नफरत के गीतों से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स कैसे काट रहे हैं चांदी? भारत में 'हेट म्यूजिक इंडस्ट्री' पर CSOH की यह रिपोर्ट आपको चौंका देगी!

मोनेटाइजेशन का खुलासा करते हुए रिपोर्ट बताती है कि हेट म्यूजिक वीडियोज पर 103 ब्रांड्स के विज्ञापन दिखे, जिनमें 78% वायलेटिव वीडियोज और 83% हिंसा भड़काने वाले गानों पर ऐड्स लगे।
यह रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा हेट म्यूजिक को बढ़ावा देने और उससे मुनाफा कमाने का विस्तृत दस्तावेज है।
यह रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा हेट म्यूजिक को बढ़ावा देने और उससे मुनाफा कमाने का विस्तृत दस्तावेज है।साभार: CSOH रिपोर्ट
Published on

क्या आप जानते हैं कि “गौ माता” गाने में एक समुदाय विशेष को “क*$” कहकर उन्हें जलाने की धमकी दी जाती है, जो इंस्टाग्राम पर 40,000 से ज्यादा रील्स में इस्तेमाल हो चुका है? या “जो भी सामने उसको चीरेंगे और फाड़ेंगे” जैसे गाने यूट्यूब पर लाखों बार देखे जा रहे हैं?

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट (CSOH) की रिपोर्ट 'Profiting from Hate Music' ने 15 जून को जो तथ्य सामने रखे हैं, वे बेहद गंभीर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यूट्यूब, मेटा, स्पॉटिफाई और एप्पल म्यूजिक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर 523 हिंदुत्व-पॉप (H-Pop) गाने पहचाने गए हैं, जो इन प्लेटफॉर्म्स की अपनी कंटेंट पॉलिसी का उल्लंघन करते हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों, मुख्य रूप से मुसलमानों के खिलाफ घृणा, अपमान और हिंसा को बढ़ावा देते हैं।

इनमें यूट्यूब पर 210 गाने हैं, जिन्हें 198 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है। मेटा म्यूजिक लाइब्रेरी के 103 गानों को 5.9 मिलियन से अधिक इंस्टाग्राम रील्स में इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट में कुल 263 गाने (50%) ऐसे हैं जो सीधे हिंसा का आह्वान करते हैं।

बड़ी टेक कंपनियां इन गानों पर चैट जीपीटी, अमेज़न प्राइम, फ्लिपकार्ट, Levi’s, केल्लोग्स और आरबीआई जैसे ब्रांड्स के विज्ञापन चला रही हैं, जबकि कई कलाकार 'सुपर थैंक्स' और मोनेटाइजेशन के जरिए कमाई कर रहे हैं।

वाशिंगटन डीसी स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट (सीएसओएच) द्वारा जारी रिपोर्ट 'प्रॉफिटिंग फ्रॉम हेट म्यूजिक' ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के लेखक कुणाल पुरोहित (जो 'H-Pop: The Secretive World of Hindutva Pop Stars' किताब के लेखक भी हैं), तविशी और हमाद मीर हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यूट्यूब, मेटा (इंस्टाग्राम), स्पॉटिफाई और एप्पल म्यूजिक जैसे प्लेटफॉर्म्स हिंदुत्व-पॉप या एच-पॉप नामक हेट म्यूजिक को न केवल होस्ट कर रहे हैं, बल्कि उसकी अनियंत्रित पहुंच और प्रसार से खुद मुनाफा भी कमा रहे हैं, जबकि ये अपनी कंटेंट पॉलिसी का खुले तौर पर उल्लंघन करते हैं।

