, राज्य, धर्म या जाति कुछ भी हो, लोग बाप्पा के लिए आते हैं और बाप्पा सबके हैं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थक हैंडल्स से उन पर हमला हुआ।
गुरुवार को आदित्य ठाकरे ने उसी विवाद पर नया बयान दिया। उन्होंने कहा, “मैंने जब कहा तब भाजपा के ट्रोलर्स मुझ पर चढ़ रहे थे। अभी रामदास अठावले और अमृता फडणवीस ने भी कहा है। बात तो साफ है कि ये जो तथाकथित VHP या फिर जिसने भी बैन लगाया है, उनको लगता है कि उनकी संस्कृति, उनका हिंदुत्व ही सही हिंदुत्व है। देश में हर जगह अपनी-अपनी संस्कृति होती है, अपना-अपना हिंदुत्व होता है।”
अमृता फडणवीस ने 9 सितंबर को कहा कि त्योहार सभी को साथ लेकर चलने वाले होते हैं। अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा में आता है और त्योहार का ठीक से आनंद लेता है तो इसमें कुछ गलत नहीं। रामदास अठावले ने रायपुर में कहा कि भारत संविधान से चलता है और सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार हैं। किसी धर्म के लोगों को गरबा से रोकना सही रुख नहीं है। उन्होंने VHP के रुख को संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
दूसरी तरफ महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने VHP की मांग का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे त्योहारों के दौरान लव जिहाद के मामले बढ़ जाते हैं और कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते, उन्हें हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने पहचान जांच का भी पक्ष लिया। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने अमृता फडणवीस के बयान का समर्थन किया, लेकिन कहा कि उन्हें कैबिनेट के नव-हिंदुत्ववादियों को भी यही सलाह देनी चाहिए। कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेताओं ने VHP की अपील को असंवैधानिक बताया।
गरबा-डांडिया महाराष्ट्र के शहरों में बड़े सार्वजनिक आयोजन हैं। इनमें सालों से अलग-अलग समुदायों के युवा शामिल होते रहे हैं। VHP का तर्क धार्मिक चरित्र और सांस्कृतिक पहचान बचाने का है। विरोध करने वाले नेता कहते हैं कि सार्वजनिक त्योहारों में धर्म के आधार पर प्रवेश रोकना संवैधानिक समानता और मुंबई की मिश्रित संस्कृति के खिलाफ है। आदित्य ठाकरे ने इस बहस को एक कदम आगे बढ़ाते हुए एकरूप हिंदुत्व की जगह क्षेत्रीय विविधता की बात रखी।
नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगी। आयोजक मंडलों, पुलिस और स्थानीय प्रशासन का रुख अभी साफ नहीं है कि वे VHP की गाइडलाइन मानेंगे या नहीं। फिलहाल यह अपील राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बनी हुई है।
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