SRFTI Kolkata कैंपस में हिंसा: छात्रों के साथ ऑनलाइन याचिका में एकजुट हुए लोग, नौ मांगें रखीं; छात्र बोले, परिसर नहीं छोड़ेंगे

संस्थान ने फिल्म विंग और इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया (ईडीएम) विंग की शैक्षणिक गतिविधियां 13 नवंबर तक स्थगित कर दी हैं। साथ ही 16 अक्टूबर को परिसर में रह रहे सभी छात्रों, हॉस्टल के निवासियों सहित, को 24 घंटे में परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया।
छात्रों का आरोप है कि 27 सितंबर और 4 अक्टूबर को परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं में उन पर हमले हुए। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों का आरोप है कि 27 सितंबर और 4 अक्टूबर को परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं में उन पर हमले हुए। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
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कोलकाता - सत्यजित राय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई), कोलकाता के छात्र इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि तीन सप्ताह के भीतर परिसर में बाहरी लोगों ने उन पर दो बार हमला किया, प्रशासन ने उन्हें न सुरक्षा दी और न न्याय, और अब मांग उठाने पर उन्हीं को दंडित किया जा रहा है। संस्थान के छात्रों के समर्थन में एक ऑनलाइन याचिका जारी की गई है, जिसमें हस्ताक्षरकर्ताओं ने "पूर्ण एकजुटता" जताई है।

परिसर हिंसा के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने कहा कि प्रशासन के 24 घंटे में हॉस्टल और परिसर खाली करने के निर्देश के बावजूद वे संस्थान नहीं छोड़ेंगे। छात्रों ने यह भी तय किया है कि दुर्गा पूजा की छुट्टियों के दौरान भी उनका धरना नहीं रुकेगा। वे संस्थान के कुलपति संतोष अजमेरा के इस्तीफे और परिसर पर हुए कथित हमलों में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

एक ही दिन में छह छात्र निष्कासित

15 अक्टूबर को छात्र संघ के उपाध्यक्ष और महासचिव (फिल्म) सहित छह छात्रों को एक ही दिन में संस्थान से निष्कासित (रस्टिकेट) कर दिया गया। यह कार्रवाई बिना किसी नोटिस, सुनवाई या जांच के की गई।

16 अक्टूबर की शाम लगभग 7 बजे प्रशासन ने हॉस्टल के नोटिस बोर्डों पर एक आदेश चस्पा किया, जिसमें 13 नवंबर तक शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित करने की घोषणा की गई। छात्रों का कहना है कि उन्हें 24 घंटे के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है, हॉस्टल की मेस बंद कर दी गई है और सुविधाएं वापस ले ली गई हैं।

छात्रों का आरोप है कि 27 सितंबर और 4 अक्टूबर को परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं में उन पर हमले हुए। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
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कैसे बढ़ी बात: 27 सितंबर जब छात्रों पर हुए हमले

27 सितंबर को संस्थान के मुख्य थिएटर में आरएसएस से जुड़े संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) का एक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई, और इसकी जानकारी छात्रों को नहीं दी गई। जब छात्रों ने फिल्म से असंबंधित राजनीतिक कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हुए पोस्टर लगाए, तो उन्हें पूरे परिसर में दौड़ाकर पीटा गया।

आरोप है कि हमले में लाइब्रेरियन और शिक्षक भी निशाना बने। छात्रों ने फांसी पर लटकाने और बलात्कार की धमकियां दिए जाने की शिकायत की है, जबकि छात्राओं का कहना है कि उनके साथ अनुचित तरीके से छेड़छाड़ की गई। गेट के बाहर जमा भीड़ ने पत्थर और ईंटें फेंकीं और छात्रों को "देशविरोधी" और "आतंकवादी" कहा। कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें दो को व्यापक प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ी। घायलों को ले जा रही एम्बुलेंस पर भी पथराव हुआ।

4 अक्टूबर: दूसरा हमला

सोशल मीडिया पर एसआरएफटीआई गेट तक मार्च की सार्वजनिक घोषणा हो चुकी थी और छात्र सुरक्षा की गुहार लगा रहे थे। इसके बावजूद बंगीय हिंदू जागरण मंच से जुड़ी एक रैली गेट तक पहुंची और छात्रों पर दोबारा हमला हुआ, जिसमें वे घायल हुए। स्टूडेंट्स का आरोप है कि संस्थान ने पुलिस में जो शिकायत दी, उसमें संगठन का नाम नहीं लिखा गया, जबकि उसकी पहचान सार्वजनिक रूप से ज्ञात थी।

