
मुंबई- मुंबई के जुहू इलाके में बीते शनिवार शाम साढ़े तीन बजे मन्नत एथनिक डिजाइनर शोरूम में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। शोरूम के मालिक रफात हुसैन का आरोप है कि चार महिलाएं शादी के कपड़े खरीदने आईं और फिर उनकी धार्मिक पहचान को लेकर कथित तौर पर हमला बोल दिया, धक्का मुक्की की। जब रफात हुसैन शिकायत दर्ज कराने सांता क्रूज़ पुलिस स्टेशन गए, तो लगभग 150 हिंदुत्व समर्थकों ने स्टेशन को घेर लिया, उनपर हमला करने की कोशिश की और वहाँ हंगामा खड़ा कर दिया। पीड़ित की सुरक्षा करने के बजाय सिस्टम ने उल्टा उनके ख़िलाफ़ ही FIR दर्ज कर लिया।
मुम्बई टीवी से बातचीत में रफात हुसैन ने बताया कि शनिवार को शाम साढ़े तीन बजे चार महिलाएं शोरूम पर आईं। उन्होंने कहा, “हमारे घर में शादी है और शादी के लिए शेरवानी चाहिए।” हुसैन उन्हें कपड़े दिखाने लगे और बातचीत सामान्य तरीके से चल रही थी।
धीरे-धीरे महिलाओं ने कुछ ऐसे शब्द बोलने शुरू कर दिए जिनसे हुसैन को शक होने लगा कि कहीं उनके साथ कुछ गलत तो नहीं होने वाला। अचानक चारों महिलाएं बहस करने लगीं और बोलीं- “तुम मुसलमान हो, तुम लोग ऐसे ही रहते हो और गलत तरीके से काम करती हो।” इसके बाद चारों महिलाएं उन पर टूट पड़ीं। उन्होंने धार्मिक गालियां दीं, धक्का मुक्की और बदतमीजी की।
हुसैन किसी तरह खुद को बचाकर पुलिस स्टेशन भागे। उन्होंने वहां अधिकारी को पूरी घटना बताई। इतने में 150 लोगों की भीड़ जमा हो गई। हुसैन के अनुसार 20-30 लड़के पुलिस स्टेशन के अंदर भी घुस आए। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित किया, लेकिन शिकायतकर्ता रफात हुसैन के खिलाफ ही FIR दर्ज कर ली गई।
उन्होंने बताया कि इस घटना से वे बुरी तरह सहम गए हैं। उन्होंने कहा, "मुझे डर है कि जब मैं शोरूम में बैठा होऊँगा, तो कोई भीड़ अंदर घुस सकती है और कोई अनहोनी घटना हो सकती है।" हुसैन ने आगे बताया कि उन्हें लगभग पाँच घंटे तक पुलिस स्टेशन में रुकना पड़ा, जिस दौरान उनका शोरूम बिना किसी देखरेख के खाली रहा।
हुसैन ने मामले को संभालने में पुलिस की लापरवाही का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि थाने से हीउन्होंने पूर्व विधायक वारिस पठान को फ़ोन किया और उन्हें पूरी घटना के बारे में बताया। इसके बाद पठान ने स्टेशन ड्यूटी ऑफ़िसर भूषण मोरे से बात की। हुसैन के अनुसार, ऑफ़िसर ने पुलिस स्टेशन के बाहर किसी भीड़ के जमा होने की बात से इनकार किया। पुलिस के इस जवाब पर हैरानी जताते हुए हुसैन ने कहा, "बाहर जमा हुई इतनी बड़ी भीड़ के होने से पुलिस कैसे इनकार कर सकती है? यहाँ तक कि 25-30 युवाओं में मुझे नुकसान पहुँचाने के लिए स्टेशन के अंदर घुसने की हिम्मत थी।"
हुसैन का यकीनन मानना है कि यह हमला पहले से सोची-समझी साज़िश के तहत किया गया था। उन्होंने कहा, "देश भर में मुस्लिम समुदाय के साथ जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए यह घटना पहले से तय की गई साज़िश लगती है।" उन्होंने सवाल उठाया कि जो महिलाएँ सिर्फ़ शादी के कपड़े खरीदने आई थीं, वे 150 लोगों की भीड़ के साथ पुलिस स्टेशन कैसे पहुँच गईं। उन्होंने आगे कहा, "मुझे पक्का यकीन है कि मुझे नुकसान पहुँचाने के लिए किसी ने सुपारी दिया था, लेकिन किस्मत से मैं भागकर पुलिस स्टेशन पहुँच गया और बच गया।"
जब CCTV फ़ुटेज के बारे में पूछा गया, तो हुसैन ने बताया कि दुकान में पहले लगी आग की वजह से उनके कैमरे काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा, "अब मैंने उन्हें ठीक करवा लिया है।" 12-15 साल से इस कारोबार में लगे दुकानदार ने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें पहले कभी ऐसी घटना का सामना नहीं करना पड़ा। वे कहते हैं " मैंने कोई जुर्म नहीं किया है लेकिन मुझे अब डर लगता रहता है कि कभी भी 20-25 जनें मेरे शोरूम में घुस कर मेरे साथ कोई हादसा कर दें।" हुसैन यह भी कहते हैं अगर उन्होंने मुस्लिम नेताओं से बात कर बीच बचाव ना करवाया होता तो शायद उनके साथ मारपीट होकर वे अस्पताल में होते।
हुसैन की आपबीती का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे लोगों में काफ़ी गुस्सा है और सांप्रदायिक आधार पर निशाना बनाने और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई यूज़र्स ने निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच की माँग की है। मुस्लिम संगठनों ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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