
मुम्बई- महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की राज्य सेवा परीक्षा-2025 की मुलाखत (इंटरव्यू ) प्रक्रिया एक बार फिर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। आयोग ने प्रशासनिक कारण बताते हुए पहले 7 सितंबर से निर्धारित साक्षात्कार को 21 सितंबर के बाद के कार्यक्रम पर टाला था। उसके बाद सितंबर के मध्य में जारी अधिसूचना में पूरी प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक रोक दिया गया। इसी पृष्ठभूमि में वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पातोड़े ने आरोप लगाया है कि आयोग की मनमानी और मुलाखत प्रक्रिया को और जटिल बनाने वाले बदलाव बहुजन, ग्रामीण और गरीब परिवारों के छात्रों के रास्ते में बाधा बन रहे हैं।
पातोड़े ने कहा कि 2025 से लागू हो रहे बदलाव सामान्य वर्ग के साथ बहुजन वर्ग के उम्मीदवारों के लिए चयन प्रक्रिया और कठिन बना रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से कठिन प्रक्रिया को और उलझाना ग्रामीण, गरीब और पिछड़े परिवारों के छात्रों के लिए अवसरों से इनकार के बराबर है। उन्होंने अचानक मुलाखत स्थगित करने को अन्याय बताया और आरोप लगाया कि पारदर्शिता के साथ विश्वासघात कर एक खास वर्ग के हित साधे जा रहे हैं।
राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का विज्ञापन पिछले साल की शुरुआत में निकला था। प्रारंभिक परीक्षा नवंबर 2025 में हुई। मुख्य परीक्षा अप्रैल 2026 में आयोजित हुई। यह पहली बार था जब राज्य सेवा मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (डिस्क्रिप्टिव) प्रारूप में ली गई। परिणाम अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह में घोषित हुआ। इसके बाद मुलाखत का कार्यक्रम पहले 7 से 12 सितंबर तय हुआ, फिर 21 से 28 सितंबर तक स्थगित किया गया और उसके बाद अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया। आयोग ने इसे आधिकारिक तौर पर “प्रशासनिक कारण” बताया है।
कुछ सफल उम्मीदवारों का कहना है कि वर्णनात्मक मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं में अंकों में बड़ा अंतर दिखा। उन्होंने आरटीआई के जरिए मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाओं की प्रति मांगी, लेकिन आयोग से प्रति नहीं मिली। छात्रों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर चंद्रकांत दळवी समिति की सिफारिशों के अनुरूप पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। समिति की सिफारिशों में दो विशेषज्ञों द्वारा उत्तरपुस्तिका जांच और दोनों के औसत अंक शामिल हैं। छात्रों की तीसरी प्रमुख मांग यह है कि मुलाखत में अंक देने के मापदंड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि मनमानी का आरोप न लगे। दूसरी ओर, जो उम्मीदवार पहले ही मुलाखत के लिए अर्हता प्राप्त कर चुके हैं, उनमें से कई चाहते हैं कि प्रक्रिया और न रुके। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 438 उम्मीदवार पहले ही इस चरण तक पहुंच चुके हैं और व्यापक पुनर्मूल्यांकन से पूरी प्रक्रिया मुकदमेबाजी में फंस सकती है।
पहला बड़ा बदलाव मुख्य परीक्षा का प्रारूप है। वस्तुनिष्ठ से वर्णनात्मक प्रारूप का फैसला पहले घोषित था और 2025 चक्र से लागू हुआ। मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधानपरिषद में स्पष्ट किया था कि यह निर्णय अंतिम है। वर्णनात्मक प्रारूप में लेखन क्षमता, विश्लेषण और भाषा पर अधिक भार पड़ता है। कई कोचिंग संस्थानों वाले शहरों के छात्रों की तुलना में ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए यह बदलाव अतिरिक्त तैयारी की मांग करता है।
दूसरा बड़ा नीतिगत बदलाव मई 2026 का सरकारी निर्णय है। राज्य सरकार ने समूह क (अराजपत्रित) और समूह ग पदों की सीधी भर्ती से मुलाखत पूरी तरह हटा दी। इन पदों पर चयन अब केवल लिखित परीक्षा पर आधारित होगा। समूह क से ग तक की सीधी भर्ती एमपीएससी के अधीन आ गई है। सरकार का आधिकारिक तर्क यह है कि मुलाखत के दौरान होने वाले पक्षपात और लेन-देन पर अंकुश लगेगा तथा प्रक्रिया तेज होगी। 553 संवर्गों के सेवा प्रवेश नियमों में संशोधन किया गया। कुछ राजपत्रित और अराजपत्रित पद अब सीधी भर्ती की जगह पदोन्नति या प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे।