रिपोर्ट में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ बढ़ती नफरत की बात की गई है। इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2023 के बाद हेट स्पीच इंसिडेंट्स में 97% की वृद्धि हुई है। संयुक्त राष्ट्र की हेट स्पीच परिभाषा के अनुसार, यह म्यूजिक धार्मिक पहचान के आधार पर हमला करता है, अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करता है और हिंसा को बढ़ावा देता है। एच-पॉप हिंदू राष्ट्रवाद को बढ़ावा देता है, मुसलमानों और ईसाइयों को दुश्मन साबित करता है, उन्हें इंसान की बजाय पाश्विक तौर पर प्रस्तुत करता है और हिंदू श्रेष्ठता का प्रचार करता है, जो भारत के संवैधानिक बहुलतावाद के खिलाफ है।

स्टडी के लिए चुने गए ये 4 प्लेटफॉर्म्स

इस स्टडी के लिए यू ट्यूब , स्पोटीफाई, एप्पल म्यूजिक और मेटा की म्यूजिक लाइब्रेरी चुना गया था। इन प्लेटफ़ॉर्म्स पर कुल 523 ऐसे गाने मिले जो प्लेटफ़ॉर्म्स की अपनी कंटेंट पॉलिसी और गाइडलाइंस का उल्लंघन करते थे; इनमें से 210 यू ट्यूब पर, 109 स्पोटीफाई पर, 103 Meta की म्यूजिक लाइब्रेरी पर और 101 एप्पल म्यूजिक पर थे।

2024 में उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक हिंदू जुलूस के दौरान हिंसा भड़की जिसमें कई संपत्तियों को नुकसान पहुँचा और एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई क्योंकि जुलूस में शामिल लोगों ने स्थानीय मुस्लिम निवासियों के विरोध के बावजूद मुसलमानों के खिलाफ़ हिंसा का संकेत देने वाला गाना बजाने पर ज़ोर दिया।

कैसे हुई Hate Music की उत्पत्ति

सीएसओएच रिपोर्ट के अनुसार, हेट म्यूजिक की परंपरा वैश्विक है। 1980 के दशक में ब्रिटेन के स्क्रूड्राइवर बैंड ने व्हाइट पावर म्यूजिक की शुरुआत की, जो व्हाइट सुप्रीमेसी और नस्लीय घृणा को बढ़ावा देता था। यह अमेरिका में मल्टी-मिलियन डॉलर उद्योग बन गया। रवांडा में गायक साइमन बिकिंडी के गानों ने 1994 के नरसंहार को उकसाया, जबकि म्यांमार में ऐसे गानों ने रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा में भूमिका निभाई। भारत में पिछले दशक में हिंदुत्व विचारधारा से प्रेरित हेट म्यूजिक (हिंदुत्व-पॉप या एच-पॉप) तेजी से बढ़ा है, जो धार्मिक अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफरत, अमानवीयता और हिंसा भड़काता है। राम नवमी और अन्य त्योहारों के दौरान इन गानों के बजने से कई बार सांप्रदायिक हिंसा हुई है।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यूट्यूब, मेटा (इंस्टाग्राम), स्पॉटिफाई और एप्पल म्यूजिक जैसे प्लेटफॉर्म्स हिंदुत्व-पॉप या एच-पॉप नामक हेट म्यूजिक को न केवल होस्ट कर रहे हैं, बल्कि उसकी अनियंत्रित पहुंच और प्रसार से खुद मुनाफा भी कमा रहे हैं, जबकि ये अपनी कंटेंट पॉलिसी का खुले आम उल्लंघन करते हैं।

