वर्ण व्यवस्था की पैरोकार मेघा लवारिया बोली- "फाइनेंस काम से शूद्र, झाड़ू लगाऊँगी तो वैश्य"; खुद माना कभी वेद-पुराण और मनुस्मृति नहीं पढ़ी!

Social Copyright By Shweta Jaya Podcast में 'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' नारा लगाने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मेघा लवारिया की अज्ञानता की पोल खुली, सवालों के आगे घुटने टेक दिए!
'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' का नारा लगाकर रातोंरात फेमस हुईं इस नॉन-ब्राह्मण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मेघा (R) को पत्रकार श्वेता जया के लॉजिकल सवालों के आगे कुछ भी जवाब नहीं सूझा।
'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' का नारा लगाकर रातोंरात फेमस हुईं इस नॉन-ब्राह्मण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मेघा (R) को पत्रकार श्वेता जया के लॉजिकल सवालों के आगे कुछ भी जवाब नहीं सूझा। Social Copyright By Shweta Jaya
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दिल्ली- दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के 13 फरवरी वाले एक विवादित प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर छाई 22 साल की मेघा लवारिया अब एक बड़े पॉडकास्ट में पूरी तरह एक्सपोज हो गई हैं। 'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' का नारा लगाकर रातोंरात फेमस हुईं इस नॉन-ब्राह्मण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को पत्रकार श्वेता जया के लॉजिकल सवालों के आगे कुछ भी जवाब नहीं सूझा। एक घंटे से ज्यादा चली इस पॉडकास्ट में मेघा ने अपना बैकग्राउंड बताया, लेकिन जब स्क्रिप्चर्स, मनुस्मृति, वर्ण व्यवस्था और संविधान पर सवाल आए तो उनकी अज्ञानता साफ झलक गई। मेघा की बेतुकी और हास्यस्पद बयानों के कई क्लिप अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे हैं जिन्हें देखकर लोग पत्रकार श्वेता जया की वाहवाही कर रहे हैं, साथ ही बिना किसी ज्ञान के सिर्फ सुनी सुनाई बातों के आधार पर 'प्रोवोकेटिव स्लोगनीरिंग' से हेट क्राइम्स को बढ़ावा देने वाले मेघा जैसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों के प्रभाव में नहीं आने की अपील कर रहे हैं।

पॉडकास्ट की शुरुआत में मेघा ने बताया, "मैं राजस्थानी फैमिली से हूं, DU से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स की ग्रेजुएशन की है। मैं स्टूडेंट नहीं, पढ़कर निकल चुकी हूं। अपना चैनल है 'डेली न्यूज इंडिया' (RNI रजिस्टर्ड)। मैं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हूं, पब्लिक ओपिनियन रखती हूं।" उन्होंने अपनी जाति बताने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि अपनी जाति नहीं बताऊंगी क्योंकि इस देश में जाति को लेकर ही बवाल मचा हुआ है। मैं सनातनी हूं, हिंदू हूं और भारतीय हूं। इतना काफी है।”

'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' का नारा लगाकर रातोंरात फेमस हुईं इस नॉन-ब्राह्मण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मेघा (R) को पत्रकार श्वेता जया के लॉजिकल सवालों के आगे कुछ भी जवाब नहीं सूझा।
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'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' नारा क्यों लगाया?

श्वेता जया ने मेघा से पूछा कि 'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' नारे के पीछे मकसद क्या था? प्रोवोकेशन था, एक्सपेरिमेंट था या आइडियोलॉजिकल पोजीशन?” मेघा ने जवाब दिया कि “ये सिर्फ एक अग्रेशन था प्रशासन के खिलाफ। ये वही JNU की ढपली गैंग है, टुकड़े-टुकड़े गैंग है जो भारत तोड़ने की बात करती है। वे दीवारों पर लिखते हैं – हिंदू हिंदुत्व मुर्दाबाद, ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद, बनिया भारत छोड़ो। पुलिस प्रोटेक्शन में उनको रखा था, तो मैंने बाइक पर खड़े होकर नारा लगाया। मेरे साथ ABVP के स्टूडेंट्स थे, रूचि तिवारी के सपोर्ट में।”

श्वेता ने जब पूछा कि “क्या ये नारा हिस्टोरिकली ऑप्रेस्ड कम्युनिटी को हर्ट नहीं करता?”