5 से 7 अक्टूबर: कुलपति कार्यालय के बाहर धरना

जवाबदेही की मांग को लेकर छात्र कुलपति कार्यालय के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे। आरोप है कि संस्थान के कर्मचारियों को उन्हें टकराव के साथ हटाने के लिए जुटाया गया और एक छात्र को कमरे से घसीटकर बाहर निकाला गया। छात्रों के अनुसार शिक्षकों के जरिए उन्हें संदेश मिला कि कक्षा में न लौटने पर एफआईआर, करियर को नुकसान, संस्थान बंद किए जाने और शिक्षकों के तबादले जैसे परिणाम भुगतने होंगे।

12 अक्टूबर से छात्रों ने कुलपति के इस्तीफे की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। कुलपति के पास एसआरएफटीआई का प्रभार केवल अतिरिक्त जिम्मेदारी के रूप में है; उनकी मूल तैनाती कोलकाता स्थित प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) में है।

सीसीटीवी कैमरे और निष्कासन

15 अक्टूबर को परिसर में छात्रों को बिना पूर्व सूचना दिए सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए, जो प्रशासन द्वारा पहले दिए गए समझौतों और आश्वासनों का उल्लंघन है। छात्रों ने इसका शांतिपूर्ण विरोध किया।

प्रशासन का आरोप है कि 14 अक्टूबर की रात कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़ हुई और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। छात्र संघ ने इससे इनकार किया है और कहा है कि परिसर के सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने ऐसी कोई घटना नहीं देखी।

कुछ ही घंटों में संयुक्त डीन परिषद (कम्बाइंड डीन काउंसिल) की "आपात बैठक" हुई और छह छात्रों को एक जैसे साइक्लोस्टाइल्ड आदेशों से निष्कासित कर दिया गया। इन आदेशों में किसी छात्र के खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं है, और ये बिना नोटिस, जवाब या जांच के पारित किए गए। छात्रों को तुरंत संस्थान छोड़ने को कहा गया।

15 अक्टूबर की तारीख वाले कार्यालय आदेश के जरिए 13 नवंबर तक पढ़ाई स्थगित कर दी गई, जिसकी सूचना छात्रों को सिर्फ 16 अक्टूबर की शाम हॉस्टल बोर्डों पर लगे नोटिस से मिली। छात्रों के अनुसार आदेश में 24 घंटे में परिसर खाली करने का निर्देश है, मेस बंद की गई है और आदेश न मानने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। गेट पर भारी पुलिस मौजूदगी की भी खबरें हैं। ऑनलाइन याचिका में कहा गया है कि आज तक 27 सितंबर और 4 अक्टूबर के हमलावरों पर कोई दृश्य कार्रवाई नहीं हुई, जबकि हमले झेलने वाले छात्रों पर कार्रवाई हो चुकी है।

छात्रों का आरोप है कि 27 सितंबर और 4 अक्टूबर को परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं में उन पर हमले हुए। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
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स्टूडेंट्स के तर्क

पीड़ितों को आरोपी बनाया जा रहा है: जिन छात्रों ने हमलावरों के नाम उजागर करने, एफआईआर दर्ज कराने और सुरक्षा की मांग की, उन्हें कारण बताओ नोटिस, धमकियां, निष्कासन और परिसर छोड़ने का आदेश मिला।

शांतिपूर्ण विरोध अधिकार है: अनुच्छेद 19(1)(a) और (b) के तहत अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता कैंपस के गेट पर खत्म नहीं होती। एसआरएफटीआई सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त निकाय है और अनुच्छेद 14 के तहत निष्पक्ष, तर्कसंगत और मनमानी से मुक्त कार्य करने को बाध्य है। धरना, घेराव, पोस्टर और नारे भारतीय छात्र जीवन की सामान्य भाषा हैं।

उचित प्रक्रिया अनिवार्य है: संस्थान के अपने शैक्षणिक एवं संबद्ध उपनियमों में किसी बड़े दंड से पहले लिखित नोटिस, अपना पक्ष रखने का अवसर और जांच जरूरी है। एक दिन में छह छात्रों का निष्कासन, वह भी ऐसे आदेशों से जिनमें कोई विशिष्ट कृत्य दर्ज नहीं, इन तीनों की अनदेखी है।

निष्कासन प्रशासनिक सुविधा नहीं: संस्थान में देश के हर हिस्से और विभिन्न आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्र पढ़ते हैं, जिनमें कई प्रथम वर्ष के छात्र घर से दूर हैं। मेस बंद कर, यात्रा या ठहरने की व्यवस्था के बिना 24 घंटे में परिसर खाली कराना उन्हें वास्तविक जोखिम में डालता है। याचिका के अनुसार यह सुरक्षा उपाय कम और भोजन व छत छीनकर आंदोलन तोड़ने का तरीका ज्यादा दिखता है।

फिल्म स्कूल मुक्त जिज्ञासा की जगह है: एसआरएफटीआई प्रैक्टिस का स्कूल है, जहां सीखना सेट, एडिट सूट और देर रात की स्क्रीनिंग में होता है। डर, निगरानी और प्रतिशोध के माहौल में सिनेमा नहीं सिखाया जा सकता, और सत्यजित राय के नाम वाले संस्थान को यह सबसे ज्यादा समझना चाहिए।