शोधकर्ताओं के मुख्य निष्कर्ष

सीएसओएच अध्ययन में यूट्यूब, स्पॉटिफाई, एप्पल म्यूजिक और मेटा म्यूजिक लाइब्रेरी पर कुल 523 हिंदुत्व पॉप हेट सॉन्ग्स की पहचान की गई, जो सभी प्लेटफॉर्म्स की अपनी कंटेंट पॉलिसी का उल्लंघन करते हैं। ये गाने धार्मिक अल्पसंख्यकों, मुख्य रूप से मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ घृणा, मानवता-विरोधी भाषा और हिंसा भड़काने का काम करते हैं। इनमें यूट्यूब पर 210 गाने, स्पॉटिफाई पर 109 गाने (53 कलाकार), मेटा म्यूजिक लाइब्रेरी पर 103 गाने और एप्पल म्यूजिक पर 101 गाने (59 कलाकार) शामिल हैं। यूट्यूब के इन गानों को 198 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है, जबकि मेटा पर ये गाने 5.9 मिलियन से अधिक इंस्टाग्राम रील्स में इस्तेमाल हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से आधे गाने (263 यानी 50%) सीधे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की धमकी या उकसावा देते हैं, जबकि बाकी 260 गाने गालियां, अपमान और dehumanization के जरिए घृणा फैलाते हैं। तीन यूट्यूब चैनल अकेले पहचाने गए हेट सॉन्ग्स का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा होस्ट करते हैं, फिर भी वे verified अकाउंट्स के रूप में चल रहे हैं, पैसे कमा रहे हैं और अपने सब्सक्राइबर्स बढ़ा रहे हैं।

मोनेटाइजेशन का खुलासा करते हुए रिपोर्ट बताती है कि हेट म्यूजिक वीडियोज पर 103 ब्रांड्स के विज्ञापन दिखे, जिनमें 78% वायलेटिव वीडियोज और 83% हिंसा भड़काने वाले गानों पर ऐड्स लगे। इन ब्रांड्स में OpenAI का ChatGPT, Google का NotebookLM, अमेजन प्राइम, एडोब, डेल, Levi’s, केल्लोग, फ्लिपकार्ट और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया शामिल हैं। यूट्यूब के “Super Thanks” फैन-फंडिंग फीचर 55 प्रतिशत वायलेटिव वीडियोज पर सक्रिय है। मयूर म्यूजिक चैनल, जो 25 हेट सॉन्ग्स होस्ट करता है, को यूट्यूब का Silver Creator Award भी मिला है। मेटा पर अध्ययन किए गए 30 प्रमुख हिंदुत्व पॉप सिंगर्स में से 20 के फेसबुक अकाउंट्स मोनेटाइज्ड पाए गए।

यूट्यूब का भारत में सबसे बड़ा मार्केट (500 मिलियन यूजर्स) है। हेट स्पीच पॉलिसी के बावजूद कई गाने हिंसा भड़काते हैं
यूट्यूब का भारत में सबसे बड़ा मार्केट (500 मिलियन यूजर्स) है। हेट स्पीच पॉलिसी के बावजूद कई गाने हिंसा भड़काते हैंसाभार: CSOH रिपोर्ट

रिपोर्टिंग और एन्फोर्समेंट की स्थिति बेहद खराब है। अक्टूबर 2025 में डेटासेट के 43 प्रतिशत यानी 225 गानों को चारों प्लेटफॉर्म्स पर रिपोर्ट किया गया, लेकिन मई 2026 तक 92 प्रतिशत (207 गाने) अभी भी लाइव थे और केवल 8 प्रतिशत (18 गाने) हटाए गए। यूट्यूब और मेटा की तुलना में स्पॉटिफाई और एप्पल म्यूजिक में रिपोर्टिंग टूल्स बेहद कमजोर हैं: स्पॉटिफाई पर एक गाने की रिपोर्ट लाइव चैट से करने में 33 मिनट से ज्यादा समय लगता है। कुल मिलाकर एन्फोर्समेंट सतही और आसानी से चकमा देने योग्य है। उदाहरण के लिए, सिंगर संदीप आचार्य के अकाउंट्स को कम से कम तीन बार सस्पेंड किया जा चुका है, फिर भी उनके 26 हेट गानों में से 21 अन्य यूट्यूब चैनल्स पर उपलब्ध हैं।

तीन यूट्यूब चैनल्स (संगम धुन, मयूर म्यूजिक, प्रेम कृष्णवंशी ऑफिशियल) अकेले 40% से ज्यादा हेट सॉन्ग्स होस्ट करते हैं। संग्राम धुन पर 46 सॉन्ग्स हैं, मयूर म्यूजिक (सिल्वर क्रिएटर अवॉर्ड विजेता) पर 25। कई आर्टिस्ट्स जैसे संदीप आचार्य के चैनल्स बार-बार बंद होने के बावजूद नए अकाउंट्स से कंटेंट जारी रखते हैं।

