
नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी एक बार फिर अखाड़ा बन गई है। मुद्दा था UGC 2026 की नीतियों का विरोध और समर्थन, लेकिन सुर्खियां बटोर ले गई एक युवती, जो छात्रों के कंधे पर बैठकर विवादित नारे लगा रही थी। जहाँ एक तरफ इस घटना को छात्र राजनीति का हिस्सा माना जा रहा था, वहीं अब इस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है।
UGC 2026 के मसले पर दिल्ली विश्वविद्यालय में विभिन्न छात्र समूहों के बीच तीखी झड़प हुई। इसी गहमागहमी के बीच रात में एक लड़की भीड़ में लड़कों के कंधे पर बैठी नजर आई और उसने "ब्राह्मणवाद जिंदाबाद" के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और जातिगत राजनीति को लेकर बहस छिड़ गई।
मशहूर फैक्टचेकर और ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर ने इस वायरल वीडियो की सच्चाई उजागर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दावा किया है कि नारेबाजी करने वाली युवती दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा नहीं है।
नारे लगाने वाली महिला दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा नहीं है, बल्कि एक यूट्यूबर मेघा लवरिया (Megha Lawariya) है, जिसे अक्सर यूट्यूब व्यूज के लिए भड़काऊ बयान देते देखा जा सकता है। वहां मौजूद दक्षिणपंथी भीड़ में ज्यादातर छात्र नहीं, बल्कि यूट्यूबर थे।
— मोहम्मद जुबैर
मेघा लवरिया के पिछले बयानों और वीडियो पर गौर करें तो एक अजीब पैटर्न सामने आता है। वह अक्सर ऐसे बयान देती हैं जो ध्रुवीकरण (Polarization) को बढ़ावा दें, चाहे वह किसी भी पक्ष में हों। उनके वायरल बयानों ये बयान शामिल हैं जो आपने-आपने समय में खूब वायरल हुए थे:
एक बार बंगाल में भाजपा की सरकार आने दीजिए, फिर हम बताएंगे कि बांग्लादेशी रोहिंग्या को कैसे निकाला जाता है।
कोई भाजपा सरकार हिंदुओं की नहीं है। हिंदुओं का कोई नहीं है, न कोई संगठन, न कोई कार्यकर्ता।
मैं तो कहती हूं ऐसी वोट चोरी होनी चाहिए, डंके की चोट पर होनी चाहिए।
इन बयानों से साफ पता चलता है कि मेघा के स्टैंड में कोई वैचारिक स्पष्टता नहीं है। एक तरफ वह भाजपा सरकार की वकालत करती हैं, तो दूसरी तरफ उसे ही हिंदू विरोधी बताती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'अटेंशन इकोनॉमी' का हिस्सा है, जहाँ विवादित बयान देकर सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स और व्यूज बटोरे जाते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में बाहरी तत्वों और 'व्यूज' के भूखे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स का घुसना चिंता का विषय है। छात्र हितों की आड़ में अपनी 'डिजिटल दुकान' चलाने वाले लोग न केवल माहौल खराब कर रहे हैं, बल्कि वास्तविक छात्र मुद्दों को भी भटका रहे हैं।
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