ऑनलाइन पेटीशन में स्टूडेंट्स की 9 मांगे

ऑनलाइन याचिका में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, एसआरएफटीआई के अध्यक्ष व गवर्निंग काउंसिल, कुलपति, पश्चिम बंगाल सरकार और कोलकाता पुलिस से बिना देरी के ये कदम उठाने की मांग की गई है:

  1. बाहरी हमलों की स्वतंत्र जांच: 27 सितंबर और 4 अक्टूबर की हिंसा की समयबद्ध जांच, जिसकी अध्यक्षता फिल्म उद्योग का कोई सदस्य या समान स्वतंत्रता व कद का व्यक्ति करे। जांच में यह देखा जाए कि एबीजीपी कार्यक्रम की अनुमति किसने और किसके निर्देश पर दी, सार्वजनिक चेतावनियों के बावजूद 4 अक्टूबर से पहले कोई निवारक कदम क्यों नहीं उठाए गए, दोनों दिन पुलिस की भूमिका क्या रही, और संस्थान की शिकायतों में संगठनों के नाम क्यों छोड़े गए। रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

  2. हमलावरों पर मुकदमा: हमले, पथराव और यौन हिंसा की धमकियों में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर का उचित पंजीकरण व जांच, संगठनों के नाम सहित, और जांच की प्रगति का सार्वजनिक ब्योरा।

  3. 14 अक्टूबर की कथित तोड़फोड़ की स्वतंत्र जांच: प्रशासन से स्वतंत्र निकाय द्वारा, जिसमें यह भी देखा जाए कि क्या छात्र समुदाय से बाहर के लोग जिम्मेदार थे। सभी सीसीटीवी फुटेज, सुरक्षा लॉग और संबंधित सामग्री सुरक्षित रखी और सार्वजनिक की जाए। किसी छात्र को केवल प्रशासन के कहने पर दोषी न ठहराया जाए।

  4. निष्कासन आदेशों की तत्काल वापसी: 15 अक्टूबर के छह कार्यालय आदेश वापस लिए जाएं, या कम से कम अपील लंबित रहने तक स्थगित हों। किसी भी आरोप की सुनवाई केवल उपनियमों के तहत निष्पक्ष जांच से हो, जिसमें लिखित आरोप, पूरा प्रकटीकरण और व्यक्तिगत सुनवाई शामिल हो।

  5. बंदी और निष्कासन आदेश की वापसी: कार्यालय आदेश संख्या 21050/01/2024-Admn/1614 (दिनांक 15 अक्टूबर 2026) पूरी तरह वापस लिया जाए। हॉस्टल मेस, हॉस्टल, शौचालय, प्रशासनिक भवन तक पहुंच और अन्य जरूरी सुविधाएं तुरंत बहाल हों, और किसी छात्र को परिसर छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए।

  6. शांतिपूर्ण विरोध पर कोई अंकुश नहीं: परिसर में शांतिपूर्ण विरोध को दबाया, उसकी निगरानी या उसे दंडित न किया जाए। 27 सितंबर से हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी कारण बताओ नोटिस और अनुशासनात्मक कार्यवाहियां वापस हों, और छात्रों के खिलाफ कोई दमनात्मक या कानूनी कार्रवाई न हो।

  7. गेट से पुलिस हटे, धमकियां बंद हों: छात्रों को लक्षित पुलिस तैनाती खत्म हो, और छात्रों से धक्का-मुक्की या उन्हें धमकाने वाले कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो।

  8. संवाद, फरमान नहीं: अध्यक्ष, गवर्निंग काउंसिल और मंत्रालय छात्र संघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों से, निष्कासित छात्रों सहित, खुले और सद्भावनापूर्ण संवाद करें, और संकट की जड़ में मौजूद हॉस्टल आवास और छात्र सुरक्षा के लंबित मुद्दे हल करें।

  9. पूर्णकालिक प्रमुख: संस्थान को ऐसा पूर्णकालिक कुलपति चाहिए जो फिल्म शिक्षा की वास्तविक समझ रखता हो, न कि अतिरिक्त प्रभार संभालने वाला अधिकारी।

छात्रों ने कहा है कि वे कक्षाओं में लौटना, अपनी शूटिंग फिर शुरू करना और फिल्में बनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनके रास्ते में उनका विरोध नहीं, बल्कि वह प्रशासन खड़ा है जिसने जिम्मेदारी के बजाय प्रतिशोध चुना। स्टूडेंट्स कहते हैं, "एक फिल्म स्कूल के छात्रों पर हमला, हर जगह एक स्वतंत्र फिल्म स्कूल के विचार पर हमला है।"

छात्रों का आरोप है कि 27 सितंबर और 4 अक्टूबर को परिसर में हुई हिंसा की घटनाओं में उन पर हमले हुए। उनका कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
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