महाराष्ट्र: बदहाल शिक्षा व्यवस्था और जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में हिंदी विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया मार्च

शिक्षा बचाने के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान
 छात्र-छात्राओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर "पेपर लीक की सरकार नहीं चलेगी", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो", "लीकतंत्र से लोकतंत्र तक की लड़ाई ज़िंदाबाद", "शिक्षा बचाओ, देश बचाओ", "NTA की जवाबदेही तय करो" जैसे नारों के साथ विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकाला।
छात्र-छात्राओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर "पेपर लीक की सरकार नहीं चलेगी", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो", "लीकतंत्र से लोकतंत्र तक की लड़ाई ज़िंदाबाद", "शिक्षा बचाओ, देश बचाओ", "NTA की जवाबदेही तय करो" जैसे नारों के साथ विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकाला।
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वर्धा- देशभर में शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अव्यवस्था, लगातार हो रहे पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवालों तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगभग पिछले एक माह से जारी आंदोलन के समर्थन में सोमवार को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिरोध मार्च एवं जनसभा का आयोजन किया।

उल्लेखनीय है कि पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर छात्र-युवा संगठनों का आंदोलन लगातार जारी है। इस आंदोलन में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित अनेक छात्र-युवा पिछले 22 दिनों से आमरण भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। इन्हीं मांगों के समर्थन में सोमवार को संसद मार्च का भी आह्वान किया गया था। देशव्यापी प्रतिरोध की इसी कड़ी में हिंदी विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी अपना लोकतांत्रिक समर्थन दर्ज कराया।

शाम 5 बजे आयोजित प्रतिरोध मार्च की शुरुआत सावित्रीबाई फुले महिला छात्रावास से हुई। मार्च में शामिल छात्र-छात्राओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर "पेपर लीक की सरकार नहीं चलेगी", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो", "लीकतंत्र से लोकतंत्र तक की लड़ाई ज़िंदाबाद", "शिक्षा बचाओ, देश बचाओ", "NTA की जवाबदेही तय करो" जैसे नारों के साथ विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकाला। यह मार्च समता भवन पहुंचकर एक जनसभा में परिवर्तित हो गया, जहां छात्रों ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए व्यापक सुधार की मांग की।

जनसभा को संबोधित करते हुए शोधार्थी रामचंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार योजनाबद्ध तरीके से देश की सार्वजनिक वित्तपोषित (Public Funded) शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उनका आरोप था कि सरकारी शिक्षण संस्थानों को संसाधनों से वंचित कर शिक्षा को धीरे-धीरे निजी और कॉरपोरेट संस्थानों के हवाले करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्तर की परीक्षाओं का संचालन NTA जैसी एजेंसी के माध्यम से किए जाने के बाद लगातार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और अनियमितताओं की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद है। यदि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जाएगा तो इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, ग्रामीण, दलित, आदिवासी, पिछड़े और वंचित तबकों के छात्रों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने छात्रों और युवाओं से शिक्षा, समान अवसर और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

सभा में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश का युवा गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था चाहता है। लगातार हो रहे परीक्षा घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य को संकट में डाल दिया है। इसलिए आवश्यक है कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक हस्तक्षेप और निजीकरण से मुक्त कर उसे अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और छात्र-हितैषी बनाया जाए। जनसभा में मुख्य रूप से शोध छात्र नीरज छिलवार, प्रज्ञा, शाल्वी, रविरंजन, शिवपूजन पासी, विवेकानंद, प्रफुल्ल, आलोक आदि ने अपनी बात रखी।

प्रतिरोध मार्च एवं जनसभा में मुख्य रूप से प्रज्ञा, आलोक, शिवपूजन पासी, रविरंजन, राकेश, राजेश सारथी, निरंजन ओबेरॉय, चंदन सरोज, सालवी, अंकिता पटेल, विवेकानंद, सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शिक्षा के अधिकार, सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की रक्षा तथा छात्र हितों के लिए संघर्ष जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ।

 छात्र-छात्राओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर "पेपर लीक की सरकार नहीं चलेगी", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो", "लीकतंत्र से लोकतंत्र तक की लड़ाई ज़िंदाबाद", "शिक्षा बचाओ, देश बचाओ", "NTA की जवाबदेही तय करो" जैसे नारों के साथ विश्वविद्यालय परिसर में मार्च निकाला।
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