
इंदौर- मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर विवादित बयान देकर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इंदौर में सड़क निर्माण के शिलान्यास कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें 'काफिर' कहते हैं, वे भाजपा सरकार द्वारा बनाई गई सड़कों का उपयोग न करें और लाडली बहना-लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ न लें।
गौरतलब है कि विजयवर्गीय इससे पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। इससे पूर्व उन्होंने 'लव जिहाद' को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर उन्हें 'लव जिहाद' का शिकार बनाया जा रहा है। इस बयान पर कांग्रेस ने उनसे माफी मांगने की मांग की थी।
वर्ष 2023 में उन्होंने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि विभाजन के बाद भारत एक 'हिंदू राष्ट्र' है। इस बयान ने भी धार्मिक आधार पर देश की पहचान को लेकर बहस छेड़ दी थी। विजयवर्गीय ने यह भी दावा किया था कि उनके एक मुस्लिम मित्र हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और शिव मंदिर जाते हैं।
आलोचकों का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को धार्मिक पहचान से जोड़ना विविधतापूर्ण समाज के लिए नकारात्मक संदेश है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विजयवर्गीय बार-बार ऐसे बयान देकर समाज में विभाजन पैदा करने का काम कर रहे हैं।
विजयवर्गीय ने रविवार को इंदौर के वार्ड नंबर 1 और 5 में 2.40 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करते हुए यह बयान दिया। उन्होंने कहा, "यहां सड़क बन रही है। यहां हिंदू भाई भी रहते हैं और मुस्लिम भाई भी रहते हैं। कई मुस्लिम भाई हमें 'काफिर' बोलते हैं। अगर हम काफिर हैं और हमने सड़क बनाई है, तो उस पर मत चलो भाई। अगर हम काफिर हैं और आपके घर में लाडली बहना और लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा आ रहा है, तो मत लो।"
हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने कभी किसी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया है। उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के सिद्धांत को दोहराया। विजयवर्गीय ने कहा, "चाहे आप हमें वोट दें या न दें, हमारा काम जनता की सेवा करना है।"
इस बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता जानबूझकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का माहौल बना रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि कोई भी समुदाय राजनीतिक प्रतिनिधियों को उस तरह से संबोधित नहीं करता, जैसा कि विजयवर्गीय ने दावा किया है।
आलोचकों का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को धार्मिक पहचान से जोड़ना विविधतापूर्ण समाज के लिए नकारात्मक संदेश है।
विजयवर्गीय ने अपने बयान में विशेष रूप से मध्य प्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना और लाडली लक्ष्मी योजना का जिक्र किया, जो पात्र महिलाओं और परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं कल्याणकारी शासन का हिस्सा हैं और इन्हें राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
कैलाश विजयवर्गीय इससे पहले भी कई बार खासकर महिलाओं के बारे में विवादित बयान देते रहे हैं।
1. दिसंबर 2025 में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर वे काफी भड़क गए। उन्होंने पत्रकार के सवाल को 'फोकट का प्रश्न' बताया और एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई थी।
2. सितंबर 2025 में शाजापुर की एक जनसभा में उन्होंने राहुल और प्रियंका गांधी की संयुक्त रैली पर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि पुराने जमाने में लोग अपनी बहन के गांव का पानी तक नहीं पीते थे, लेकिन आजकल के विपक्षी नेता (राहुल-प्रियंका) ऐसे हैं कि चौराहे पर अपनी बहन का चुंबन कर लेते हैं। इस बयान को कांग्रेस ने महिला विरोधी करार दिया था।
3. जून 2025 में इंदौर में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि उन्हें कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां पसंद नहीं है। जब वे सेल्फी खिंचवाने आती हैं तो वे उन्हें अच्छे कपड़े पहनकर आने की हिदायत देते हैं।
4. अप्रैल 2023 में हनुमान जयंती पर आयोजित एक समारोह में उन्होंने कम कपड़े पहनने वाली लड़कियों की तुलना 'शूर्पणखा' से कर दी थी। उनके इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई थी।
5. जनवरी 2013- रेप की लगातार बढ़ती घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने जो कहा था उससे काफ़ी विवाद हुआ था। लगातार होती आलोचनाओं के बाद बीजेपी को इस पर सफ़ाई देनी पड़ी थी, तब मीडिया से बात करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था, "एक ही शब्द है मर्यादा. मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो सीता हरण हो जाता है। लक्ष्मण रेखा हर व्यक्ति की खींची गई है। उस लक्ष्मण रेखा को कोई भी पार करेगा, तो रावण सामने बैठा है, वह सीता हरण करके ले जाएगा।"
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