मेघा बोली, “कौन सी हिस्टोरिकली ऑप्रेस्ड कम्युनिटी? मैं चार वर्ण मानती हूं – ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र, वैश्य। कोई दलित नहीं होता। वाल्मीकि समाज के लोग खुद मेरे पास आए और बोले – बहुत अच्छा काम किया।”

अगर मैं सुबह उठकर पूजा कर रही हूं तो मैं ब्राह्मणों में आऊंगी। अगर जहां मुझे जरूरत पड़ रही है मैं शस्त्र उठा रही हूं तो मैं क्षत्रियों में आऊंगी। मैं अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए अगर कुछ काम कर रही हूं तो मैं शूद्र में आऊंगी और अगर मैं अपने ही घर की साफ सफाई कर रही हूं या बाहर भी साफ सफाई कर रही हूं कहीं जाकर तो मैं वैश्य में आऊंगी। एक इंसान के अंदर ही चारों वर्ण है।
मेघा लवारिया

वर्ण व्यवस्था vs जाति व्यवस्था पर भारी बहस

श्वेता: “आप जातिवाद के खिलाफ हैं लेकिन वर्ण व्यवस्था मानती हैं। दोनों में फर्क बताइए।”

मेघा: “वर्ण व्यवस्था में एक इंसान के अंदर चारों वर्ण हैं। सुबह पूजा कर रही हूं तो ब्राह्मण, शस्त्र उठाया तो क्षत्रिय, फाइनेंशियल काम कर रही हूं तो शूद्र, साफ-सफाई की तो वैश्य। हम चारों भाई हैं, टूटने की जरूरत नहीं।”

श्वेता: आपको लगता है कि मनुस्मृति में ऐसा था कि कोई सुबह में ब्राह्मण है, दोपहर में क्षत्रिय शाम को...

मेघा: सनातन धर्म में ऐसा है, सनातन धर्म को डिस्क्राइब करने के लिए आप जितने धर्म शास्त्र पढ़ेंगे उतना ही कम है...

श्वेता: आप धर्म शास्त्र का नाम बताइए.. जिसमें आप जो बोल रही हैं वो परिभाषा हो।

मेघा: ये सनातन धर्म में ही है। मैम आप इसमें धर्म शास्त्र को कैसे जोड़ सकते हैं? वेद पुराणों में हर जगह ये चीज...

श्वेता: वेद में या पुराण में वेद में तो किस में? किस उपनिषद में और पुराण में तो किस पुराण में? मेघा: वेद पुराण मैंने पढ़े नहीं है। मैंने अपने पेरेंट्स से सुना है। जो मैंने अपने पेरेंट्स से सुना है, जो मैंने अपने धर्म गुरुओं से सुना है।

श्वेता: आप इस तरह से सार्वजनिक मंचों पर परिभाषा दे रही हैं। आपको ज्ञान ही नहीं है। जब आप आपने उपनिषद पढ़े हैं?

मेघा: मैंने नहीं पढ़े हैं। एक भी नहीं पढ़े हैं।

श्वेता: “आप कई इंटरव्यू में मनुस्मृति का सपोर्ट करती हैं। मनुस्मृति पढ़ी है? इसमें वर्ण शंकर, अलग बस्तियां, छाया न पड़ने का नियम, शूद्र अगर वेद श्लोक सुन ले तो कान में सीसा डालने का श्लोक – ये सब क्या है?”

मेघा: “मैंने मनुस्मृति नहीं पढ़ी है। मैंने कुछ नहीं पढ़ा है। आई टोटली एक्सेप्ट मेरे बड़ों ने बताया, मैं वो मनुस्मृति नहीं पढ़ूंगी जिसमें ऐसा लिखा हो।”

श्वेता: बड़ों ने कुछ भी बड़े बता देंगे। कुछ भी उल्टा सीधा आप उसको मान लेंगे? बड़े तो सती प्रथा करवाते थे, बड़े तो बाल विवाह करवाते थे। बड़े तो बहु विवाह करवाते थे?

