
नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का नॉर्थ कैंपस 13 फरवरी को अखाड़े में तब्दील हो गया. मामला UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की नई गाइडलाइंस के रोक के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन का था, लेकिन सुर्खियों में आ गया एक 'पानी का सवाल'. यह सवाल कोई साधारण सवाल नहीं था, बल्कि दलित अस्मिता और ऐतिहासिक महाड सत्याग्रह पर किया गया एक तीखा व्यंग्य था, जिसने प्रदर्शनकारी छात्रों और एक महिला यूट्यूबर, रुचि तिवारी, के बीच झड़प का रूप ले लिया.
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब UGC के मसले पर प्रदर्शन कर रहे कई छात्र समूह और बहुजन विचारधारा के छात्र नॉर्थ कैंपस में इकठ्ठा थे. इसी बीच, खुद को पत्रकार बताने वाली यूट्यूबर रुचि तिवारी वहां पहुंचती हैं. वायरल वीडियो और चश्मदीदों के मुताबिक, रिपोर्टिंग के नाम पर शुरू हुआ संवाद जल्द ही अपमानजनक तानों में बदल गया.
रुचि तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फ़ैल रहा है, जिसमें वह दौड़-दौड़कर प्रदर्शनकारी छात्रों से एक ही सवाल पूछ रही हैं:
"क्या बात पानी नहीं मिला भैया? आपको भी पानी नहीं मिला? 5000 सालों तक पानी नहीं मिला... देखो, ये नहीं बोलेंगे कि आरक्षण नहीं चाहिए...."
जानकारों का कहना है कि 'पानी' का यह तंज सीधा दलित इतिहास और छुआछूत की उस पीड़ा पर हमला था, जिसके खिलाफ डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने 'महाड सत्याग्रह' किया था ताकि दलितों को सार्वजनिक चवदार तालाब से पानी पीने का अधिकार मिल सके.
फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर और एक्स हैंडल @ambedkariteIND ने वीडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा कि रुचि तिवारी ने जानबूझकर छात्रों को उकसाया. जुबैर ने लिखा, "यह महिला पत्रकार नहीं है, यह एक प्रोपेगेंडा चैनल चलाती है." उन्होंने ANI की स्मिता प्रकाश को टैग करते हुए सवाल उठाया कि कैसे एक यूट्यूबर ने छात्रों के ऐतिहासिक संघर्ष का मजाक उड़ाया.
मामला तब बिगड़ गया जब कथित तौर पर रुचि तिवारी ने एक छात्रा को जोरदार धक्का देकर जमीन पर पटक दिया.
नवीन कुमार नंदन (बामसेफ न्यूज), ने दावा किया कि जब वह रिपोर्टिंग कर रहे थे, तो लाल स्वेटर पहने रुचि तिवारी ने उनसे उनका फोन छीनने की कोशिश की. नवीन ने बताया कि यह महिला पहले भी जंतर-मंतर पर भीम आर्मी के प्रदर्शन में माहौल खराब करने की कोशिश कर चुकी है.
एक अन्य एक्स यूजर @Nher_who ने वीडियो साझा करते हुए लिखा, "रुचि तिवारी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन में घुसपैठ की, दलित लड़की के साथ मारपीट की और जब दलितों ने इसका विरोध किया, तो उन्होंने विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया."
घटना के बाद न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में रुचि तिवारी ने खुद को पीड़ित बताया है. उन्होंने छात्रों के समूह (जिन्हें उन्होंने 'UGC के गुंडे' कहा) पर गंभीर आरोप लगाए:
"मेरे आस-पास की लड़कियों ने मेरे कानों में रेप की धमकी दी... कहा गया कि आज तेरा नंगा परेड निकलेगा. यह हत्या की कोशिश थी, मैं बेहोश हो गई थी. मुझ पर मेरी जाति (ब्राह्मण) की वजह से हमला हुआ."
वहीं, ABVP ने रुचि तिवारी का समर्थन किया है. ABVP के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, "वामपंथी संगठनों की प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है, इसलिए वे एक महिला पत्रकार के साथ मारपीट कर खबर में बने रहना चाहते हैं."
तनाव को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने शांति की अपील जारी की है. उन्होंने कहा, "विश्वविद्यालय में कल जो घटना हुई वह चिंता का विषय है. सामाजिक सौहार्द बनाए रखना हम सब का कर्तव्य है. UGC के नियम अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, अतः सभी धैर्य रखें."
फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है. सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह "पत्रकारिता" थी या "सुनियोजित उकसावे की कार्यवाही"?
सोशल मीडिया आर्काइव्स और वायरल कंटेंट के आधार पर, रुचि तिवारी सोशल मीडिया पर एक चर्चित चेहरा हैं, जो अक्सर अपने आक्रामक और "गोटचा" (Gotcha) स्टाइल इंटरव्यू के लिए जानी जाती हैं.
वह अक्सर भीड़-भाड़ वाले राजनीतिक प्रदर्शनों, विशेषकर वामपंथी या विपक्षी दलों के प्रोटेस्ट में जाकर प्रदर्शनकारियों से असहज और उत्तेजक सवाल पूछती हैं. आलोचकों का कहना है कि उनका उद्देश्य रिपोर्टिंग करना नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों को गुस्से में प्रतिक्रिया देने पर मजबूर करना होता है ताकि उस क्लिप को वायरल किया जा सके. उनके वीडियो का झुकाव स्पष्ट रूप से दक्षिणपंथी (Right-Wing) विचारधारा की ओर देखा जाता है, और वह अक्सर 'सनातन' और 'सवर्ण' मुद्दों पर मुखर रहती हैं.
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