यूपी के बॉन्डेड डॉक्टरों की हड़ताल का 11वां दिन, 7 दिन से अनशन लेकिन सरकार ने अब तक न पूछा हाल!

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मांग है कि सीएचसी/पीएचसी में तैनात बॉन्डेड चिकित्सा अधिकारियों को ₹5,400 ग्रेड पे के अनुरूप लेवल-10 वेतन और डीए, एचआरए, एनपीए व टीए जैसे भत्ते मिलें, जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात पात्र बॉन्डेड डॉक्टरों को मिलते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस, इंटर्नशिप और दो वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा समान है और सीएचसी/पीएचसी पर काम भी तुलनीय है। फिर भी उन्हें केवल ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय मिलता है।
डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस, इंटर्नशिप और दो वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा समान है और सीएचसी/पीएचसी पर काम भी तुलनीय है। फिर भी उन्हें केवल ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय मिलता है।x@voiceofmedicalo
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लखनऊ- उत्तर प्रदेश के सेवा-बॉन्ड वाले एमबीबीएस चिकित्सा अधिकारी गुरूवार को हड़ताल के 11वें दिन भी लखनऊ के 1090 चौराहे पर धरने पर हैं। 16 अक्टूबर से शुरू उनके अनशन का आज सातवां दिन है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार अब तक सरकार का कोई प्रतिनिधि वार्ता के लिए नहीं पहुंचा है। 6 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे डॉ. चहल की तबीयत बिगड़ी तो उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। लगातार अनशन के बीच डॉक्टरों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ रही है!

2018, 2019 और 2020 बैच के ये डॉक्टर सीएचसी और पीएचसी में तैनात हैं। इन्होनें दो मांगें रखी हैं। पहली मांग वेतन समानता की है। वे चाहते हैं कि सीएचसी/पीएचसी में तैनात बॉन्डेड चिकित्सा अधिकारियों को ₹5,400 ग्रेड पे के अनुरूप लेवल-10 वेतन और डीए, एचआरए, एनपीए व टीए जैसे भत्ते मिलें, जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात पात्र बॉन्डेड डॉक्टरों को मिलते हैं। दूसरी मांग यह है कि 12 से 15 अक्टूबर के बीच कथित पुलिस बर्बरता और चार दिन में आठ बार हिरासत में लिए जाने पर सरकार और यूपी पुलिस सार्वजनिक माफी मांगे।

डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस, इंटर्नशिप और दो वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा समान है और सीएचसी/पीएचसी पर उनका काम भी तुलनीय है, फिर भी उन्हें केवल ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय मिलता है। वे इसे "समान सेवा के लिए समान वेतन" के सिद्धांत के विपरीत बताते हैं और उनका नारा है "वन बॉन्ड, वन सैलरी"। डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि सीएचसी/पीएचसी के बॉन्डेड डॉक्टरों को बिना भत्तों के 50,000-65,000 रुपये मिलते हैं, जबकि समान काम करने वाले एनएचएम डॉक्टर 1 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं।

एक साल से उठा रहे हैं मांग: एक बांड, एक सैलरी

डॉक्टरों के अनुसार वे करीब एक वर्ष से ज्ञापनों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के जरिए यह मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सितंबर में हुए धरने के दौरान 2 सितंबर को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक धरनास्थल पर आए और 3 सितंबर तक शासनादेश (जीओ) जारी करने का आश्वासन दिया, लेकिन जीओ की जगह उन्हें केवल सैद्धांतिक सहमति का प्रस्ताव-पत्र मिला। आश्वासन पर भरोसा करके उन्होंने आंदोलन समाप्त कर ड्यूटी शुरू कर दी। जीओ के बिना उन्होंने एक और आंदोलन किया, जिसे उनके अनुसार सरकारी दबाव के बीच खत्म किया गया। डॉक्टरों ने इसी बीच 18 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, यह आरोप लगाते हुए कि आश्वासन के बावजूद आदेश जारी नहीं हुआ। कई डॉक्टरों को तब हिरासत में लिया गया जब एक प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के आवास पर मांगें सौंपने गया।

डॉक्टरों का आरोप है कि 12 से 15 अक्टूबर के बीच उन पर पुलिस बर्बरता हुई और उन्हें आठ बार हिरासत में लिया गया। इसके बाद ज्ञापन में की गई घोषणा के अनुसार सीएचसी/पीएचसी के बॉन्डेड डॉक्टरों ने 16 अक्टूबर से जीओ जारी होने तक अनशन शुरू किया। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे लखनऊ में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन भी जारी रखेंगे। आज हड़ताल के 11वें और अनशन के 7वें दिन भी उनके मुताबिक सरकार की ओर से कोई वार्ताकार नहीं आया है।

प्रदर्शनकारी चिकित्सकों ने पूरे चिकित्सा समुदाय, यानी वरिष्ठों, कनिष्ठों और सभी डॉक्टरों से आगे आकर समर्थन देने की अपील की है। उनकी मांग है कि वादा किया गया शासनादेश जल्द से जल्द जारी हो।

डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस, इंटर्नशिप और दो वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा समान है और सीएचसी/पीएचसी पर काम भी तुलनीय है। फिर भी उन्हें केवल ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय मिलता है।
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डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस, इंटर्नशिप और दो वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा समान है और सीएचसी/पीएचसी पर काम भी तुलनीय है। फिर भी उन्हें केवल ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय मिलता है।
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डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस, इंटर्नशिप और दो वर्ष की अनिवार्य बॉन्ड सेवा समान है और सीएचसी/पीएचसी पर काम भी तुलनीय है। फिर भी उन्हें केवल ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का निश्चित मानदेय मिलता है।
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