राजस्थान के दलित पुजारी का मोहन भागवत को पत्र: "आप जाति भेदभाव के विरुद्ध हैं लेकिन RSS के स्वयंसेवकों ने मेरा..."

पुजारी विष्णु कुमार ने आरोप लगाया कि समरसता और हिंदू एकता की बात करने वाले संगठन के कुछ स्थानीय कार्यकर्ता व्यवहार में जातिवादी रवैया अपना रहे हैं और उनके पैतृक मंदिर को हड़पने का षड्यंत्र रच रहे हैं ।
पुजारी ने बताया कि हमले के बाद स्थानीय संघ कार्यकर्ताओं ने एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर पर कब्जे की कोशिशें तेज कर दीं। पुजारी ने  कहा कि जब गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, तो ‘सकल हिंदू समाज’ के नाम पर उन्हीं दलितों के खिलाफ महापंचायत की गई।
पुजारी ने बताया कि हमले के बाद स्थानीय संघ कार्यकर्ताओं ने एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर पर कब्जे की कोशिशें तेज कर दीं। पुजारी ने कहा कि जब गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, तो ‘सकल हिंदू समाज’ के नाम पर उन्हीं दलितों के खिलाफ महापंचायत की गई।एआई निर्मित सांकेतिक चित्र
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भीलवाड़ा-  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा लगातार ‘एक मंदिर, एक कुआं, एक शमशान’ और समाज में समरसता की वकालत करने के बीच राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दलित पुजारी ने आरोप लगाया है कि संघ के स्थानीय कार्यकर्ता उनके पैतृक मंदिर को हड़पने का षड्यंत्र रच रहे हैं और जातिसूचक गालियां देते हुए उन पर जानलेवा हमला किया है। पीड़ित ने खुद सरसंघचालक को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

आसींद तहसील के गांव बराना के निवासी विष्णु कुमार ने अपने पत्र में बताया कि वे ‘श्री खाकुल देव जी’ मंदिर के पुजारी हैं। यह मंदिर करीब 400 साल पहले उनके पूर्वजों द्वारा स्थापित किया गया था। विष्णु कुमार के अनुसार, वर्ष 2023 से शराब कारोबारी संपत जाट, जो संघ के सक्रिय स्वयंसेवक हैं, उनके खिलाफ विवाद खड़ा कर रहे हैं।

आरोप है कि 14 अगस्त 2025 को संपत जाट के नेतृत्व में संघ के कई कार्यकर्ता और ग्रामीण मंदिर परिसर में घुस आए । विष्णु कुमार का आरोप है, "उन लोगों ने हम पर हमला किया, मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं। मंदिर में जबरन एक दान पात्र रख दिया और कहा कि अब से यहां दलित पुजारी का कोई काम नहीं है।" इस घटना में उनके पिता श्रवण लाल और परिवार के अन्य सदस्यों को भी पीटा गया।

स्थानीय भाजपा विधायक जबर सिंह का इन दलित विरोधी संघ स्वयंसेवकों को संपूर्ण समर्थन प्राप्त होने के चलते कोई कार्यवाही नहीं की गई तथा बाद में अनुसूचित जाति के संगठनों द्वारा आवाज उठाने पर पुलिस जांच की गई और पुलिस जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद भी दलित उत्पीइन के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई, उन्हें खुलेआम घूमने-फिरने की ढील दी गई। अंततः आरोपियों ने हाईकोर्ट राजस्थान से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया और अब फिर से हमारे पर अत्याचार कर रहे है।
पुजारी विष्णु कुमार

पीड़ित ने बताया कि हमले के बाद स्थानीय संघ कार्यकर्ताओं ने एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर पर कब्जे की कोशिशें तेज कर दीं। विष्णु कुमार ने चिंता जताते हुए कहा कि जब गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, तो ‘सकल हिंदू समाज’ के नाम पर उन्हीं दलितों के खिलाफ महापंचायत की गई।

उन्होंने सरसंघचालक से सीधा सवाल पूछते हुए कहा, "आप ऊपर समरसता की बात करते हैं, लेकिन आपके कार्यकर्ता नीचे उल्टा कर रहे हैं।" विष्णु कुमाल ने आरएसएस प्रमुख से प्रार्थना की है कि वे कार्यकर्ताओं को दलित पुजारी से मंदिर छीनने से रोकें और भाजपा सरकार से मंदिर उन्हें वापस सौंपने का आग्रह करें।

