
लखनऊ-- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में अत्यधिक विलंब को गंभीरता से लिया है। अदालत ने इस मामले में प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की और अधिकारियों को स्पष्टीकरण देने के लिए अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ ने जनहित याचिका (पीआईएल नंबर 34/2025) की सुनवाई करते हुए पाया कि पिछले आयोग का कार्यकाल वर्ष 2024 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन अब तक नए पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। याचिकाकर्ता शम्स तबरेज़ ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें राज्य सरकार को अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव (अपर मुख्य सचिव) को 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और यह बताने का आदेश दिया है कि आखिर क्यों नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं और राज्य सरकार के वकील को लिखित निर्देश क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में पहले 17 जनवरी 2025 और 24 अप्रैल 2026 को भी सुनवाई हुई थी, जहां सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया चल रही होने की बात कही गई थी। हालांकि, 6 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने केवल मौखिक रूप से बताया कि नामांकन की प्रक्रिया अभी भी जारी है, जिस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए इसे अदालती आदेशों का 'अपमान' (disrespectful) करार दिया।
न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि 24 अप्रैल 2026 के आदेश में पहले ही कड़ी टिप्पणी करते हुए अगली तारीख तक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से आज तक कोई लिखित निर्देश या स्थिति रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव (अपर मुख्य सचिव) को 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और यह बताने का आदेश दिया है कि आखिर क्यों नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं और राज्य सरकार के वकील को लिखित निर्देश क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाग में अपर मुख्य सचिव का पद नहीं है तो प्रमुख सचिव को इस तारीख को उपस्थित होना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, और राज्य सरकार के वकील को इस आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
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