एक हेट सोंग चैनल पर टाटा के तनिष्क जेवेलरी ब्रांड का विज्ञापन
एक हेट सोंग चैनल पर टाटा के तनिष्क जेवेलरी ब्रांड का विज्ञापन साभार: CSOH रिपोर्ट

ऑनलाइन गानों के हो सकते हैं गंभीर ऑफ़लाइन नतीजे

रिपोर्ट कहती है कि आज भारत में जहाँ सरकार ने लगातार राजनीतिक नफ़रत भरे भाषणों को बढ़ावा दिया है और नफ़रत फैलाने वालों का हौसला बढ़ाया है, ऐसा सिस्टम यह पक्का करता है कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाली नफ़रत की जगह बन जाएँ। जहाँ हिंदुत्व पॉप हेट म्यूज़िक पनपा है, वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों को लगातार अपमान, खत्म करने की धमकियों और बेरहम हिंसा के उकसावे का सामना करना पड़ता है, जो उनके डिजिटल माहौल में भरा हुआ है। इसके गंभीर ऑफ़लाइन नतीजे भी होते हैं; जैसे, धार्मिक जुलूसों के दौरान हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा ऐसा संगीत बजाने से डर का माहौल बनता है और हिंसा के सार्वजनिक प्रदर्शन को बढ़ावा मिलता है।

हिंदुत्व पॉप हेट म्यूज़िक को होस्ट करने वाले प्लेटफ़ॉर्म तेज़ी से ऑफ़लाइन हिंसा की घटनाओं में शामिल हो रहे हैं; इसमें यूज़र्स को पहले कलाकारों द्वारा बनाया गया कंटेंट दिखाया जाता है, जिसे बाद में सामान्य मान लिया जाता है और धार्मिक अल्पसंख्यकों के नुकसान की कीमत पर मनोरंजन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इस संगीत की वजह से अल्पसंख्यक समुदायों के ख़िलाफ़ असल दुनिया में हिंसा हो चुकी है। इस संकट से निपटने के लिए प्लेटफ़ॉर्म, रेगुलेटर और सिविल सोसाइटी की तरफ़ से तुरंत और मिलकर जवाबदेही तय करने की ज़रूरत है, ताकि नफ़रत भरे संगीत से भड़कने वाली हिंसा और ज़्यादा खून-खराबे और नुकसान में न बदल जाए।

शोधकर्ताओं ने ये दिए सुझाव: क्या किया जाए

1. प्लेटफॉर्म गाइडलाइंस का प्रभावी क्रियान्वयन एप्पल म्यूजिक को छोड़कर यूट्यूब, स्पॉटिफाई और मेटा ने घृणास्पद कंटेंट पर रोक लगाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन इनकी कोई सार्थक Enforcement नहीं हो रही है। प्लेटफॉर्म्स को धार्मिक आधार पर घृणा, dehumanization और हिंसा भड़काने वाले कंटेंट के खिलाफ लगातार और सक्रिय रूप से कार्रवाई करनी चाहिए।

2. बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हर प्लेटफॉर्म पर कुछ कलाकार और चैनल बार-बार हेट स्पीच गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, यूट्यूब पर संगम धुन चैनल 46 हेट गाने होस्ट करता है, फिर भी चल रहा है और नए सब्सक्राइबर्स बढ़ा रहा है। सभी प्लेटफॉर्म्स को ऐसे रीपीट ऑफएंडर्स की पहचान कर उन्हें systematically demonetize और ससपेंड करना चाहिए।

