
मुंबई- साहिल वाकोडे की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर से लेकर आज़ाद मैदान तक विरोध तेज़ होता जा रहा है। ऑल इंडिया इंडिपेंडेंट शेड्यूल्ड कास्ट्स एसोसिएशन (AIISCA) की महाराष्ट्र महासचिव और SRC की निदेशक दीपाली सालवे ने संस्थान की आंतरिक रिपोर्ट आने से पहले कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला को संस्थान से स्थायी रूप से निष्कासित नहीं किया गया, तो वे परिसर में प्रदर्शन करंगे और इसके बाद जो कुछ भी होगा, उसके लिए निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ज़िम्मेदार होंगे। इस बीच साहिल के माता-पिता कई दिनों से आज़ाद मैदान में अनशन पर हैं, और AIISCA ने 16 अक्टूबर को वहाँ प्रदर्शन का आह्वान किया है।
सालवे ने कहा कि अन्याय के आगे घुटने टेकने से बेहतर है कि बगावत का रास्ता चुना जाए। उनके मुताबिक, साहिल वाकोडे के इंसाफ़ की यह लड़ाई अब सिर्फ़ एक केस नहीं, बल्कि उत्पीड़न के खिलाफ़ खड़े होने का ऐलान है। उन्होंने कहा, "जब तक अपराधी सलाखों के पीछे नहीं जाते, यह संघर्ष और तेज़ होगा।"
आईआईटी बॉम्बे की आंतरिक रिपोर्ट के बारे में सालवे ने कहा कि वह आने वाली है और उनके अनुसार यह जानी-पहचानी बात है कि रिपोर्ट प्रो. दूल्ला के पक्ष में आएगी। उन्होंने संस्थान को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि अगर प्रो. दूल्ला को स्थायी रूप से निष्कासित नहीं किया गया तो वे परिसर पर धावा बोलेंगे और निदेशक केदारे "जो भी होगा" उसके लिए ज़िम्मेदार ठहराए जाएँगे।
साहिल के माता-पिता मुंबई के आज़ाद मैदान में कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
छात्र साहिल वाकोडे की मौत और डूला के खिलाफ लगे आरोपों के सिलसिले में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को केदारे से मिलने की अनुमति दी गई। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने कहा कि निदेशक ने चल रही जांच के बारे में कोई स्पष्टता नहीं दी और न ही प्रोफेसर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का कोई आश्वासन दिया। विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने आरोप लगाया कि 30 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, उनके साथ मारपीट की गई और रिहा करने से पहले उन्हें पवई पुलिस स्टेशन ले जाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डूला को निलंबित नहीं किया गया तो वे परिसर में वापस लौटेंगे।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि छात्रों को सड़क पर घसीटा गया और ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग हुआ।
AIISCA ने सभी नागरिक समाज संगठनों, आंबेडकरवादियों, समुदाय के सदस्यों, राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और न्यायप्रिय नागरिकों से अपील की है कि वे उनके साथ एकजुटता दिखाएँ। प्रदर्शन 16 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे से आज़ाद मैदान में होगा। उसका नारा है "जस्टिस फॉर साहिल।"
अंबेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्कल (APPSC) ने 14 अक्टूबर को हुई घटना पर विरोध जाहिर किया। समूह का यह भी आरोप है कि प्रशासन ने पुलिस के लिए गेट खोला और बाकी के लिए बंद रखा। उसके अनुसार, 27 दिनों से धरने पर बैठे छात्रों की ओर प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया, साहिल मामले में निष्पक्ष जाँच के लिए भी कुछ नहीं किया, बल्कि "फ़ेक न्यूज़" फैलाने और "मीडिया ट्रायल" को बढ़ावा देने का काम किया। APPSC ने प्रशासन और पवई पुलिस के "गठबंधन" की निंदा करते हुए माँग की कि सभी आवाज़ें सुनी जाएँ और प्रदर्शनकारी छात्रों से संवाद हो।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी बॉम्बे ने सहपाठियों से उनकी जाति, प्रवेश श्रेणी या प्रवेश परीक्षा की रैंक पूछने को अनुचित बताते हुए अपने भेदभाव-रोधी दिशानिर्देश अपडेट किए हैं। डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स कार्यालय की ओर से भेजे गए ईमेल में कहा गया कि जाति, प्रवेश श्रेणी या प्रवेश परीक्षा की रैंक पूछना, चाहे जिज्ञासा में ही क्यों न हो, पूर्वाग्रह पैदा कर सकता है और छात्रों पर बुरा असर डाल सकता है। संस्थान ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे ऐसी बातचीत से बचें जिससे किसी की जाति या उससे जुड़ी पृष्ठभूमि उजागर हो और साझा रुचियों के आधार पर दोस्ती बनाएँ।
ईमेल के मुताबिक, पूछने वाले को यह सवाल मासूम लग सकता है और वह महज़ जिज्ञासा से प्रेरित हो सकता है, फिर भी ऐसा सवाल अक्सर दूसरे छात्र पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।अपमानजनक, घृणास्पद, जातिवादी या लैंगिक भेदभाव वाले संदेश साझा करने और धर्म या यौन रुझान के आधार पर पूर्वाग्रह दर्शाने वाली सामग्री पर भी रोक है। संस्थान ने आरक्षण नीति को "अक्षरशः और भावना के साथ" लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई और उल्लंघन पर कड़ी सज़ा की चेतावनी दी।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, क्राइम ब्रांच अब तक करीब 70 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिनमें निदेशक केदारे, प्रो. दूल्ला, कई छात्र और मृतक की महिला मित्र व सहपाठी शामिल हैं। पुलिस को मृतक के फ़ोन, टैबलेट और लैपटॉप तक पहुँच मिल चुकी है, पर आईफ़ोन अभी अनलॉक नहीं हुआ है और कलीना की फ़ॉरेंसिक प्रयोगशाला में है। पुलिस ने संस्थान से मार्कशीट, लिखित शिकायतें और, यदि हों तो, माफ़ीनामे जैसे दस्तावेज़ भी माँगे हैं।
प्रो. दूल्ला पुलिस एफआईआर में नामित हैं, जिसमें जातिगत भेदभाव के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है, और उन्हें निष्पक्ष जाँच के लिए छुट्टी पर भेजा गया है।
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