विष्णु कुमार ने प्रशासन पर भी निष्क्रियता का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने और जांच में आरोप प्रमाणित होने के बावजूद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया।  उल्टे आरोपियों ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक ले ली है और अब वे फिर से उत्पीड़न कर रहे हैं।

पत्र में बताया गया कि "संघ के जातिवादी स्वयंसेवकों द्वारा पैदा किए गए विवाद की आड़ में राजस्थान की भाजपा सरकार ने भाजपा विधायक जबर सिंह और प्रशासन की मदद से हम दलित पुजारियों से श्री खाकुल देव मंदिर जो कि हमारे पूर्वजों ने बनाया था और जो हमारा निजी मंदिर है, उसे रिसीवरी में लेकर तहसीलदार के अधीन करके हमसे हड़प लिया है, अब न थाना, न पुलिस, न तहसीलवार, न प्रशासन और न ही कोर्ट और न ही भाजपा सरकार हमारी बात सुनती है. अब मंदिर में जाने और पूजा करने पर हमारे खिलाफ यही संघ के स्वयंसेवक संपत जाट और उनका पूरा समूह हमारे खिलाफ झूठी शिकायतें करता है" पुजारी ने स्थानीय थाने सीआई की भी मनमानी कारवाई की शिकायत की।

अपने पत्र में पुजारी विष्णु कुमार ने लिखा, " मैं विष्णु कुमार जो कि वर्तमान में पुजारी हूं और हिंदू समाज का खुद को अंग मानता हूं तथा हिंदू रीति रिवाज से श्री खाकुल देव जी के मंदिर की पूजा-पाठ करता हूं, मैंने आर्सीद से लेकर भीलवाड़ा तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों के पास जा कर अपनी पीड़ा बताई तथा उन्हें कहा कि आपके संघ के शिक्षित स्वयंसेवक मुझ दलित पुजारी से मंदिर हड़प रहे है, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की, इसलिए विवश होकर मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं, आप संपूर्ण हिंदू समाज की बात करते है और समरसता की बात कहते है, आप जाति भेदभाव के विरुद्ध है तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक कुंआ, एक शमशान एक मंदिर का अभियान चला रहा है लेकिन मुझ दलित पुजारी से संघ के ही स्वयंसेवकों ने मेरा अपना मंदिर हड़प लिया है और अब मुझे व मेरे परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजना चाहते है और जान से मार डालना चाहते है। आप जो बातें ऊपर कह रहे है, आपके स्वयंसेवक नीचे उसके ठीक विपरीत आचरण कर रहे है।

आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि 'सकल हिंदू समाज' के नाम पर मुझे आतंकित करना बंद करवाए, स्वयंसेवकों को रोके कि मुझ दलित पुजारी से मंदिर न छीने तथा राजस्थान की भाजपा सरकार से कहे कि वे मंदिर से रिसिवरी हटाकर मंदिर वापस हम दलितों को सौंपे और आरोपी स्वयंसेवकों के खिलाफ पुलिस व कानूनी कार्यवाही होने दे ताकि हम हिंदू के रूप में जीवन जी सकें।"

राजस्थान में जातिगत हिंसा

राजस्थान में दलित समुदाय लंबे समय से सामाजिक बहिष्कार,मंदिर प्रवेश पर रोक और हिंसक हमलों का शिकार रहा है. जुलाई 2025 तक, राजस्थान पुलिस की मासिक रिपोर्ट में दलितों के खिलाफ 3651 अत्याचार के मामले दर्ज किए गए, जिनमें 44 हत्याएं और 325 बलात्कार शामिल हैं.आसींद क्षेत्र में मेघवंशी समुदाय विशेष रूप से उत्पीड़न का शिकार है और प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई का अभाव इसे और बढ़ावा दे रहा है।

पुजारी ने बताया कि हमले के बाद स्थानीय संघ कार्यकर्ताओं ने एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर पर कब्जे की कोशिशें तेज कर दीं। पुजारी ने  कहा कि जब गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, तो ‘सकल हिंदू समाज’ के नाम पर उन्हीं दलितों के खिलाफ महापंचायत की गई।
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