
नई दिल्ली- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति प्रोफेसर संतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के एक पॉडकास्ट में दिए गए विवादास्पद बयानों ने पूरे देश में तूफान मचा दिया है, खासकर बहुजन, दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया है। द संडे गार्जियन पॉडकास्ट में पत्रकार जोयिता बसु को दिए इंटरव्यू में कुलपति ने यूजीसी की नये इक्विटी रेगुलेशंस को "पूर्णतः अनावश्यक", "तर्कहीन" और "irrational" बताया।
उन्होंने "permanent victimhood" को "एक तरह की ड्रग" की तरह करार दिया और कहा कि इससे प्रगति नहीं हो सकती। उनके शब्दों में, "हमेशा विक्टिम बने रहते हैं। और आप हमेशा विक्टिम बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर तरक्की नहीं कर सकते। यह ब्लैक्स (अश्वेत) के लिए किया गया था... यही चीज़ें यहां दलितों के लिए लाई गईं।"
उन्होंने आगे कहा कि जन्म के आधार पर किसी एक पक्ष के अधिकारों से इनकार नहीं किया जा सकता और इसे "सजा" नहीं माना जाना चाहिए, जिसे आलोचकों ने ऐतिहासिक विशेषाधिकारों की रक्षा के रूप में देखा है। यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जहां लोग इसे दलितों और ब्लैक समुदायों के सदियों के संघर्ष को "victim card" या "ड्रग" कहकर अपमानित करने वाला बता रहे हैं।
बहुजन समुदाय ने इसे संस्थागत जातिवाद और सवर्ण विशेषाधिकार की रक्षा करने वाला हमला माना है। सोशल मीडिया पर #RemoveSantishreePandit, #DalitLivesMatter, #JNUAgainstCasteism जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक प्रमुख पोस्ट में अम्बेडकराइट एक्टिविस्ट ने लिखा, "दलितों को 'victim card' खेलने वाला कहना कितना घिनौना है! क्या जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाना victimhood है? ... आप ब्राह्मण जाति से हैं, RSS सदस्य हैं, दलितों के दर्द को क्या जानती हैं? हम हर दिन अपमान, भेदभाव और हिंसा झेलते हैं..." एक यूजर ने कहा, "जेएनयू VC ने UGC नियमों का विरोध किया... दलित समुदाय को 'Victimhood के नशे में डूबा हुआ' कहने के बाद, कुलपति संतिश्री पंडित ने UGC नियमों का भी विरोध किया... क्या कल्पना कर सकते हैं कि कैंपस पर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ कैसा व्यवहार करती होंगी?"
एक अन्य यूजर ने लिखा, "दलित और ब्लैक्स स्थायी victimhood के नशे में हैं! मैडम, असली नशा तो आपका विशेषाधिकार है!" जबकि @Nher_who ने पोस्ट किया, "अगर हक मांगना ड्रग के बराबर है, तो सदियों का विशेषाधिकार कैंसर होना चाहिए।" सीपीआई(एम) के जनरल सेक्रेटरी @MABABYCPIM ने कहा, "दलितों की स्थिति को 'permanent victimhood' कहकर मजाक उड़ाना व्यवस्थागत उत्पीड़न को सफेद करने की कोशिश है... उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।"
छात्रों और एक्टिविस्ट्स का कहना है कि सदियों से जातिवादी उत्पीड़न, भूमि छीनने, शिक्षा से वंचित रखने और हिंसा झेलने वाले दलित-बहुजन समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाना कोई "victimhood" नहीं, बल्कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और पेरियार द्वारा दिए संवैधानिक हक की लड़ाई है। अब करोड़ों एससी, एसटी, ओबीसी युवा शिक्षित, जागरूक और निर्भय हैं, जो वोट बैंक बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि संस्थानों में रोस्टर हेराफेरी, इंटरव्यू में पक्षपात, भर्ती में भेदभाव जैसी संरचनात्मक बाधाओं के खिलाफ लड़ रहे हैं।
सीनियर आईआरएस अफसर नेत्रपाल ने कुलपति के बयान की निंदा करते हुए अपने पोस्ट में लिखा: "SC ST OBC के अधिकारों के लिए बात करना विक्टिमहुड नहीं है। यह हमारी ताकत है और आज लाखों SC ST OBC के मन आज़ाद हैं। वे बिना डरे बात करते हैं। वे पढ़े-लिखे हैं। वे लिबरल सवर्णों के बिछाए जाल को जानते हैं जो हमें सिर्फ़ अपने वोटों के लिए इस्तेमाल करते हैं लेकिन सिर्फ़ अपने रिश्तेदारों को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने हमारे लोगों को टॉप पर पहुँचने से रोकने के लिए रोस्टर, इंटरव्यू, एम्पैनलमेंट जैसी स्ट्रक्चरल रुकावटें खड़ी की हैं।
हम विक्टिमहुड की बात नहीं करते।यह हमारे अधिकार हैं और यह VC या कोई बड़ी ताकत हमें हमारे अधिकारों के लिए बात करने से नहीं रोक सकती।
हमें हमारी मातृभूमि में हमारी सही जगह दो और यह एक सीधी सी मांग है। इससे कम कुछ नहीं, इससे ज़्यादा कुछ नहीं...हम कभी भी मुट्ठी भर समुदायों को दौलत, शिक्षा, पावर के पदों पर मोनोपॉली करने की इजाज़त नहीं देंगे।हमारा संविधान, जिसे डॉ. अंबेडकर और पेरियार जैसे हमारे महान नेताओं ने बनाया है, हमें दौलत, शिक्षा, पावर के पदों तक पहुंचने का बराबर मौका देता है... अपने सही हक के लिए बात करना विक्टिमहुड नहीं है, यह हमारी ताकत है...मैडम VC अपने शब्द वापस लें..."
कुलपति के बयान को मनुवादी और RSS सदस्य होने के कारण सवर्ण पूर्वाग्रह से प्रेरित बताया जा रहा है। जेएनयू में पहले से छात्र संघ के साथ विवाद चल रहा है, और UGC नियमों के खिलाफ कानूनी चुनौतियां हैं, जो कैंपस पर जातिवाद रोकने के लिए हैं। बहुजन समाज की मांग साफ है- कुलपति अपने शब्द वापस लें, सार्वजनिक माफी मांगें, UGC नियम लागू हों और ऐसी सोच वाली VC को हटाया जाए।
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