श्वेता ने मेघा को बिना पढें या ठोस जानकारी के सार्वजनिक मंच पर बोलने को लेकर घेरा जिसपर मेघा कोई जवाब ना दे सकी, मनुस्मृति को सपोर्ट करने वाली मेघा से जब इसी में बताये उदाहरण दिए – ब्राह्मण पुरुष की चारों वर्णों की पत्नियों से पैदा बच्चों का दर्जा, सात पीढ़ी तक ब्राह्मण न बनना, संपत्ति में भेदभाव – और पूछा, “ये वर्ण व्यवस्था है जो आप सपोर्ट करती हैं?” इसपर मेघा बोली “मैं कास्टिज्म सपोर्ट नहीं करती।”

'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' का नारा लगाकर रातोंरात फेमस हुईं इस नॉन-ब्राह्मण सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मेघा (R) को पत्रकार श्वेता जया के लॉजिकल सवालों के आगे कुछ भी जवाब नहीं सूझा।
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मुसलमानों पर सबसे विवादित बयान

श्वेता: “आप सनातन परंपरा की बात करती हैं – सर्वे भवन्तु सुखिनः, वसुधैव कुटुंबकम्। लेकिन मुसलमानों को नफरत की नजर से देखती हैं। आपने कहा सारे मुसलमान हैवान हैं। सनातन के खिलाफ नहीं जा रही?”

मेघा: “डेफिनेटली सारे मुसलमान हैवान हैं। लव जिहाद, गौ हत्या, कश्मीर पंडितों का कत्लेआम, बांग्लादेश-पाकिस्तान में हिंदू मारे गए, राम मंदिर उड़ाने की धमकियां, गौरी शंकर मंदिर सील – सारी तालीम वहीं से आ रही है।”

श्वेता: “सरकारी डेटा बताइए। लव जिहाद के कितने केस? सिर्फ 12-13 केस पर पूरा कम्युनिटी को टारगेट कर रही हैं?”

मेघा: “डेली केस होते हैं।”

श्वेता: “आप एक समुदाय को पूरी तरह टारगेट कर रही हैं। क्या सनातन यही सिखाता है?”

मेघा: “जय श्री राम जबरदस्ती नहीं बुलवाते, ये वंदे मातरम बोलने पर शर्म करते हैं।”

श्वेता: “आप बार-बार कह रही हैं – जब देश-धर्म की बात आएगी तो शस्त्र उठा लूंगी। देश के गद्दारों को गोली मारो। ये लोकतंत्र है, संविधान है, लॉ एंड ऑर्डर है। आप खुद गुंडागर्दी प्रोवोक कर रही हैं?”

मेघा: “मुझे मंजूर है। चार्जेस लगें तो लगें। जब शास्त्र पढ़ सकती हूं तो शस्त्र भी उठा सकती हूं। तन-मन-धन से लड़ूंगी।”

श्वेता: “ये आतंकवादी मानसिकता है। आप देश के खिलाफ जा रही हैं।”

मेघा: “जब बात देश-धर्म की आएगी तो मैं 206 हड्डियां और संविधान की सारी धाराएं तोड़ सकती हूं।”

श्वेता: “आप संविधान को लिमिटेड मानती हैं? अनुच्छेद 25 क्या है?”

मेघा: “मुझे पता नहीं।”

श्वेता: “अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है लेकिन जिम्मेदारी भी।”

श्वेता जया ने बहुत शालीनता से कहा, “मेघा, तुम सिर्फ 22 साल की हो। बोलने की क्षमता बहुत अच्छी है, लीडर बनने की संभावना है। लेकिन तुमने कॉरेस्पॉन्डेंस से पढ़ाई की है, कॉलेज का एनवायरनमेंट नहीं मिला। पढ़ाई करो। उपनिषद, वेद, पुराण, मनुस्मृति पढ़ो। स्टडी से ऊपर कुछ नहीं। मैं तुम्हारी बहुत संभावनाएं देख रही हूं। पढ़ाई करो, आगे बढ़ो।”

लेकिन मेघा ने जवाब दिया, “मैं वो पढ़ूंगी नहीं जो मुझे बांधे। गलत को गलत बोलने से रोके।”

श्वेता: “पढ़ाई से ही पता चलेगा सही-गलत क्या है।"

पॉडकास्ट रिलीज होते ही #MeghaLavariyaExposed, #ShwetaJayaPodcast, #BrahmanwadZindabad ट्रेंड कर गए। एक तरफ मेघा को “सनातन की शेरनी” कहा जा रहा है, दूसरी तरफ श्वेता जया की लॉजिकल बहस की जमकर तारीफ हो रही है। कई यूजर्स लिख रहे हैं – “नारा लगाने से पहले स्क्रिप्चर पढ़ लो”, “22 साल में इतना कॉन्फिडेंस लेकिन ज्ञान जीरो”।

पूरा पॉडकास्ट श्वेता जया के YouTube चैनल पर उपलब्ध है।

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