3. नफरत की बदलती भाषा की पहचान हेट फैलाने वाले “सांप”, “टॉपी वाले”, “गद्दार” और “देशद्रोही” जैसे कोडेड शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जो ऑटोमेटेड सिस्टम को आसानी से चकमा दे देते हैं। प्लेटफॉर्म्स को भारतीय भाषाओं में बेहतर ट्रेनिंग, मानव मॉडरेटर्स और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि नफरत की नई भाषा को पहचाना और रोका जा सके।

4. इरादतन मॉडरेशन (Moderation with Intent) जब प्लेटफॉर्म्स कार्रवाई करते भी हैं तो वह आंशिक और अपर्याप्त होती है। संदीप आचार्य के चैनल कई बार बंद हुए, लेकिन उनके 26 में से 21 गाने अन्य चैनल्स पर उपलब्ध हैं। प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ अकाउंट नहीं, बल्कि पूरे कंटेंट को हटाना चाहिए।

5. मेटा म्यूजिक लाइब्रेरी और रील्स में मजबूत निगरानी मेटा को म्यूजिक लाइब्रेरी और रील्स में सक्रिय रूप से हेट ऑडियो की पहचान, हटाने और उनके रीयूज पर रोक लगानी चाहिए। एक बार गाना फ्लैग होने पर सभी रील्स की समीक्षा होनी चाहिए।

6. आसान रिपोर्टिंग और जवाबदेही रिपोर्टिंग सिस्टम जटिल और समय लेने वाले हैं। स्पॉटिफाई पर एक रिपोर्ट करने में 33 मिनट लगते हैं। प्लेटफॉर्म्स को आसान, स्पष्ट और लोकल भाषाओं में रिपोर्टिंग व्यवस्था बनानी चाहिए तथा रिपोर्ट मिलने पर पुष्टि, स्टेटस अपडेट और जवाब देना चाहिए।

7. नियमित ट्रांसपेरेंसी रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट मॉडरेशन, टेकडाउन, मोनेटाइजेशन और ऑटोमेटेड टूल्स की प्रभावशीलता पर विस्तृत और नियमित रिपोर्ट जारी करनी चाहिए, खासकर भारतीय भाषाओं और संदर्भ में।

8. एल्गोरिदम, मोनेटाइजेशन और पारदर्शिता सिफारिशों में एल्गोरिदम ऑडिट, मोनेटाइजेशन की पारदर्शिता, एग्रीगेटर्स की जिम्मेदारी और विज्ञापनदाताओं को जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात की गई है ताकि हेट कंटेंट को profit और amplification न मिले।

ये सिफारिशें प्लेटफॉर्म्स से तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग करती हैं।

पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें:

Attachment
PDF
profiting_from_hate_music_csoh-1
Preview
यह रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा हेट म्यूजिक को बढ़ावा देने और उससे मुनाफा कमाने का विस्तृत दस्तावेज है।
भारत में AI जनित इमेज कैसे फैला रही हैं इस्लामोफोबिया की आग? अमेरिका की CSOH ने किया चौंकाने वाला विश्लेषण
यह रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा हेट म्यूजिक को बढ़ावा देने और उससे मुनाफा कमाने का विस्तृत दस्तावेज है।
इस्लामोफोबिया: क्या ओला ड्राइवर मुस्लिम पैसेंजर को धमका रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट का ओला CEO को पत्र, जानिए पूरा मामला
यह रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा हेट म्यूजिक को बढ़ावा देने और उससे मुनाफा कमाने का विस्तृत दस्तावेज है।
बेंगलुरु: PES यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर ने मुस्लिम छात्र को कहा ‘आतंकवादी’: पुलिस ने सु-मोटो FIR दर्ज की, प्रोफेसर निलंबित
यह रिपोर्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा हेट म्यूजिक को बढ़ावा देने और उससे मुनाफा कमाने का विस्तृत दस्तावेज है।
“जुर्म मेरा यह कि मैं ढाढ़ी और सर पर टोपी लेकर शोरूम पर बैठा हूं...": जुहू में मुस्लिम दुकानदार पर ग्राहक महिलाओं का नफरती हमला | जानिये क्या है मामला

द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.

द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com