तीसरा बदलाव 2027 चक्र से राज्य सेवा मुख्य परीक्षा पर लागू होगा। वैकल्पिक विषय हटा दिए गए हैं। अब सात अनिवार्य पेपर होंगे: मराठी और अंग्रेजी (केवल अर्हता, प्रत्येक 300 अंक, न्यूनतम 25 प्रतिशत जरूरी, मेरिट में नहीं जुड़ेंगे), एक निबंध और चार सामान्य अध्ययन पेपर। मेरिट के लिए लिखित अंक 1,250 रहेंगे। मुलाखत (पर्सनैलिटी टेस्ट) के अंक 275 से घटाकर 175 कर दिए गए हैं। आयोग का कहना है कि यह अनुपात सर्वोच्च न्यायालय के उस दिशा-निर्देश के अनुरूप है जिसमें लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बीच संतुलन रखने को कहा गया है। 22 जुलाई 2026 के शुद्धिपत्रक में यह अंक-कटौती दर्ज है। 2025 चक्र की चल रही मुलाखत अभी पुराने 275 अंक वाले पैटर्न पर है।
चौथा प्रस्तावित बदलाव प्रारंभिक परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में बदलने का था। जून माह में आयोग अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने कहा था कि आने वाले चक्रों में प्रीलिम्स सीबीटी में होंगे और परिणाम 21 दिनों में घोषित करने का लक्ष्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच, केंद्रों की विश्वसनीयता और तकनीकी गड़बड़ी को लेकर छात्रों ने विरोध किया। 15 सितंबर को मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि फिलहाल एमपीएससी परीक्षाओं को ऑनलाइन करने की कोई तत्काल योजना नहीं है और मौजूदा ओएमआर व्यवस्था जारी रहेगी। पहले घोषित सीबीटी शिफ्ट को स्थगित रखा गया है।
आवेदन प्रक्रिया में भी सख्ती आई है। अब उम्मीदवार को ऑनलाइन आवेदन के समय ही आयु, शिक्षा और आरक्षण संबंधी प्रमाणपत्र अपलोड करने होते हैं। पहले कई दस्तावेज मुलाखत के समय ही जांचे जाते थे। अपूर्ण दस्तावेज पर सात दिन की एक अतिरिक्त अवधि दी जाती है। आयोग का तर्क पारदर्शिता है; छात्रों का अनुभव यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सही प्रारूप के प्रमाणपत्र समय पर जुटाना अतिरिक्त बोझ बन जाता है।
सरकार और आयोग का सार्वजनिक रुख यह है कि मुलाखत हटाकर या उसके अंक घटाकर पक्षपात कम होगा, भर्ती एक साल के अंदर पूरी होगी और लिखित प्रदर्शन का वजन बढ़ेगा। समूह क-ग पदों पर “नो इंटरव्यू पॉलिसी” को पारदर्शिता का कदम बताया गया है। 2027 से वैकल्पिक विषय हटाने को मूल्यांकन में एकरूपता बताया गया है।
विपक्षी और छात्र पक्ष का तर्क अलग है। वर्णनात्मक परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं सार्वजनिक न होना, मुलाखत के अंक-मापदंड न छापना और बार-बार कार्यक्रम बदलना अविश्वास पैदा कर रहा है। ग्रामीण और बहुजन पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए मॉक इंटरव्यू, भाषा और शहरी परिवेश का अभ्यास महंगा और दुर्लभ है। जब प्रक्रिया पहले से लंबी हो, प्रीलिम्स नवंबर 2025, मेन्स अप्रैल 2026, परिणाम अगस्त, मुलाखत सितंबर में फिर अनिश्चित तो एक और साल बर्बाद होने का दबाव बढ़ता है। साथ ही हाल के महीनों में औषध निरीक्षक जैसी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप और विरोध प्रदर्शन भी आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर चुके हैं।
अभी राज्य सेवा-2025 की मुलाखत की नई तारीख घोषित नहीं हुई है। छात्रों की दो मांगें स्पष्ट हैं- मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाओं की प्रति और मुलाखत अंक देने के लिखित मापदंड। आयोग के पास दोनों मांगों पर आधिकारिक जवाब जारी करने का विकल्प है। 2027 के नए पैटर्न का विस्तृत पाठ्यक्रम आयोग की वेबसाइट पर अलग से प्रकाशित होना बाकी है। समूह क और ग पदों पर मुलाखत समाप्त होने से उन पदों पर लिखित अंक ही अंतिम मेरिट तय करेंगे; राज्य सेवा जैसे राजपत्रित प्रशासनिक पदों पर साक्षात्कार जारी रहेगा, लेकिन 2027 से उसके अंक कम होंगे।
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